स्वामी विवेकानंद जी की बातें
स्वामी विवेकानंद जी ने सत्य की खोज में जो बातें कही हैं, वे हर व्यक्ति के जीवन में अब भी महत्व रखती हैं। हालात से डरकर भागना स्वामी जी ने कभी नहीं सीखा, वे हमेशा ही हालात का मुकाबला करने की प्रेरणा देते थे। विषम से विषम और दुरूह परिस्थितियों में भी व्यक्ति को अपना सम्मान नहीं खोना चाहिए। उनका मानना था कि हर व्यक्ति जो ब्रह्मा का प्रतीक है, अदभुत, अलौकिक शक्तियों का स्वामी है।अगर कोई व्यक्ति ठान ले तो कितने भी खराब हालात क्यों न हो,उन पर नियंत्रण रख सकता है और हालात को अपने पक्ष में ढाल सकता है। अलग-अलग मौके पर स्वामी विवेकानंद ने अपने शिष्यों को भी ऐसे मंत्र दिये जो उन्हे पराजय के भय से दूर होकर आगे बढ़ने की सतत् प्रेरणा देते रहे हैं।
" हे सखे तुम क्यों रो रहे हो ? विश्व की हर एक शक्ति तो तुम्हीं में है।भगवन् आप खुद अपने स्वयं को विकसित तो करो।देखो , तीनों लोक तुम्हारे पैरों के नीचे हैं। तुम्हारे पास आत्मा की प्रबल शक्ति है,इसलिए बिलकुल भी डरो मत।इस संसार से,इस भव सागर से पार उतरने का एक ही उपाय है और वह उपाय यही है, कि जिस पर तुम चल रहे हो,उसी पथ पर चलकर संसार के सभी लोग भवसागर को पार करते हैं। यही श्रेष्ठतम पथ है यही श्रेष्ठ पथ मैं तुम्हें दिखाता हूँ।"
" यदि तुम लोग कमर कसकर अपने लक्ष्य को पाने के लिए जुट जाओ तो छोटे मोटे की तो बात ही क्या, बड़े से बड़े दिग्गज बह जायेगें। तुम केवल एक हुँकार मात्र से इस दुनिया को पलटने का सामर्थ्य रखते हो। आप जो भी कर रहे हो, यह तो उसका केवल प्रारब्ध है इसलिए किसी के साथ विवाद नहीं करो। हिल मिलकर रहना सर्वोत्तम है। यह दुनिया भयावह है और किसी पर भी विश्वास नहीं है, ऐसा सोचना उचित नहीं है। डरने का भी कोई कारण नहीं है। आप जिस दिशा में जा रहे हो, इस संकल्प के साथ जाओ कि माँ काली मेरे साथ है । इस संकल्प मात्र से ऐसे कार्य होंगे कि तुम खुद चकित हो जाओगे। फिर भय किस बात का ? किसका भय ? वज्र जैसा हृदय बनाओ और अपने कार्य में जुट जाओ।"
" अपने लक्ष्य की ओर हमेशा बढते चलो। तुमने बहादुरी का काम किया है। शाबाश ! आगे बढते ही चलो। हिचकने वाले पीछे रह जायेगें और अगर तुम बिना हिचके आगे बढे तो एक ही छलांग में सबके आगे पहुँच जाओगे। जो केवल अपने हित में लगे हुए हैं ,वे न तो अपना हित कर पायेगें और नही दूसरे का।इसलिए ऐसा शोरगुल मचाओ कि आपकी आवाज़ दुनिया के कोने-कोने में फैल जाए।कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें अपना काम करने के लिए तो समय का अभाव रहता है, लेकिन दूसरों की त्रुटियाँ खोजने में इनके पास समय की कोई कमी नहीं होती है। ऐसे लोगों की परवाह किये विना अपने लक्ष्य पाने में जुट जाओ।अपनी शक्ति के अनुसार आगे बढो।नहीं है, नहीं है कहने से तो सांप का विष भी नहीं रहता है। नहीं, नहीं कहने से तो नहीं हो जाना पडेगा। इसलिए मैं कहता हूँ कि आगे बढो और तूफान मचा दो।" चरैवेति चरैवेति

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