अध्ययन (Reading सामान्य-4,)

 


किसी के  भी जीवन  में  अध्ययन  का  बहुत ही महत्त्वपूर्ण  स्थान  है, उसकी प्रगति  में उसके  किताबों  के पढ़ने  के प्रति  रूचि  को दिखाता है, अध्ययन  और पढ़ने   में  भी अन्तर  है,  एक हम अखबार या पत्र पत्रिकाओं  को पढते  उसमें  जो सूचना या समाचार  दिये  गये होते  हैं  उसको  अपने  पास संग्रहित  कर देते हैं, अगर देखा जाये तो एक प्रकार  से सूचनाओं  को संकलित  करने  की विधि है।  लेकिन  जब हम किसी  कक्षा  में  किसी  विषय का अध्ययन करते  हैं,  तो इसका  मतलब ये है कि हम उसको समझ  के साथ  और deeply  अध्ययन  कर रहे  होते  हैं , कि आने   वाले  समय  में  इसका  उपयोग  अपने  जीवन  में  कर सकें  या दूसरों  को भी   समझा सकें।  इसमें  विषय की  गहराई  के साथ पर्याप्त  विचार  व चिंतन  होता है । आज  की सूचना  क्रांति  में  अच्छे  साहित्य   व अच्छी  किताबों  को पढ़ने  वाले  पाठकों  की संख्या  में  भारी  गिरावट  है  और इस गिरावट या न्यूनता  का प्रभाव   हर वर्ग  में  देखा जा   सकता है।  विचारों  के सृजन  में  अच्छे  साहित्य  व अच्छी  पुस्तकों  का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यदि  कोई गंदा, फूहड़, सस्ता या अश्लील  साहित्य   पड़ता है , (आज पढने  में  कुत्सित  साहित्य की भरमार  है,)   तो निसन्देह  उसके  विचारों  में  उसका प्रभाव  होगा। कहते हैं कि साहित्य  समाज  का दर्पण होता है , साहित्य को देखकर  किसी  समाज   के बारे वास्तविक  स्थिति  का परिचय  प्राप्त  किया जा सकता है।   आज हमारे  समाज  का स्वरूप इतना कुरुप  हो गया है  कि इसको लिखने  के लिए  शब्द  नहीं  मिल रहे हैं। इसका अन्दाजा  इस बात  से लगा  सकते हैं कि कोई  दिन  ऐसा  नहीं है  जब अखबारों, समाचारो में  बुरी  खबर न हो,  कई  बार तो  बड़ी  बड़ी   घटनाओ  को करने  वाले उच्च  योग्यताधारी  निकृष्ट  विचारों से  युक्त लोग है  ।   इन सब पर सभी को  चिंतन  करना होगा कि आने  वाली  पीढ़ी  को किस तरह से अच्छे  साहित्य/ किताबों   की ओर  अग्रसर  किया  जा सके। अध्ययन  की उपयोगिता  असाधारण  होती है,  यह मन के साथ-साथ  विचारों  को भी स्वस्थ  रखता है  साथ ही  जीवन  में भी  प्रभाव कारक होता है। हमें   अपने   पढ़ने वाले बच्चों को  देख  कर  आकलन  अवश्य  करना  होगा  कि मेरा  बच्चा  किस प्रकर   का साहित्य  पढ  रहा है  ।चरैवति  चरैवेति। 



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