माता-पिता का बच्चों के प्रति अत्यधिक मोह, सफलता में बाधक हो सकता है


वर्तमान में एक चलन देखने  को मिल रहा है,  कि बच्चों  को अधिक से अधिक  सुविधा दो , जिससे उसको कोई  परेशानी  न हो , सही है  देनी भी चाहिए  किन्तु,  ये भी देखते रहना होगा  की वे उन सुविधाओं का  दुरुपयोग  तो नहीं  कर रहे हैं , मेरा मानना है कि कभी-कभी  अधिक सुविधा  देने  से बच्चों  में   आलस्यपन पैदा हो जाता है  , और कई दूसरी गलत   बातें   उनकी  आदतों  में  सुमार हो जाती  है  जिससे  कि आने  वाला  समय उनके  स्वयं  के  साथ  साथ माता/पिता  के लिये  भी कष्टदायक  हो सकता है  , ये माता- पिता  को देखने  की आवश्यकता है।  किसी  कार्य  को करने  की दक्षता  जितनी  आरम्भिक  अवस्था  में  बढ़ती है  वह बाद  में  नहीं  बढ़  सकती है  आरम्भ  में  ही अच्छी  आदतों  का समावेश  हो तो अच्छा  रहेगा । प्रकृति  का  एक  उदाहरण  यहाँ  कोड  कर रहा हूँ  इससे  प्रत्येक  मां /बाप को सीखना  चाहिए। जिराफ मां जब  अपने  बच्चे  को जन्म  देती है  उसका  बच्चा  कुछ  ऊंचाई  से नीचे  गिरता है, माँ  देखती है कि यह खड़ा  नहीं  हो रहा है  वह पीछे  से  पैर से  ठोकर मारती है,  ताकि  वह खड़ा  हो जाय और उसके  साथ  चल दे  अन्यथा  उसे जंगली  जानवर  खा देंगे, इसके  पीछे  भी माँ  की  ममता ही है  , किन्तु  बच्चे  को मजबूती  देने  के लिए  ऐसा किया गया है।  समस्या/परेशानियों  से जूझने  से बच्चों  की हर प्रकार की  दक्षता   में  निखार आता है  । मेरा  आशय  यह कदापि नहीं है कि  बच्चों  को सुविधा  न दो , लेकिन  यह देखना  अभिभावक का कार्य  है  कि सुविधा  के कारण  उसकी  कोई  दक्षता  में  कमी  तो नहीं  हो रही है  ।  आज के प्रतियोगिता / प्रतिस्पर्धात्मक  के  युग  में  आप स्वयं  आकलन  कर रहे  होंगे  कि कौन-कौन से   बच्चे  आगे  निकल  रहे हैं ।  इसीलिए  कहीं  ऐसा तो नहीं है  , कि हम अपने  अत्यधिक  मोह  के कारण अपने  बच्चों  की  सफलता  प्रभावित  कर रहे हैं ,उसको  उदासीनता  की  ओर ले जा रहे हैं  बच्चों  में  हर वह दक्षता  विकसित  हो , जो आने वाले समय में  उनके  काम आयें  इस बात का  ध्यान   सबको  रखना चाहिए। अच्छी  या बुरी  आदतों  का विकास  आरम्भिक  अवस्था में  होता है ,। चरेवेति चरेवेति। 

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