सामान्य हिन्दी General Hindi (सामान्य-3)
आज प्रत्येक घर से बच्चे विभिन्न प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठ रहे हैं , व परीक्षा की तैयारी भी कर रहे हैं। यह जानते हुए भी कि कि लगभग प्रत्येक परीक्षा में एक पेपर सामान्य हिन्दी का अवश्य होता है, चाहे वह कोई भी परीक्षा हो, और उसका स्तर भी हाईस्कूल का होता है और क्वालिफाई अक लाने होते हैं । बहुत बच्चे उसको क्वालिफाई ही नहीं कर पा रहे हैं। जब इस पेपर को क्वालिफाई ही नहीं कर पायेंगे तो बाकी के पेपर यदि बहुत अच्छे हुए भी हैं , तो इसका कोई अर्थ नहीं रह जाता है, इसका अर्थ यह हुआ कि हाईस्कूल स्तर पर बच्चे हिन्दी को गौण समझते हुए ठीक से नहीं पढ रहे हैं, जिसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ रहा है। मुझे अच्छे से याद है कि उतराखण्ड लोग सेवा आयोग की एक प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा में कुछ लोग प्रारम्भिक परीक्षा क्वालीफाई हो गये थे , जो कि अपने आप में ही महत्वपूर्ण है, लेकिन मुख्य परीक्षा में सामान्य हिन्दी के पेपर में न्यूनतम अंक नहीं ला पाए, और बाहर हो गये, इसलिए यह एक विचारणीय प्रश्न है। मेरा सभी ऐसे परीक्षार्थियों से यह अनुरोध रहेगा कि सामान्य हिन्दी को हल्के में न लें। जहां तक मैं समझता हूं कि हिंदी भाषी प्रदेशों में तो यह अति आवश्यक होता है। सिविल सेवा में भी एक पेपर सामान्य हिन्दी का ही क्वालीफाई होता है। सामान्य हिन्दी में पेपर में क्या क्या पूछा जा रहा है या पूछा जा सकता है , इसके लिए आप उस परीक्षा का पाठ्यक्रम देख सकते है व पिछले सालों के पूछे गए सवाल पढ़ सकते है। समय समय पर मैं अपने ब्लॉग में प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में लिखता रहूंगा। अपने ब्लॉग की अन्य पोस्ट में भी महत्वपूर्ण तथ्य अनुभव आधारित लिखता रहूंगा व अब तक लिखा भी है। आपको इससे शायद लाभ ही होगा यदि आपने पढ़कर समझा है । चरेवेति चरेवेति।
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