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स्वामी विवेकानंद जी की बातें

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  स्वामी विवेकानंद जी  ने सत्य की खोज में  जो बातें कही हैं, वे हर व्यक्ति के जीवन  में अब भी महत्व रखती हैं। हालात से डरकर  भागना  स्वामी  जी ने कभी  नहीं सीखा, वे हमेशा  ही हालात  का मुकाबला  करने की  प्रेरणा  देते थे।  विषम से विषम और दुरूह परिस्थितियों  में भी व्यक्ति को अपना  सम्मान  नहीं खोना  चाहिए। उनका मानना था कि हर व्यक्ति  जो ब्रह्मा  का प्रतीक है, अदभुत, अलौकिक  शक्तियों  का स्वामी  है।अगर कोई व्यक्ति ठान ले तो कितने  भी खराब  हालात क्यों  न हो,उन पर नियंत्रण  रख सकता है  और हालात  को अपने  पक्ष में  ढाल सकता है। अलग-अलग मौके पर  स्वामी  विवेकानंद  ने अपने  शिष्यों को  भी ऐसे  मंत्र  दिये जो उन्हे  पराजय के भय से दूर होकर  आगे बढ़ने  की सतत्  प्रेरणा  देते रहे हैं।  " हे सखे तुम क्यों रो रहे हो ? विश्व  की हर  एक शक्ति  तो तुम्हीं में है।भगवन्...

बोर्ड परीक्षा Board Exam

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  वैसे  तो जीवन में  हर समय  कोई न कोई  परीक्षा  लगी रहती है, आजकल विभिन्न  बोर्डो की  वार्षिक  परीक्षाये आयोजित  हो रही  हैं  और साल में  शिक्षक  ने क्या  पढ़या  और छात्रों  ने क्या  पढा है इन परीक्षा के बाद दोनों  का मूल्यांकन  होगा या  सभी  का   मूल्यांकन  किया जा सकता है । मै अपने  1980-81 दौर   के  सालों   को याद करता हूँ  तो आजकल की परीक्षा  और तबकी परीक्षा आयोजन/व्यवस्थाओ में  काफी  भिन्नता  दिखाई देती  है । उस समय परीक्षा  मे कितना  तनाव     होता था   (आज भी  प्रतिस्पर्धात्मक  तनाव अधिक है),  विशेषकर  माता  पिता  भी बहुत ही  उत्साही    रहते थे,  उस जमाने  में 1980-81   के आस पास  स्कूल  में  परीक्षा  का एक अलग  प्रकार  का उत्साह  ही होता  था, संसाधनों का काफी ...

सामान्य -14

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  कांग्रेस  की कार्य  कारिणी  को 1929 मे हुई  लाहौर  कांग्रेस  में  यह अधिकार  दिया गया  था कि वह देश में  सविनय अवज्ञा  आदोलन  छेडे।इस आदोलन  में  कर न अदा करना  भी शामिल था।इसने  विधानसभा  के सदस्यों  से विधायक  पद से इस्तीफा  देने का भी आह्वान  किया  गया था।1930 की मध्य  फरवरी  में  साबरमती आश्रम में  कांग्रेस  कार्यकारिणी  समिति की बैठक  हुई  जिसमें  गांधी जी को इस बात का अधिकार दिया गया  कि वे अपनी  इच्छा  से जब और जिस जगह से चाहे, सविनय अवज्ञा आन्दोलन  का शुभारम्भ  कर सकते हैं। गाँधी जी  जन आंदोलनों कै माने हुए  विशेषज्ञ थे,वे गम्भीरता  से जन संघर्ष  छेड़ने  के लिए  प्रभावी  तरीका तलाश कर रहे थे। हर प्रकार की  न्यूनतम  मांगो  ़वाली  31 जनवरी  की उनकी  चेतावनी  भरी माँग  को ,जिसमें  न्युनतम  मांगो  का 11-सूत्रीय...

सुख की चाहत में, व मोह-माया के जाल में फॅस ही जाता है मनुष्य

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         दैवी ह्मेषा गुणमयी मम माया दुरत्यया। मामेव प्रपद्यन्ते  मायामेतां तरन्ति ते।।             (श्रीमदभगवदगीता)   भगवान  श्रीकृष्ण  अर्जुन  से कहते हैं कि यह  अलौकिक, अति अद्भुत  त्रिगुणमयी मेरी  माया बड़ी  दुस्तर  है, परन्तु  जो पुरुष  केवल  मुझको  ही निरंतर भजते हैं, वे इस माया का उल्लंघन कर जाते हैं  अर्थात  संसार से तर जाते हैं। भगवान की माया  बड़ी  विचित्र है।बड़े बड़े  ज्ञानियो,महात्माओ,भिक्षुओं, सिद्धो को भी नहीं  छोड़ती है। इसे जान पाना ,समझ पाना  संभव नहीं है, यह भांति भांति  से मनुष्य  को नाच नचाती है। व्यक्ति  के अहंकार  को चूर चूर करके  रख देती है। उसे  यह एहसास  दिला देती कि भगवान  की माया  क्या है ? स्वामी विवेकानंद जी  ने अपने  एक पत्र में  संसार  के बारे में  लिखा  था ' यह जगत मानो फूल मालाओ  से ढँका  हुआ  एक सडा...

व्यायाम के लिए कुछ समय अवश्य निकाला जाना चाहिए।

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जब हम अपने विद्यार्थी  जीवन  को याद करते हैं , तो कभी कभी  अपने  पर  ही आश्चर्य  हो जाता है  कि सचमुच हम सभी ने( हमारी पीढ़ी ने)  इतने  कठिन  परिश्रम  किया है,  स्कूल  आने- जाने में  ही बहुत  परिश्रम  था,   यदि   देखा  जाय  तो  कठिनाइयों  के साथ-साथ  बहुत  सारे  व्यायाम  स्कूल  आने - जाने  में  ही हो जाया करते  थे  , और जो कमी  रहती  थी ,उसको स्कूल के हमारे व्यायाम  शिक्षक  पूरा कर देते थे, ऐसी exercise  कि 40 मिनट  के वादन में शरीर  पसीने से  तर हो जाता था।कल हम एक पार्क  में  टहलने के लिए गये ,  वहां  exercise  करने  के तमाम  उपकरणों  को देखकर  ये लगा,  आज तो  व्यायाम  पर लोग  ध्यान  ही  नहीं दे   रहे हैं,   शायद    इसलिए  तरह-तरह  के उपकरणों   को    ...

मोबाइल की आदत

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  आज यह  एक महत्वपूर्ण  विषय बन गया है  , सम्भवतया  इससे  हर परिवार  व माता पिता  प्रभावित  हैं, वह  है बच्चों  में   मोबाइल  की लत ( लगातार  मोबाइल  से चिपके  रहना और विशेष  कर उस में  गेम खेलना)अभी  हाल में  ही यह समाचार  देखने और सुनने को मिल रहा है कि गाजियाबाद में  तीन  बहिनो ने  छत से कूदकर आत्म  हत्या  कर दी,  कारण  मोबाइल  में,  गेम की आदतों/आदी हो गयी  थी ,  कितना  भयावह  दृश्य है  ये, यह बहुत ही खतरनाक/ दुर्भाग्यपूर्ण    है । आप/ हम लोग  भी बच्चों  के सामने  अधिकतर मोबाइल  देखते  रहते हैं , और धीरे-धीरे  बच्चे  भी  हमको   देखकर  इसके आदी हो रहे हैं, (ऐसा  मै अनुमान  लगा  सकता हूँ)  जो कि किसी  दशा  में  उचित  नहीं  हो सकता है , मोबाइल देखना  कोई  बुरी बात  नहीं है,   ...

ओज शक्ति ही शरीर से निकलकर आश्चर्यजनक कार्य करती है ।

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   यदि  आप / हम केवल अच्छी  अच्छी  बातें  या भाषण करें  तो,ऐसा करने  मात्र से हम अच्छे  नहीं  हो सकते हैं, अपितु  उसको अपने  तौर तरीकों,  व अपने  आचरणों  में  भी लाना  होगा। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि " एक व्यक्ति  बड़ी  सुन्दर भाषा में  सुन्दर  भाव व्यक्त करता है,परन्तु लोग  आकृष्ट  नहीं  होते  और  वही  दूसरा व्यक्ति  न सुन्दर  भाषा  बोल सकता है, न सुन्दर  ढंग से  अपने  भाव व्यक्त कर सकता है, परन्तु  फिर  भी लोग  उसकी  बातों  से मंत्र मुग्ध  हो जाते हैं।  ऐसा  क्यों  ? यह ओज शक्ति  ही शरीर  से निकलकर  ऐसा  अदभुत कार्य  करती है। इस ओज शक्ति  से युक्त  मानव  जो कुछ  कार्य  करते हैं, उसी में   महाशक्ति का विकास  देखा जाता है। ब्रह्मचर्य का पालन  करने  वाले  स्त्री  पुरुष  ही  इस ओजधातु...