ज्ञान का दीप जलाए रखूगा

     


आज के ब्लॉग में  एक सारगर्भित  कविता   का उल्लेख कर रहा हूं  , हो सकता है  कई पाठकों के द्वारा यह  पढ़ी  गयी हो , यह  एक  ऐसे महानविभूति के द्वारा  लिखित  है जिसको कि  केवल  देश  ही नहीं  जानता है,   अपितु  सारा संसार  जानता है , और आपका पूरा  जीवन  प्रत्येक  के लिए  एक आदर्श व प्रेरणा  का स्रोत रहा /रहेगा  ।   इसका  उल्लेख  मै कविता  के अंत मे करूंगा, मेरा लिखने का उद्देश्य  भी यही है कि  आने वाली पीढ़ी  को  ऐसी  कविता  , किताबें  व विचारों  को पढना  चाहिए, जिससे  उनमें  सृजनात्मकता  बढे और  वे  भी कुछ  अच्छा  करने के लिए  प्रेरित हो। चरेवेति चरेवेति। 

                            ज्ञान  का दीप  जलाए रखूगा

 हे भारतीय  युवक 

ज्ञानी- विज्ञानी 

मानवता  के प्रेमी 

संकीर्ण  तुच्छ  लक्ष्य 

की लालसा  पाप है। 

मेरे  सपने  बड़े 

मैं  मेहनत करूंगा

मेरा  देश  महान  हो

धनवान  हो,गुणवान  हो

यह प्रेरणा  का भाव अमूल्य  है,

कहीं  भी धरती  पर ,

उससे ऊपर  या नीचे 

दीप जलाए  रखूगा

जिससे  मेरा ,  देश महान हो। 

(22 मार्च 2002 को डा0 कलाम ,  जो  भारतीय  गणतंत्र के 11 वे राष्ट्रपति थे 

   द्वारा  अंग्रेजी में  लिखी  कविता  का हिंदी  अनुवाद)



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी (Permanent Capital of uttrakhand)

सिद्धसौड बड़मा (रुद्रप्रयाग )शिक्षा का केंद्र (center of education, siddhsour badma)

वृद्धावस्था( old age)