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दिसंबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुनियोजित प्रबन्धन/व्यवस्था

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किसी  कार्य  की सफलता  में  प्रबन्धन  का  बहुत ही महत्वपूर्ण  योगदान  होता है। प्रबंधन  शिक्षा  ग्रहण करने  में हो,किसी  प्रतियोगिता  में  सफ़ल  होना हो, किसी  समारोह/उत्सव का आयोजन  करना हो, घर में  वस्तुओं  का रख-रखाव हो, कोई  व्यवसाय  करना  हो, धनराशि व्यय करनी  हो,   आदि  कई  और भी महत्वपूर्ण  कार्य  हो सकते हैं  जिसमें   प्रबन्धन  का बहुत   ही  महत्त्वपूर्ण  योगदान है। प्रबन्धन  तभी  अच्छा होता है  जब उससे  जुड़ी  वस्तुओं/ व्यक्तियों  में  ताल मेल  होता है  । हर छोटे -बड़े  कार्य  को करने से पहले  उसकी  सही  योजना  बनाई  जाती  है,  और उस योजना के  अनुसार कार्य  करना होता है  तभी  आपका  कार्य  सफल  होता है। यदि आप ऐसा  नहीं  कर सकते हैं तो आपको  परेशानी  हो स...

सफलता - की- शक्ति

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व्यक्ति को किसी विशेष कार्य की सफलता पाने के लिए दृढ़ संकल्पित होना आवश्यक  होता है ,और जब पूरे मन से यह तय हो जाय, कि मुझे अमुक कार्य करना है , या करवाना है तो  पूरा अभ्यास -प्रयास उस दिशा में जारी रखा जाना चाहिए। कार्य करते  हुए हो सकता है आपके मन में किसी समय नकारात्मक विचार प्रभावी  हो जाय तो इसे हावी  होने नहीं देना  है अन्यथा आपके काम की सफलता संदिग्ध हो सकती है। सदच्छावान व्यक्ति में आशा, उत्साह,साहस और सक्रियता की कमी नहीं होती है । जिसमें इन सफलतावाहक गुणों का समावेश होगा , असफलता  उसके पास आ ही नहीं सकती है। एक इच्छा, एक निष्ठा  और शक्तियों  की एकता  मनुष्यों  को उनके  अभीष्ट  लक्ष्य  तक अवश्य  पहुंचा  देती है ,इसमें किसी  प्रकार के सन्देह  की गुंजाइश  नहीं  रह्ती है।  आशावान  बने रहना  आवश्यक होता है। मन में  कई  प्रकार के  विचारों का प्रवाह  होता रहता है, मगर  सफलता  प्राप्त करने के लिए  आप किन विचारों  पर दृढ़  होकर ...

माता-पिता का बच्चों के प्रति अत्यधिक मोह, सफलता में बाधक हो सकता है

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वर्तमान में एक चलन देखने  को मिल रहा है,  कि बच्चों  को अधिक से अधिक  सुविधा दो , जिससे उसको कोई  परेशानी  न हो , सही है  देनी भी चाहिए  किन्तु,  ये भी देखते रहना होगा  की वे उन सुविधाओं का  दुरुपयोग  तो नहीं  कर रहे हैं , मेरा मानना है कि कभी-कभी  अधिक सुविधा  देने  से बच्चों  में   आलस्यपन पैदा हो जाता है  , और कई दूसरी गलत   बातें   उनकी  आदतों  में  सुमार हो जाती  है  जिससे  कि आने  वाला  समय उनके  स्वयं  के  साथ  साथ माता/पिता  के लिये  भी कष्टदायक  हो सकता है  , ये माता- पिता  को देखने  की आवश्यकता है।  किसी  कार्य  को करने  की दक्षता  जितनी  आरम्भिक  अवस्था  में  बढ़ती है  वह बाद  में  नहीं  बढ़  सकती है  आरम्भ  में  ही अच्छी  आदतों  का समावेश  हो तो अच्छा  रहेगा । प्रकृ...

सुन्दर- घर

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  वर्तमान समय में दम्पति   शिक्षित होने के बाद भी  पति/पत्नी में तलाक होने की दर अधिक बढ़ रही है, य‌ह  एक चिन्ता का विषय  है , क्या आपने  इस विषय  पर सोचा कि ऐसा क्यों हो रहा होगा ? और तलाक होने के बाद परिवार और  और यदि  बच्चे  हैं   तो उन पर इसका प्रभाव कितना  खराब होता है,  इसका अनुमान आसानी से सभी लगा सकते है,  कि  एक अच्छा  खासा  परिवार दोनों  की  मत भिन्नता के कारण  अस्त - व्यस्त हो जाता है। एक अच्छा घर चलाने के लिए दोनों के (पति-पत्नी) विचारों में समन्वय होना बहुत आवश्यक है यदि  नहीं  है ,  तो  किसी एक को  विचारों के संतुलन में समर्पण/झुकने की आवश्यकता होती है  और किसी  एक को सहयोग/ सहमत  होना  होगा ।  जहां विचारों में समानता होती है वहां कोई संघर्ष नहीं होता है, अच्छे से  सभी कार्य होते रहते हैं  लेकिन जहां विचारों में समानता नहीं है वहां बात  - बात पर संघर्ष होगा और बहस होगी ,  फिर इसका प्रभाव परिवार क...

समझदार होने के बाद भी , ना समझ विचार

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 मनुष्य  की बुद्धि का विस्तार  जितना  इस समय हो रहा  उतना  पहले  कभी  नहीं  हुआ, और दिन - प्रतिदिन  विस्तारित  हो ही रही है। मानव  बुद्धि  के समक्ष देश काल की सीमाएं  गौण हो गई है। पलक  झपकते  ही वायु से भी अधिक  तीव्र  गति  से  वह एक स्थान  से दूसरे  स्थान  पर अपने  परिचितों से बात कर सकता है, उनके  चित्र  भी देख सकता है मानव  बुद्धि की जितनी तारीफ़  की जाय वह कम  ही  है, पर आश्चर्य  तब होता है  जब इतना  बुद्धिमान होने  के बाद  वह अपने  बुद्धि वाहन   (शरीर)  के सम्बन्ध  में अज्ञानियों जैसा व्यवहार करता है, वाहन सही न हो तो कोई  कैसे यात्रा कर सकता है  अर्थात नहीं कर सकता है। यह बात बहुत ही अजीब लगती है कि बुद्धिहीन व साधनहीन होने के बाद भी अन्य समस्त जीव नीरोग रहते हैं , किन्तु मनुष्य अकेला ऐसा प्राणी  है  कि जो बीमारियों की यातना सहता और भुगतता  रहता है, और जिन जी...

बच्चों की नैतिक शिक्षा(Moral values of children)

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अब यदि बच्चे की शिक्षा के बारे में सोच रहे हैं तो ये बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है,  सोचना  भी चाहिए  कि मैं  अपने  बच्चों  को अच्छी  शिक्षा  दूं। आज के सन्दर्भ में सभी अभिभावकगण स्कूली शिक्षा पर बहुत  ध्यान दे रहे हैं जो आवश्यक   भी है , साथ -२ में यह भी देखना महत्वपूर्ण है कि आप के बच्चे में कौन -कौन से नैतिक मूल्यों का विकास हो रहा है और क्या  खो रहा है , यह देखना भी अभिभावक  का  कर्तव्य  है,   क्या वह केवल किताबी ज्ञान में पारंगत हो रहा है या इसके साथ उसमें  सभी आवश्यक नैतिक   गुणों का विकास भी हो रहा है । मेरा मानना है कि स्कूली शिक्षा में रहते ही बच्चों  मे सबसे अधिक नैतिक मूल्यों का विकास होता है  इस अवस्था में आप बच्चे को जो दोगे (moral  values)वही  बड़े होकर बाहर आयेगा। यह ठीक  उस प्रकार  से है  जिस प्रकार  कम्प्यूटर में जो भरोगे वहीं बाहर आयेगा । एक  शिक्षा वह  है जो कक्षाओं में दी जाती है और विषयों  पर  आधारित होती है,...

मानव के व्यक्तित्व विकास में वातावरण

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  पिछले  व्लाग में  लिखा था कि बच्चे की शिक्षा/व्यक्तित्व को प्रभावित  करने  वाले  प्रमुख कारक उसके  माता-पिता, आस-पास का पडोस, सहपाठी, बच्चे  को शिक्षा  देने  वाले  शिक्षक  आदि  महत्वपूर्ण हैं। अब हम  बात  बच्चे  के माता-पिता की  करते हैं  क्योंकि  सबसे  महत्वपूर्ण  योगदान  उसी का है ,  मै  यह नहीं  जानता हूं कि किसके माता -पिता में   कौन  से गुण हैं  और कौन  से अवगुण है  या उनका क्या व्यक्तिव है  और कैसा है,  ये तो वे स्वयं  आकलन  कर ले, क्योंकि काफी कुछ  वे अपने माता-पिता  से लेकर  आये हैं, इसलिए बहुत कुछ इसमें परिवर्तन की सम्भावना इसलिए नहीं होती है क्योंकि वे वयस्क होंगें/ जिस प्रकार छोटे  पेड़  की शाखाएं  कुछ  देर के लिए बांध कर उसको सही  दिशा  दे सकते हैं  , परन्तु  बड़े  पेड़  में बदलाव  नहीं कर सकते हैं । हां यदि कुछ परिवर्तन कर सकते हैं...