समझदार होने के बाद भी , ना समझ विचार


 मनुष्य  की बुद्धि का विस्तार  जितना  इस समय हो रहा  उतना  पहले  कभी  नहीं  हुआ, और दिन - प्रतिदिन  विस्तारित  हो ही रही है। मानव  बुद्धि  के समक्ष देश काल की सीमाएं  गौण हो गई है। पलक  झपकते  ही वायु से भी अधिक  तीव्र  गति  से  वह एक स्थान  से दूसरे  स्थान  पर अपने  परिचितों से बात कर सकता है, उनके  चित्र  भी देख सकता है मानव  बुद्धि की जितनी तारीफ़  की जाय वह कम  ही  है, पर आश्चर्य  तब होता है  जब इतना  बुद्धिमान होने  के बाद  वह अपने  बुद्धि वाहन   (शरीर)  के सम्बन्ध  में अज्ञानियों जैसा व्यवहार करता है, वाहन सही न हो तो कोई  कैसे यात्रा कर सकता है  अर्थात नहीं कर सकता है। यह बात बहुत ही अजीब लगती है कि बुद्धिहीन व साधनहीन होने के बाद भी अन्य समस्त जीव नीरोग रहते हैं , किन्तु मनुष्य अकेला ऐसा प्राणी  है  कि जो बीमारियों की यातना सहता और भुगतता  रहता है, और जिन जीवों को अपने सम्पर्क में रखता है उन्हें भी नरक में घसीट लेता है। मनुष्य की बुद्धि बड़ी तीव्र है उसने अपने बुद्धि बल से बड़े- बड़े आविष्कार किये , ज्ञान विज्ञान के अनेक शोध किए  हैं  जिधर देखो वही मनुष्य की बुद्धि का चमत्कार दिखाईं देता है, किन्तु जीवन की मूलभूत समस्या स्वास्थ्य के सम्बन्ध में उसकी बुद्धिमत्ता न जाने कहां गायब हो गई। मनुष्य ने अपने ऐशो आराम  और भोग विलास की एक से एक वस्तुएं व तरकीब ईजाद की  है ,पर आरोग्य एवं दीर्घ जीवन के सम्बन्ध में  कोई तरीका उसके हाथ नहीं आया भौतिक सुख साधनों के लिए धन जुटाने में आज व्यक्ति व्यस्त दिखाई देता है सुबह से रात  तक की भाग - दौड़ तथा आपा-धापी ने मनुष्य को स्वास्थ्य के प्रति इतना उदासीन  बना दिया है जिसे देखकर लगता है  उसके लिए सबसे कम महत्व  की कोई वस्तु है तो वह शरीर ही है। न सोने का समय , न जागने का समय, न खाने की चिंता न कहीं नियमितता है न सतर्कता,रोग पर  अंकुश लगता नहीं और जब रोग का आक्रमण हो जाता है तो चिकित्सक के पास जाकर औषधियों के  सेवन से रही सही रोग प्रतिरोधक शक्ति को ही समाप्त कर दिया जाता है। यह स्थिति अत्यधिक भयंकर है। हम सभी को इस पर सोचना होगा।स्वास्थ्य  है  तो सब कुछ हैं  अन्यथा  कुछ  नहीं।  इसलिए  इस विन्दु  पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है  और मैं  समझता हूँ कि  सभी को ध्यान में रखना चाहिए  । स्वास्थ्य वह आधारशिला है जिस पर हमारे जीवन का पूरा ढांचा खड़ा होता है। अच्छा स्वास्थ्य न केवल हमें शारीरिक रूप से सक्षम बनाता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में स्वास्थ्य का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है, क्योंकि यह हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक विकास के लिए अनिवार्य है स्वास्थ्य का ध्यान रखना केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी आवश्यक है। हमें अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए और स्वस्थ आदतों को अपनाना चाहिए। जैसा कि कहा जाता है, “सर्वे भवन्तु सुखिनः” – सभी सुखी और स्वस्थ हों।  चरैवेति चरैवेति। 

टिप्पणियाँ

  1. बहुत सही कहा है आप ने Sir जी की मानव एक बुद्धिमान जीव है हर तरह की समझ रखता , सब समझता है जानता है दूसरों को सलाह देता है परंतु वही बात खुद पर लागू नही करता है अपने स्वास्थ्य व अपने शरीर का ध्यान नही रखता है सब जानता है समझता कि क्या मेरे स्वास्थ्य के लिए ठीक क्या नही फिर ध्यान नही देता समय पर उचित कदम नही उठाता जैसे प्रतिदिन वाक , योगा खान पान आदि और जब अति हो जाती है तो डॉक्टर के चक्कर काटते है और अपनी प्रतिरोधक क्षमता को और कम कर देता है यदि अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या ठीक रखे जैसे कि आपने कहा है समय से उठना, समय से खान पान करना , समय पर सोना समय पर योग करना और दिन में एक समय वाक करना आदि तो एक खुशहाल जीवन जी सकता है।
    सादर प्रणाम Sir ji🌹🌹🌹🌹🌹👏👏👏👏👏👏👏

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  2. काश मनुष्य दूसरे पर प्रतिक्रिया देने से पहले स्वयं उसको अपने ऊपर क्रियान्वित करके देख ले, शानदार लेख सरजी

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