सफलता - की- शक्ति
व्यक्ति को किसी विशेष कार्य की सफलता पाने के लिए दृढ़ संकल्पित होना आवश्यक होता है ,और जब पूरे मन से यह तय हो जाय, कि मुझे अमुक कार्य करना है , या करवाना है तो पूरा अभ्यास -प्रयास उस दिशा में जारी रखा जाना चाहिए। कार्य करते हुए हो सकता है आपके मन में किसी समय नकारात्मक विचार प्रभावी हो जाय तो इसे हावी होने नहीं देना है अन्यथा आपके काम की सफलता संदिग्ध हो सकती है। सदच्छावान व्यक्ति में आशा, उत्साह,साहस और सक्रियता की कमी नहीं होती है । जिसमें इन सफलतावाहक गुणों का समावेश होगा , असफलता उसके पास आ ही नहीं सकती है। एक इच्छा, एक निष्ठा और शक्तियों की एकता मनुष्यों को उनके अभीष्ट लक्ष्य तक अवश्य पहुंचा देती है ,इसमें किसी प्रकार के सन्देह की गुंजाइश नहीं रह्ती है। आशावान बने रहना आवश्यक होता है। मन में कई प्रकार के विचारों का प्रवाह होता रहता है, मगर सफलता प्राप्त करने के लिए आप किन विचारों पर दृढ़ होकर आगे बढ़ना चाहते हैं यह आप पर निर्भर करता है। आज के युग में हर अभिभावक अपने बच्चों में हर प्रकार से उच्चकोटि के संस्कार तो चाहता है, किन्तु यह इसीलिए नहीं हो पाता कि वह स्वयं इसे नहीं अपनाता , यह एक विचारणीय प्रश्न है। सदिच्छाएं स्वंय शक्तिशाली होने के साथ साथ दूसरों से भी शक्ति संचय करती हैं। कभी - कभी या प्रायः विरोध करना आज लोगों का स्वभाव बन गया है क्या अच्छे, क्या बुरे, विरोध सबका ही किया जाता है परन्तु इससे डरना नहीं चाहिए, अपने प्रयास और लक्ष्य की ओर निरन्तर आगे के सोपानो को पार करना बुद्धिमत्ता होगी, और निश्चित ही सफलता प्राप्त होकर रहेगी । संकल्प को सफलता की जननी कहा गया है , यह इच्छाशक्ति का ही सघन रूप है इच्छा- आकाक्षा ही व्यक्ति को कर्ममार्ग फर आगे बढ़ाती है। चरेवेति- चरेवेति ।

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