सुनियोजित प्रबन्धन/व्यवस्था


किसी  कार्य  की सफलता  में  प्रबन्धन  का  बहुत ही महत्वपूर्ण  योगदान  होता है। प्रबंधन  शिक्षा  ग्रहण करने  में हो,किसी  प्रतियोगिता  में  सफ़ल  होना हो, किसी  समारोह/उत्सव का आयोजन  करना हो, घर में  वस्तुओं  का रख-रखाव हो, कोई  व्यवसाय  करना  हो, धनराशि व्यय करनी  हो,   आदि  कई  और भी महत्वपूर्ण  कार्य  हो सकते हैं  जिसमें   प्रबन्धन  का बहुत   ही  महत्त्वपूर्ण  योगदान है। प्रबन्धन  तभी  अच्छा होता है  जब उससे  जुड़ी  वस्तुओं/ व्यक्तियों  में  ताल मेल  होता है  । हर छोटे -बड़े  कार्य  को करने से पहले  उसकी  सही  योजना  बनाई  जाती  है,  और उस योजना के  अनुसार कार्य  करना होता है  तभी  आपका  कार्य  सफल  होता है। यदि आप ऐसा  नहीं  कर सकते हैं तो आपको  परेशानी  हो सकती है ।  घर आँगन  का साफ़  सुथरा  रखना हो,  ठीक  तरह  रसोई  बनाना हो, नियत आजीविका  में  खर्च  चलाना हो आदि , ऐसे  कई  महत्वपूर्ण कार्य  हैं  जिसमे प्रबन्धन  का खास ख्याल  रखा  जाता है, अन्यथा  कार्य  करना  कठिन  हो जायेगा।  यदि  प्रबन्धन  सही  नहीं  होगा   तो   कितनी  ही आमदनी  हो  तब भी  तंगी  सहनी पड सकती है  या कभी कभी  कर्जदार  भी  बन सकते हैं , जिसका प्रभाव  आपके  साथ  आपके  पूरे  परिवार  पर पड़ता है। योजना  स्थिति  के  अनुसार  योजना  बद्ध    से कार्य  करना  एक महत्वपूर्ण  कला कौशल है।  जिनको ये आता है  वे  विषमताओं  के बाद भी प्रगति  का मार्ग  ढूंढ  निकालते हैं  और उन्नति के  शिखर  पर पहुँचते हैं।  अपनी  अपनी  बुद्धिमत्ता  की जाँच  परख के कई  आधार है  उसके  आधार पर अपने  अपने  काम में  सभी  लोग  सफलता पाते हैं किन्तु  इन सभी  के सन्दर्भो मे एक बात प्रमुख  है,   योग्य  प्रबन्धन / व्यवस्था।अधिकारी गणों  में  भी सभी  की उपयोगिता  और प्रतिष्ठा  है, किन्तु उन सब में  सर्वोपरि  दायित्व  का पद देखा  जाय तो वह व्यवस्थापक   का ही होता है जिसे  कई पद नामों  से जाना  जा सकता है,  यथा  स्कूल  में  प्रधानाचार्य,  कार्यालय  में  कार्यालयध्क्ष, ब्लाक में  ब्लाक  अधिकारी,  जिले  में  जिलाधिकारी,   संस्था  में  संस्थान  का मालिक,  घर में  घर का मुखिया  सरकार / विभागों  में  उनके  मुखिया,  आदि   और कई है,  इन लोगों  के  कार्य  करने  के तरीके  से सफलता/ असफलता  मिलती  रहती है  और सम्बंधित  विषयों  पर  प्रगति  होती है,  इसलिए  कार्य  करने  में  प्रबन्धन  का विशेष  ध्यान  रखना  आवश्यक है। चरैवेति चरैवेति। 

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