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उत्तराखंड में पलायन( Migrations)

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उत्तराखंड  पर्वतीय  राज्यों  में  सम्मिलित होने के  साथ  साथ  सीमावर्ती  राज्य  भी है  जिसकी  सीमा  चीन  व नैपाल से लगी है , ऐसे  में  इसकी  महत्ता और भी  महत्वपूर्ण  हो जाती है  । पर्वतीय   क्षेत्रों से पलायन एक गंभीर समस्या है,  जो उत्तराखंड  में व्यापक रूप से देखी जा रही है। उत्तराखंड  में  विशेष  कर यह आम लोगों  को प्रभावित  कर रही है,  समस्या न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को भी कमजोर करती है।पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन के  कई कारण  हैं  परन्तु  रोजगार  की कमी , शिक्षा , स्वास्थ्य, संसाधनों  का  अभाव  प्रमुख हैं  है ।  ये तीनों समस्याये    एक दूसरे  की  पूरक भी  हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हैं, जिससे अधिकतर लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण-पर्वतीय लो...

मितव्ययता (saving)

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         जीवन यापन के लिए  रूपये  पैसों  की आवश्यकता होती है, इसलिए रुपये  का संबध  जीवनयापन  के  हर क्षेत्र  से है। पैसा कमाना  जितना  श्रमसाध्य  है ,उससे अधिक  कहीं  उसका विवेक पूर्ण व्यय  करने  से है। यदि  व्यय  करने  में  मितव्ययता का ध्यान  न रखा तो भविष्य  में  आपका  और आपके  उन बच्चों का जीवन  कष्टदायक  हो सकता है   जिन्होंने  पैसे को व्यय करने  में  मितव्ययता का  ध्यान  नहीं  रखा है । परिवार  की आवश्यकताओं को ध्यान  में  रखे बिना,  अनैतिक कार्यों  और विलासिता  में  व्यय करते  रहना  बुद्धिमत्ता  नहीं  मान सकते हैं। ऐसे  व्यक्ति  स्वार्थी  या अनैतिक  ही हो सकते हैं,भले  ही  उनकी  अपनी  दृष्टि  में  वे भले  हो, पारिवारिक, सामाजिक  आदर्शों  की दृष्टि  से   ठी...

चिन्तन (Thinking)

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     मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जिस समाज  में  वह रहता उसमें  अनगिनत  प्रकार के अनेक  विचारों  के  लोग होते हैं,  हम चाहते  हुए  भी सबको  एक जैसा  नहीं  बना सकते हैं और  स्वयं  को बदलना  भी   कठिन   होता है । दूसरों की अभिरुचि  व आदतों  को बदलना  तो और भी कठिन है,  हर व्यक्ति  चाहता  है ,उसके  हर कार्य  उसके  अनुसार  हो , यह एक हवाई  कल्पना  से अधिक कुछ  नहीं है।  जो ऐसी  कल्पना करते हैं या इस प्रकार का सोचते हैं  वे वास्तविकता से पूर्ण  रूप से अपरिचित हैं,  व्यक्तिगत,  परिवारो,   व समाज  में अधिकतर  समस्याए  भी इसी कारण  पैदा  होती है , मनुष्य  सामाजिक  मनोविज्ञान को  नहीं  समझ पाता  , अनावश्यक  रूप  से चिंतित  रहने का कारण भी यही है  कि जब   वह  अपनी   कल्पना के  अनुरू...

सामान्य हिन्दी में क्या जानना आवश्यक है ?(सामान्य-5)

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           7  फरवरी २५ के  ब्लाग में  मैंने   लिखा  था, कि   अधिकांश  पदों  के   चयन  हेतु  प्रतियोगिता   परीक्षाओं  में   सामान्य हिन्दी  का  पेपर  होता है,  कुछ  में  qualifying  होता है, कुछ  प्रतियोगिताओं  में  सामान्य  हिन्दी  के अंक  मैरिट लिस्ट  में  जुड़ते हैं।, इसलिए  दोनों  दशाओं  में  ही  सामान्य हिन्दी की महत्ता  को कम नहीं  आंका  जा सकता है,   ।  अब प्रश्न  यह उठता है , सामान्य हिन्दी  में  क्या  पढ़ा जाय , कैसे  पढा जाय और क्यों  पढ़ा जाय,  इसमें  क्या  आवश्यक है इसके  लिए  यह ब्लॉग  सभी  अभिभावकों,  जिनके बच्चे तैयारी  कर रहे हैं  व जो स्वयं  तैयारी  कर रहे हैं,   सभी प्रतिभागियों  के लिए  आवश्यक   हो सक...

अध्ययन (Reading सामान्य-4,)

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  किसी के  भी जीवन  में  अध्ययन  का  बहुत ही महत्त्वपूर्ण  स्थान  है, उसकी प्रगति  में उसके  किताबों  के पढ़ने  के प्रति  रूचि  को दिखाता है, अध्ययन  और पढ़ने   में  भी अन्तर  है,  एक हम अखबार या पत्र पत्रिकाओं  को पढते  उसमें  जो सूचना या समाचार  दिये  गये होते  हैं  उसको  अपने  पास संग्रहित  कर देते हैं, अगर देखा जाये तो एक प्रकार  से सूचनाओं  को संकलित  करने  की विधि है।  लेकिन  जब हम किसी  कक्षा  में  किसी  विषय का अध्ययन करते  हैं,  तो इसका  मतलब ये है कि हम उसको समझ  के साथ  और deeply  अध्ययन  कर रहे  होते  हैं , कि आने   वाले  समय  में  इसका  उपयोग  अपने  जीवन  में  कर सकें  या दूसरों  को भी   समझा सकें।  इसमें  विषय की  गहराई  के साथ पर्याप्त  व...

समस्या समाधान

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       आज  के    ब्लॉग  में  मैं   एक  पढ़ी   हुई  कहानी  का जिक्र  कर रहा हूँ  शायद  इससे  आपको  पता  लग जायेगा  कि यह क्यों  लिखीं  गयी है,  इसका उद्देश्य क्या है  ।  एक गाँव  में  एक वयोवृद्ध  सरपंच  रहते  थे। लोग  दूर- दूर  से अपनी  समस्याओं  के समाधान  और तकलीफ़ों  का न्याय  कराने उनके  पास आया करते थे। सरपंच  के नाम से ही उनकी  ख्याति थी। एक दिन  किसी  गाँव  से कुछ  आदमी  अपना  इन्साफ  कराने  आए। उस गाँव में  वे पहली  बार ही आए थे और सरपंच  का घर भी उन्होंने  नहीं  देखा था।इसलिए  गाँव  के समीप  पहुँचने  पर उन्होंने  नियत स्थान  पर पूछ  ताछ आरम्भ की,। एक खेत  में  चार हलवाहे खेत जोत रहे थे , उनसे  उन्होंने   पूछा- सरपंच का घर बताये  और उनके कु...

नवाचार ( innovation )

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           आज के  ब्लॉग  मैं  अपना  एक अनुभव  साझा  कर रहा हूँ  जो  अध्ययन / अध्यापन  में  काफी  लाभदायक  होगा ,  ऐसा  मेरा  मानना  है,  जब हमारी  एकाग्रता  बढ़ती है  तो उस अवधि  में  हम जो कार्य  करते या करवाते   है , वह हमारे      मस्तिष्क  पर अपनी  छाप  छोड़ता है , या लम्बे  समय    तक  याद  रहता   है  ।  बात    तब की है  जब    मैं किसी  एक  स्कूल में(रा0 इ0का0 तिलकनगर   )प्रधानाचार्य  था,    अक्सर  इण्टर स्तर पर विज्ञान  के छात्रों  में    परीक्षाफल  का डर /  भय अधिक   रहता है,  और  इसी   डर को कम करने के लिए  अक्सर  मै भी   कक्षाओ  में  विशेषकर   कक्षा  12  व कक्षा  10  की कक...

सामान्य हिन्दी General Hindi (सामान्य-3)

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 आज प्रत्येक घर से बच्चे  विभिन्न  प्रकार की  प्रतियोगी  परीक्षाओं में  बैठ रहे हैं , व परीक्षा की तैयारी  भी कर रहे हैं।  यह जानते हुए भी कि  कि लगभग  प्रत्येक  परीक्षा  में  एक पेपर  सामान्य  हिन्दी  का अवश्य  होता है,  चाहे  वह  कोई  भी परीक्षा  हो, और उसका स्तर  भी हाईस्कूल  का होता है  और क्वालिफाई  अक  लाने होते हैं   ।  बहुत बच्चे  उसको  क्वालिफाई  ही  नहीं  कर पा रहे हैं।   जब इस पेपर को  क्वालिफाई ही  नहीं  कर पायेंगे   तो बाकी के पेपर यदि  बहुत  अच्छे  हुए भी हैं , तो इसका  कोई  अर्थ नहीं रह जाता है,   इसका   अर्थ  यह हुआ कि हाईस्कूल  स्तर पर बच्चे  हिन्दी  को गौण समझते  हुए  ठीक  से नहीं  पढ रहे हैं, जिसका खामियाजा  उनको  भुगतना  पड़  रहा है।  मुझे  अच्छे...

भण्डारण ( store )

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  आज  समाज   में  दो प्रकार के  लोग  हैं,   एक तो वह हैं  जिनकी आमदनी  अच्छी  खासी  है, और  उन्ही   को  कहते  सुना  भी  जा सकता है कि  मंहगाई  ने कमर तोड़ दी है  , इसके   बावजूद   अपनी  इच्छाओं  के वशीभूत  होकर   ऐसे  लोग केवल  और  केवल  धन संग्रह  पर लगे  रहते  हैं, या  हर वस्तु  को एकत्रित  कर रहे  होते हैं ।  निश्चित ही  जब एक ही व्यक्ति  आवश्यकता  से अधिक  वस्तु या धन एकत्र  करेगा  तो  समाज  के दूसरे  लोगों के लिए  इसकी  कमी  होगी, ये अर्थशास्त्र  भी   कहता है,  इसका  प्रभाव  दूसरे  लोगों  पर  भी पडेगा, दूसरे  वह लोग  है जिनकी  आमदनी  सीमित है,  और उसमें  भी  वह  खुश  हैं  और इतना  प्रयास आगे  करते हैं कि...

Patience धैर्य

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   धैर्य  से  काम करना,  दूसरों  से काम  करवाना,  व   काम लेना  किसी भी मनुष्य  का( प्रत्येक का )  महत्वपूर्ण  गुण है  । ठीक  इसके  विपरीत  धैर्य  खोना , यह भी किसी के लिए  बहुत  बुरा  है , और किसी  विपत्ति  से कम नहीं है,।  कल्पना  करो  यदि  कोई    अपने  दिमाग  का   संतुलन   खो बैठता  है  तो   मैं  समझता  हूँ , कि  इससे  भारी विपत्ति  कोई  नहीं है , धैर्य  खोने  के बाद दिमाग का संतुलन न होने  के कारण,  ठीक  से काम नहीं करता ,  इससे  तनाव  पैदा होता है  और तनाव  से आपका  स्वास्थ्य  भी खराब  हो सकता है  कई बीमारियों  का कारण तो तनाव  ही होता है, ,  हो सकता है  कि   तब  (तनाव में )जो निर्णय  आप लेते/ ले रहे  होते  हैं,  वह  तर्क हीन हो...

महत्वाकांक्षा (Ambitions)

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     मनुष्य  संसार   के  सभी  प्राणियों में  सबसे  बुद्धिमान  प्राणी  होनेके  कारण ,  सबसे   अधिक  महत्वाकांक्षी  होता है ,  वैसे  तो  अच्छे  से रहने  व खाने  या  सुख भोगने  की इच्छा   संसार  के  सभी प्राणियों में  पायी जाती है,   लेकिन  बुद्धिमान होने के  कारण मनुष्य  में   यह अति  प्रबल होती है, इसी कारण  (सुखभोग)  वह अनेक   प्रकार के कार्यों   में  संलिप्त  भी  रहता है  , ऐसा  आप भी मन से  महसूस  करते होंगे कि,  अच्छा  खाना, अच्छा  रहना , अच्छा   पहना, अच्छा  देखना , अच्छा  सब कुछ  हो  आदि   को प्राप्त  करने के  कर्म  में मनुष्य  लगा रहता है,   यहाँ   तक  कि   दूसरों  से अधिक  समर्थ  व  सम्पन्न  ...