सुन्दर- घर

 


वर्तमान समय में दम्पति   शिक्षित होने के बाद भी  पति/पत्नी में तलाक होने की दर अधिक बढ़ रही है, य‌ह  एक चिन्ता का विषय  है , क्या आपने  इस विषय  पर सोचा कि ऐसा क्यों हो रहा होगा ? और तलाक होने के बाद परिवार और  और यदि  बच्चे  हैं   तो उन पर इसका प्रभाव कितना  खराब होता है,  इसका अनुमान आसानी से सभी लगा सकते है,  कि  एक अच्छा  खासा  परिवार दोनों  की  मत भिन्नता के कारण  अस्त - व्यस्त हो जाता है। एक अच्छा घर चलाने के लिए दोनों के (पति-पत्नी) विचारों में समन्वय होना बहुत आवश्यक है यदि  नहीं  है ,  तो  किसी एक को  विचारों के संतुलन में समर्पण/झुकने की आवश्यकता होती है  और किसी  एक को सहयोग/ सहमत  होना  होगा ।  जहां विचारों में समानता होती है वहां कोई संघर्ष नहीं होता है, अच्छे से  सभी कार्य होते रहते हैं  लेकिन जहां विचारों में समानता नहीं है वहां बात  - बात पर संघर्ष होगा और बहस होगी ,  फिर इसका प्रभाव परिवार के सभी सदस्यों पर पड़ेगा, बच्चों पर अधिक प्रभाव होगा,  यहाँ  तक की कभी - कभी तलाक तक भी स्थिति पहुंच जाती है ।   ये सब आरम्भिक अवस्था में  दिखाई  देता है  विशेषकर  तब तक जब तक घर में  कोई  बच्चा  जन्म  न ले, कहीं - कहीं बच्चे  के जन्म  के बाद की स्थिति कुछ  सामान्य  हो सकती है  आज के भौतिकवादी  युग  में  जब दोनों  दम्पति  कोई व्यवसाय  कर रहे हैं,  या व्यवसाय  की लालसा  रख रहे हैं  अच्छी  बात है , इसमें  कोई  खराब  बात  नहीं है ,  धन की आवश्यकता होती ही है,  इसलिए  दोनों  परिश्रम  से धन कमाना  चाहते हैं ठीक है  ,  किन्तु  एक दूसरे  की भावनाओं का सम्मान  व एक - दूसरे  का सहयोग  करना प्रमुख  हिस्सा व व्यवहार होना  चाहिए  , वैसे तो हर मामले  में  ये बात  होनी चाहिये कि एक दूसरे  की भावना  का सम्मान  हो, किन्तु परिवार के  मामलों  में  होना  ही चाहिए  अन्यथा बहुत  विकट स्थिति  हो सकती है जिसका परिणाम ‌ भयानक होगा । आरम्भ  के ब्लॉग  में  कहा  जा चुका  है कि माता पिता  के विचारों  का , कार्य  करने  के तरीकों,  उनकी  आदतों  का , घर के  वातावरण  का सबसे  अधिक  प्रभाव बच्चे  पर पड़ता है, घर  के  अनुशासन,   सभी  आवश्यक  व्यवस्थाओं से बच्चों में  भी  यह प्रवृत्ति   बढती  रहती है । इसीलिए  घर सुन्दर हो, सुन्दर  का अर्थ  यह नहीं है,  कि बहुत  महंगा  हो ,दिखावटी सामान  हो , बहुत महंगा  सामान हो  , अपितु घर में  रहकर आप  सुकून  महसूस करें  , इसकी जिम्मेदारी  माता-  पिता  की पहले  है, उसके  बाद  उनके  बच्चों की  है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रहती है। इसलिए आप/हम सभी को इस पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए। चरैवेति चरैवेति।



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