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जनवरी, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

डीपफेक की असलियत सभी को समझनी होगी।

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आजकल  एक  महत्वपूर्ण   विचार   AI (   यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस )  बहु तेजी  से सभी  के   मोबाइल व  कम्प्यूटर  में  तेजी  से स्थान   ले रहा है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें मशीनों को मानव की तरह सोचने, सीखने और काम करने की क्षमता दी जाती है। यह मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और नेचरल लेजर प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करके मशीनों को डेटा से सीखने और निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।इससे  धीरे-धीरे  मानव  अपनी  दक्षता का  उपयोग  न कर  इसी पर  आधारित   हो रहा है  जो कि ठीक  नहीं कहा जा सकता है। आज एआई इतना  असली  लगने  लगा है कि सच और झूठ  में  फर्क करना  बहुत ही  कठिन  सा हो गया है ,यह डीपफेक ( कृत्रिम  छवि/ विडियो आदि   ) है । कभी-कभी  इसके  झांसे में  आने पर किसी के  जीवन भर की कमाई  दौलत,इज्जत  सब कुछ  दांव  पर लग सकता है।,जो कि किसी  भी द...

UGC बिल 2026 एक तरफा कार्यवाही किसी भी दशा में उचित नहीं हो सकती है

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  सरकार  इस समय  UGC बिल 2026 को लेकर आयी है,  जिसका   उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा  देना  और भेदभाव को रोकने  के  प्रावधानों को बढ़ावा देना है। इसके तहत, सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान या विकलांगता के आधार पर भेदभाव को रोकने के लिए कदम उठाने होंगे । नए नियमों के प्रमुख रूप से  कालेजों  में भेदभाव की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन स्थापित करनी होगी। बंचित  वर्गों के छात्रों को समर्थन देने के लिए केंद्र बनाना होगा। जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए समिति गठित करनी होगी। नियमों  का उल्लंघन करने पर UGC अनुदान रोक सकता है, नए कोर्स बंद कर सकता है, और संस्थान को सूची से हटाया जा सकता है । इस समय पूरे देश  व प्रदेशों  मे में  इसका विरोध देखने  को मिल रहा है, जो कि  कि शोशल  मीडिया  में  बहुत  ही व्यापक  रूप से  दिखाई  दे रहा है  और  इसिलए  हो रहा कि इसमें  एक तरफा आधारित कार्यवाही  करने  का...

बच्चों को खुला अवसर देने से उनका बहुआयामी विकास

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वैसे तो हर काल खण्ड में   प्रत्येक माता  पिता  को अपने  बच्चों के भविष्य की चिता रही है लेकिन  जब हम अपने  बचपन और आजकल के बच्चों  को देखते हैं तो , आजकल  कुछ  ज्यादा ही चिंता  दिखाई देती है  चाहे  वह पालन पोषण को लेकर हो,या बच्चों के भविष्य को लेकर  हो।जब यह सजगता आवश्यकता से अधिक  होती है  तो इसका  प्रभाव  बच्चों की स्वतंत्रता  को प्रभावित  करने  लगता है, आजकल की भाषा में  इसे पैराशूट  पेरेंटिंग कहा  जा रहा है। पैराशूट  का अभिप्राय  एक ऐसी  छत्रछाया  से है,जोकि सर्वागीण  सुरक्षा  प्रदान करना है ।यहां इस शब्द का प्रयोग  उसके  अभिभावक  से है जो कि अपने  बच्चों को आगे  बढ़ाने के लिए  हर समय  उसके  छोटे  बड़े कार्यो  को या तो स्वयं कर देते हैं  या फिर उनकी  मदद  करते  रहते हैं, ऐसा करने से  बच्चों  में  स्वावलम्बन  की भावना  प्राय समाप्त  सी...

प्रकृति भी हमारे लिए पाठशाला है जो हमें बहुत कुछ सिखाती है

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      आज  के ब्लॉग में  मैं  कुछ  उदाहरणों  का जिक्र कर रहा हूँ   , मुझे लगा कि   इससे  हम सभी  को सीखना चाहिए  इसलिए  यहाँ  उनका  उल्लेख कर रहा हूँ।  लोग  पृथ्वी पर कितना  आघात करते हैं ,पर वह  न ही रोती - चिल्लाती है। प्राणी  जानें  अनजाने में ही  एक दूसरे का अपकार कर ही डालते हैं। धीर व्यक्ति को चाहिए कि  वह न तो अपना धीरज खोए और न किसी  पर कोई  गुस्सा करे।वायु  से यह शिक्षा पायी  जा सकती है, कि अनेकों  स्थानों  पर जाने के बाद भी वह किसी  स्थान पर आसक्त  नहीं  होती है,और किसी का भी कोई  गुण दोष  नहीं अपनाती है, इसी प्रकार  हम सभी को भी न तो किसी का दोष स्वीकार करना चाहिए  और न आसक्ति ।जितने  चल अचल  पदार्थ  हैं  उनका आश्रय  ंस्थान  एक ही है वह है आकाश। आकाश को देखकर  यह जाना जा सकता है कि  इस विश्व-ब्रह्माण्ड में  जितने  भी चर अचर जीव हैं...

माल्टा महोत्सव (घाम तापो नींबू सानो)

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   दिनांक  3 जनवरी 2026 को देहरादून  के सर्किट  हाउस उद्यान केन्द्र  में एक दिवसीय   राज्य  स्तरीय  माल्टा उत्सव (घाम तापो नीबू सानो)   का आयोजन किया गया ,जिसमें  प्रदेश भर के 13 जिलों  से   किसान  जनपद  के उद्यान विभाग के साथ-साथ आये थे व माल्टा, नींबू, नारंगी  आदि  इस मेले  में  लेकर आये  ।  प्रदेश के  माननीय मुख्य  मंत्री जी के द्वारा  इसमें  प्रतिभाग/उदघाटन  किया  गया  किया गया है,  माननीय   कृषि मंत्री  गणेश  जोशी जी  भी उपस्थित थे।  मैं  भी इस कार्यक्रम  गया था।  प्रदेश भर के गाँव  से उत्पादित  फल  ( माल्टा, नीबू,नारंगी  आदि  ,)  इस आयोजन  के लिए  लाये गये थे, प्रत्येक  जिले का  एक  स्थान (स्टाल) नियत था जहाँ  पर वे अपने  फलों का प्रदर्शन के  साथ-साथ बेच रहे थे । अनुभव  यह कहता है कि  इसका प्रचार...

कर्म ही मुख्य रूप से भविष्य के लिए उत्तरदायी है ।

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कर्म ही एक ऐसा  तथ्य है कि जिसकी  अनिवार्यता  सभी  को स्वीकार करनी पड़ती है मनुष्य  अपने  भाग्य का निर्माता  स्वयं  होता है ,जिस प्रकार  वह अनुपयुक्त  विचारों  एवं आदतों का  का  गुलाम बन कर अपनी  स्थिति  दयनीय  बनाता है, उसी प्रकार  यदि  वह चाहे तो अपने  विवेक का इस्तेमाल कर,अपनी  गतिविधियों को  सुधार  भी सकता है । छोटा -बड़ा, घटिया-बढिया  कैसा भी मनुष्य  क्यों न  हो,उसे कर्म तो करना  ही  पड़ता है। जब तक  जीवन है  कर्म  उसके  साथ  लगे ही रहेंगे, पर ध्यान  देने  की बात  यह है  कि वे कर्म  ऐसे  हो जो शुभ और श्रेष्ठ  समझें  जाए।हमारे और दूसरों  के लिए  हितकारी  सिद्ध हो। इस सम्बन्ध  में  मतभेदों  की एक बात यह देखने  में आती है  कि अधिकांश लोग  कर्मों  का उत्तम या निकृष्ट  होने का निर्णय  बाहरी लक्षणों  से निश्चित  करते हैं...