बच्चों की नैतिक शिक्षा(Moral values of children)




अब यदि बच्चे की शिक्षा के बारे में सोच रहे हैं तो ये बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है,  सोचना  भी चाहिए  कि मैं  अपने  बच्चों  को अच्छी  शिक्षा  दूं। आज के सन्दर्भ में सभी अभिभावकगण स्कूली शिक्षा पर बहुत  ध्यान दे रहे हैं जो आवश्यक   भी है , साथ -२ में यह भी देखना महत्वपूर्ण है कि आप के बच्चे में कौन -कौन से नैतिक मूल्यों का विकास हो रहा है और क्या  खो रहा है , यह देखना भी अभिभावक  का  कर्तव्य  है,   क्या वह केवल किताबी ज्ञान में पारंगत हो रहा है या इसके साथ उसमें  सभी आवश्यक नैतिक   गुणों का विकास भी हो रहा है । मेरा मानना है कि स्कूली शिक्षा में रहते ही बच्चों  मे सबसे अधिक नैतिक मूल्यों का विकास होता है  इस अवस्था में आप बच्चे को जो दोगे (moral  values)वही  बड़े होकर बाहर आयेगा। यह ठीक  उस प्रकार  से है  जिस प्रकार  कम्प्यूटर में जो भरोगे वहीं बाहर आयेगा । एक  शिक्षा वह  है जो कक्षाओं में दी जाती है और विषयों  पर  आधारित होती है,  जो कि शिक्षको  के द्वारा दी जाती है , दूसरी वह जो अपने आचरण से दी जाती है  , चाहे माता पिता के आचरण द्वारा  हो या शिक्षको    के आचरण   द्वारा हो या किसी अन्य  के आचरणों  से हो , आये दिन आप लोगों ने अखबारों में  या अन्य  मीडिया  में   अपराध या अपराध  करने  वालों  के बारे  में    पढ़ा  होगा, कई  तो बहुत  पढ़े  होते  हैं,  यहाँ  तक कि जिन  माता पिता  ने अपने  बच्चो  को योग्य  बनाने  के लिये  अपने  सामर्थ्य  अनुसार कोई  कसर  नहीं छोड़ी, और वे योग्य  बने भी है , लेकिन नैतिक मूल्यों  के शून्य  के कारण  वे अक्षम्य अपराध  कर लेते हैं, तो ऐसी  शिक्षा  किसी के  काम की नहीं ,  न उनके  काम  की  और न समाज के काम की  , इसलिए  हम सभी को  अच्छी शिक्षा के  साथ- साथ  अपने  बच्चों के  नैतिक  शिक्षा  पर विशेष जोर  देना  चाहिए   और   वह  तभी  सम्भव  होगा  जब हम अपना  आचरण  भी   नैतिक  रखें,  इसलिए  पूर्व में  कहा   गया है कि,     माता- पिता ,सहपाठी, आस-पास का पडोसी,  व पढ़ाने  वाले  शिक्षक  ये बच्चों  में  बदलाव  ला सकते हैं। कोई  भी समाज उस समाज  में  रहने/निवास करने  वाले मानवो से बनता है  और  और वे मानव कैसे हैं  ये    उनकी  शिक्षा  से पता चलता है, और उनके आचरणों से  पता चलता है,   इसलिए  नैतिक मूल्यों    व शिक्षा पर बहुत  ध्यान  देने की आवश्यकता है। नैतिक शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति को नैतिक मूल्यों, सिद्धांतों और व्यवहार के बारे में सिखाया जाता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को अच्छे और बुरे के बीच अंतर करना, सही निर्णय लेना और समाज में सकारात्मक योगदान देना है।  नैतिक शिक्षा में शामिल हैं   जैसे कि   सच्चाई, ईमानदारी, दया, सहानुभूति, जिम्मेदारी , न्याय, समानता, स्वतंत्रता, दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना, अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार होना आदि । नैतिक शिक्षा का महत्व पूरे  जीवन  भर  रहता है,  नैतिक शिक्षा व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद करती है। नैतिक  शिक्षा व्यक्ति को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने में मदद करती है। अब प्रश्न  यह उठता  है  यह कैसे  व कहाँ  से प्राप्त  है
परिवार नैतिक शिक्षा का पहला स्रोत है। विद्यालय नैतिक शिक्षा का  दूसरा महत्वपूर्ण स्रोत है।समाज नैतिक शिक्षा का  तीसरा  महत्वपूर्ण स्रोत है। धार्मिक संस्थान नैतिक शिक्षा का चौथा  महत्वपूर्ण स्रोत है,और भी कई  जगहों  से सीखा  जा सकता है। अवश्य ही  हम  सभी  को इस पर चर्चा  करनी चाहिए। चरैवेति चरैवेति। 






टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर भाई साहब। आज के भागम भाग ज़िन्दगी में नैतिकता पर ध्यान बहुत कम हो गया है

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  2. बहुत ही सटीक शब्दों में अपनी बात को रखा सर, भौतिकवादी सोच में नैतिकता का ह्रास हो रहा है।

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