ज्योतिष (Astrology)-1

     

   मनुष्य   सभी   प्राणियों  में  श्रेष्ठ  होने  के  फलस्वरूप  व अपनी  जिज्ञासु  प्रवृत्ति को शान्त    करने के लिए  निरन्तर  प्रयत्न शील  रहता है। अपनी  इसी अन्वेषण  के कारण  ज्ञान  विज्ञान  के नये  क्षेत्रों  व आयामों  का परिचय  व गहन  अध्ययन  सम्भव  हो सका। ज्योतिष  विज्ञान /शास्त्र  भी इसी  जिज्ञासावृत्ति  का सहज उत्कर्ष  है। मनुष्य  अपने   भविष्य  के प्रति  उत्सुक  रहता है, वह सभी प्रकार के पूर्वाभासो का लोभी दिखाई  देता है,  और   इसी के  कारण  अपने  अतीत  को न देखकर  भविष्य  को देखना  चाहता है।  यही कारण है कि  ग्रह, नक्षत्र, ब्रह्माण्ड, तारा,पिण्ड,    भचक्र  आदि का  ज्ञान  व अनुसंधान  करने की  दिशा में  प्राचीन  विद्वानों  व अन्वेषक  आचार्यों  ने जो प्रयास  किये  उन सबका  व्यावहारिक  नामकरण  ज्योतिष  शास्त्र  किया गया है। इस शास्त्र  के मुख्य  दो भेद किये गये हैं  एक गणित  व दूसरी  फलित। गणित के  अन्तर्गत  करण,तन्त्र,व सिद्धांत  का ग्रहण  होता है  तथा  फलित  ज्योतिष  के मूल  रूप से पाँच  भेद माने जाते हैं। 1- होरा 2-ताजिक 3- मुहूर्त, 4-प्रश्न  व 5-शकुन। फलित ज्योतिष  के होरा नामक भेद के अन्तर्गत  व्यक्ति  की जन्मकुण्डली  बनाना  तथा  तदनुसार  फल कथन  करना  अन्तर्हित  किया गया है, जो कि  ज्योतिष भेद  वास्तव  में  हमसे  सीधा सम्बन्ध  रखता है। जन्म का सही  समय यदि  अंकित  हो  तो जन्म के  समय सूर्य आदि ग्रहो व मेषादि राशियो की स्थिति के आधार पर  व्यक्ति के सारे  जीवन  के शुभाशुभ  फल का विवेक  किया जा सकता है। ग्रहो के समूह (सौर मण्डल) की गति  व  स्थिति   जब इस विषय पर  आधार  होतीं हैं तो  यह स्वाभाविक  ही है पहले  राशि चक्र  व सौर मण्डल  व अन्य  आधारभूत आवश्यक  तत्वों की  जानकारी  होनी  चाहिए। राशि चक्र (भचक्र )-संस्कृत में  'भ'  शब्द का  अर्थ  राशि  या नक्षत्र होता है इसी कारण राशियों  के समूह  को   भचक्र  या राशि चक्र  कहा  जाता है, यह भचक्र  वास्तव में  एक कल्पित  वृत है ,इसी के बीच  से सूर्य  का संक्रमण  पथ( ecliptic) गुजरता है ,इस कारण इसे क्रान्तिवृत(zodiac) भी कहा  जाता है। यह वृत 360 अंश  का विस्तार  रखता है। इसके 12 समान भाग हैं, जिनमें  से प्रत्येक भाग का मान 30 अंश  होता है। इसी  30 अंश  वाले  एक भाग को  राशि  कहते हैं ।यह 12 राशियाँ  परिधि पर  स्थित है, यह अपनी  धुरी पर  एक दिन में  एक बार पूर्व से पश्चिम  की तरफ घूमता है  इसी  भ्रमण के  कारण  राशियों का  उदय व अस्त  होता है। ये राशियाँ  12 होती हैं। 1-मेष(Aries),2-वृष(Taurus),3-मिथुन (Gemini),4-कर्क (Cancer),5-सिंह (Leo),6-कन्या (Virgo),7-तुला(Libra),8-वृश्चिक (Scorpio),9-धनु(Sagittarius),10-मकर(Capricorn), 11-कुम्भ (Aquarius),12-मीन(Pisces) ।  ग्रहों की  संख्या  9 होती है। सूर्य (sun),चन्द्र (moon),मंगल (mars),,बुध (mercury),बृहस्पति (Jupiter),शुक्र (venus), शनि (saturn),राहू(rahu),,केतु(ketu)। राहू और केतु को  छाया ग्रह (shadowy-planets) माना गया है। सभी  9 ग्रहो में  चन्द्र, राहु, व केतु को छोड़कर  सभी  ग्रह  सूर्य  की परिक्रमा  करते हैं। जो पृथ्वी  से जितना  अधिक दूर होगा उसका  भ्रमण काल भी लम्बा  होगा। पृथ्वी के  निकट चन्द्रमा  है  यह  यह पृथ्वी  की परिक्रमा  करता है, इसके बाद क्रमश  बुुध, शुक्र  सूर्य, मंगल, बृहस्पति  व शनि  की क्क्षा स्स्थित है।  यही कारण  है कि  चन्द्रमा  एक राशि को जहाँ  लगभग  2 दिन  और कुछ घण्टों  मे पूरा कर लेता है  वहीं  शनि  को ढाई साल लग जाते हैं।  समय  समय  पर अपने  ब्लॉग  के  माध्यम  से   ज्योतिष  के बारे   जानकारी   लिखता  रहूँगा,पाठकों  से अनुरोध  भी है कि वे इन सामान्य  जानकारी  व  महत्वपूर्ण  विषयों  पर  लेख को भी साझा  करते  रहेंगे।   चरैवेति चरैवेति। 

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