भण्डारण ( store )

 


आज  समाज   में  दो प्रकार के  लोग  हैं,   एक तो वह हैं  जिनकी आमदनी  अच्छी  खासी  है, और  उन्ही   को  कहते  सुना  भी  जा सकता है कि  मंहगाई  ने कमर तोड़ दी है  , इसके   बावजूद   अपनी  इच्छाओं  के वशीभूत  होकर   ऐसे  लोग केवल  और  केवल  धन संग्रह  पर लगे  रहते  हैं, या  हर वस्तु  को एकत्रित  कर रहे  होते हैं ।  निश्चित ही  जब एक ही व्यक्ति  आवश्यकता  से अधिक  वस्तु या धन एकत्र  करेगा  तो  समाज  के दूसरे  लोगों के लिए  इसकी  कमी  होगी, ये अर्थशास्त्र  भी   कहता है,  इसका  प्रभाव  दूसरे  लोगों  पर  भी पडेगा, दूसरे  वह लोग  है जिनकी  आमदनी  सीमित है,  और उसमें  भी  वह  खुश  हैं  और इतना  प्रयास आगे  करते हैं कि  जैसे  मिल रहा है, और   ऐसे  मिलता  जाय और इतने  के लिए  प्रयास  भी करते हैं। प्रायः  यह देखा जा सकता है कि लोग  अपनी  आवश्यकता  को ध्यान  मे रखे बग़ैर  अधिक    वस्तु  क्रय   कर अपने  लिए  मुसीबत  मोल लेते हैं,  यह पता  ही  नहीं  पेट को जितनी  आवश्यकता  होती है  उतना  ही  लाभ  देता है , अधिक  खायेंगे  तो पेट  ही खराब  होगा  और   बीमार  हो जाओगे। मेरा  अनुभव भी यह    है कि    कुछ  लोग  आवश्यकता  न होने  पर भी  सस्ते  माल के चक्कर  मे बहुत  सी वस्तुएं  खरीद  कर रख लेते  हैं ,  इस पर विचार  ही नहीं  करते कि अमुक  वस्तु  उनके  लिए  उपयोगी है  या अनुपयोगी,  एक तरह से ये धन का दुरुपयोग  ही है   , आप लोगों  का भी कई  ऐसे  लोगों  से सम्पर्क  होगा  या अनुभव  होगा  जिन्हें  अनावश्यक  खरीद  फरोख्त  का शौक होता है । आजकल  साधारण  लोगों के  घरों  मे भी कई जोड़े  मौजे, जूते  दर्जनों  कपड़े ,  वर्तन  आदि   मिल जायेंगे,  इतना ही  नहीं  कोरोना के समय से तो लोग  अनाज का भी  अधिक  भण्डारण  करने  लगे हैं, जितनी  चीज़  खरीदी जाती है  सबके  सब एक बार में  तो काम नहीं  आती है , कभी-कभी  तो रखी चीज़  बर्बाद  भी  हो जाती है  , आशय साफ है,  यदि  सुखी जीवन  की लालसा  है,  तो आवश्यकता अनुसार  ही  वस्तुओ  का  भण्डारण  करना चाहिए  , मैं  यह नहीं  कह रहा हूँ  कि भण्डारण करना  गलत  है,  एक सीमा  तक ही उचित होगा,   सुखी  जीवन  जीने के लिए  वस्तुओं  की  आवश्यकता  के  अनुसार  ही चुनाव सोच  समझकर  करना  आवश्यक  व हितकर होगा, ऐसा  मैं  मानता हूँ । कुछ  लोगों  को तो देखा  या   उनके    के बारे  में  सुना  जा सकता है कि  दो -चार पीढ़ीयो के लिए  व्यवस्था  करने  के लिए  काम करने  की लालसा  रखते हैं और करते  भी हैं। हो सकता है  उनके लिए उपयोगी हो पर समाज के लिए  तो  अच्छा  नहीं  है। भण्डारण  उतना ही  करना  चाहिए  जितनी  आवश्यकता है। चरेवेति चरेवेति  ।

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