ज्योतिष (Astrology)-1
मनुष्य सभी प्राणियों में श्रेष्ठ होने के फलस्वरूप व अपनी जिज्ञासु प्रवृत्ति को शान्त करने के लिए निरन्तर प्रयत्न शील रहता है। अपनी इसी अन्वेषण के कारण ज्ञान विज्ञान के नये क्षेत्रों व आयामों का परिचय व गहन अध्ययन सम्भव हो सका। ज्योतिष विज्ञान /शास्त्र भी इसी जिज्ञासावृत्ति का सहज उत्कर्ष है। मनुष्य अपने भविष्य के प्रति उत्सुक रहता है, वह सभी प्रकार के पूर्वाभासो का लोभी दिखाई देता है, और इसी के कारण अपने अतीत को न देखकर भविष्य को देखना चाहता है। यही कारण है कि ग्रह, नक्षत्र, ब्रह्माण्ड, तारा,पिण्ड, भचक्र आदि का ज्ञान व अनुसंधान करने की दिशा में प्राचीन विद्वानों व अन्वेषक आच...