पंचायती राज (Panchayati Raj सामान्य-9)
अभी जुलाई में उत्तराखंड में त्रिस्तरीय चुनाव होने जा रहे हैं इस ब्लॉग का उद्देश्य है सभी इस को समझने के बाद विचार करें। पंचायती राज के अन्तर्गत भारत में स्थानीय शासन का उद्देश्य लोकतांत्रिक शासन वाले देशों के समान ही सरकारी निर्णयों में जनता की भागीदारी को बढ़ाने के लिए सत्ता का विकेन्द्रीकरण सुनिश्चित करना है। ग्रामीण स्तर पर व्याप्त समस्याओं का हल केन्द्रीय स्तर द्वारा नहीं किया जा सकता है, इन समस्याओं को सत्ता के विकेन्द्रीकरण के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है जिसका सबसे अच्छा माध्यम र्गाँवसभाये हो सकती हैं। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद सत्ता के विकेन्द्रीकरण हेतु स्थानीय स्वशासन की स्थापना के लिए गम्भीर प्रयास किए गये, अनेक समितियां एवं आयोग गठित करके इस सन्दर्भ में 73वा तथा 74 संविधान संशोधन द्वारा भारत में स्थानीय स्वशासन को संविधानिक स्वरूप दिया गया है। स्थानीय स्वशासन में जनता अपनी समस्याओं को स्वयं हल कर सकती है। राजनीतिक चेतना का विकास होता है। कार्योके बंटवारे से केन्द्र व राज्य स्तर की सरकारों का बोझ कम होता है। सत्ता के विकेन्द्रीकरण से जनकल्याणकारी कार्यों को आसानी से पूरा किया जा सकता है। आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक रूप से पिछड़े वर्गों को राजनैतिक में भागीदारी का मौका मिलता है। भारत में स्थानीय शासन के दो स्तर, एक ग्रामीण स्थानीय शासन दूसरा नगरीय स्थानीय शासन आतीं हैं। ग्रामीण के अन्तर्गत गाँव पंचायते व नगरीय के अन्तर्गत नगरपालिकाये आती है। गांधी जी ग्राम स्वराज के पक्षधर थे, संविधान निर्माताओं ने संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अन्तर्गत अनुच्छेद 40 मे गाँव पंचायतो का प्रावधान कर राज्यों को इसके गठन की शक्ति प्रदान की है। इस कार्य के लिये केन्द्र में पंचायती राज एवं सामुदायिक विकास मंत्रालय का गठन किया गया है। पहली बार 2 अक्तूबर 1952 को सामुदायिक विकास कार्यकम विकास में जनता की सहभागिता सुनिश्चित के उद्देश्य से प्रारम्भ किया गया लेकिन यह असफल रहा। पंचायतों के चुनाव कराने के लिए एक राज्य निर्वाचन आयोग की स्थापना की व्यवस्था की गयी है। यह आयोग पंचायतों के लिए चुनाव पर्यवेक्षण ,निर्देशन, नियंत्रण करता है। चूंकि इस समय उत्तराखंड में पंचायतों का चुनाव कार्यकम जारी हो गया है, इसलिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम अपने पंचायत जन प्रतिनिधियों का चयन सोच समझ कर करे, जो अपने अपने गाँव/ब्लाक/जिले के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दें सके। चरेवेति चरेवेति।
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