माल्टा महोत्सव (घाम तापो नींबू सानो)

  


दिनांक  3 जनवरी 2026 को देहरादून  के सर्किट  हाउस उद्यान केन्द्र  में एक दिवसीय   राज्य  स्तरीय  माल्टा उत्सव (घाम तापो नीबू सानो)   का आयोजन किया गया ,जिसमें  प्रदेश भर के 13 जिलों  से   किसान  जनपद  के उद्यान विभाग के साथ-साथ आये थे व माल्टा, नींबू, नारंगी  आदि  इस मेले  में  लेकर आये  ।  प्रदेश के  माननीय मुख्य  मंत्री जी के द्वारा  इसमें  प्रतिभाग/उदघाटन  किया  गया  किया गया है,  माननीय   कृषि मंत्री  गणेश  जोशी जी  भी उपस्थित थे।  मैं  भी इस कार्यक्रम  गया था।  प्रदेश भर के गाँव  से उत्पादित  फल  ( माल्टा, नीबू,नारंगी  आदि  ,)  इस आयोजन  के लिए  लाये गये थे, प्रत्येक  जिले का  एक  स्थान (स्टाल) नियत था जहाँ  पर वे अपने  फलों का प्रदर्शन के  साथ-साथ बेच रहे थे । अनुभव  यह कहता है कि  इसका प्रचार  व प्रसार  कम स्तर पर हुआ  जिससे  कम ही लोग  यहाँ  पहुँचे, कम इसलिए कि  काश्तकार  के द्वारा  काफी  मात्रा में  यहाँ  पर फल लाये गये,  दर भी   बहुत  ही उचित  थी ।  कुछ  दिन  पूर्व मै  देहरादून  के गांधी  पार्क  के पास से 60 रू प्रति  किलोग्राम  की दर से माल्टा  लाया था लेकिन  यहाँ  पर 40 रूपये  प्रति  किलोग्राम   बिक रहा  था और अच्छी  गुणवत्ता  का था,  जिसमें  कि मैं   स्वयं भी  लाया  हूँ,  किन्तु  महोत्सव  स्थल पर गाड़ी  न जाने के कारण  लोग  3, 4 किलो  फल ही ले जा पा रहे  थे , जबकि  और अधिक  ले जा सकते  थे । पार्किंग  का स्थान  नजदीक  होता तो  उचित  ही रहता।   इस प्रकार के  आयोजन  से काश्तकार   को एक बाजार  उपलब्ध  होता है  साथ  में  लोगों  को आसानी  से  सामान/फल उपलब्ध  हो जाता है , यदि  पूरे प्रदेश में  जिला  स्तरीय  व ब्लाक  स्तर पर भी ऐसा किया  जा सकता है  तो किया  जाना  उचित  ही होगा। किसी  भी आयोजन  की सफलता  इस बात पर निर्भर करती है कि इसका  उद्देश्य क्या था  और यह पूरा  हो रहा है  या नहीं, ये तो आयोजन कर्ता  ही बता  पायेंगे  या काश्तकार  जो फल लेकर आये थे ,कुल मिलाकर  इसे सफल कहा जा सकता है।  कुछ  समान्य  अव्यवस्था  अवश्य  देखी गयी, उदाहरण के लिए  पानी की  व्यवस्था   कहीं  नहीं  थी।  बहुत  सारे  लोग  बच्चों के साथ आये थे  ,  पानी ढूंढ  रहे  थे, लेकिन पानी   की     व्यवस्था नहीं   थी  ।  इस पर  आयोजन कर्ता  को भविष्य  में  ध्यान  रखना  होगा। उत्तराखंड  में  विशेषकर पर्वतीय  क्षेत्रों में  माल्टा  का उत्पादन  ठीक  ठाक  होता है  पर सही   विपणन  न होने  के कारण  काश्तकारों को  सही  दाम नहीं  मिलता  है  इस पर सभी का ध्यान  अपेक्षित  विशेषकर  ,सरकार को इसमें  प्रोत्साहन  देना  चाहिए। कृषि  व उद्यान  के क्षेत्रों  मे  यदि   सुविधाएं  दी जाय तो इसके  परिणाम  आशाजनक  रह सकते हैं। मेरा  अनुभव है कि  हम सभी  गाँव  में  खेती करते थे, लेकिन  अब लोग  पलायन  कर चुके हैं  जिससे   काफी  कम लोग  खेती कर रहे हैं,   जब से  सरकार  ने गांवो  में  मुफ्त  राशन देना  आरम्भ किया है,इसका  भी  प्रभाव  खेती पर   अवश्य   पड़ रहा   है। पर्वतीय  क्षेत्रो   में   खेती  में  श्रम अधिक होता है  और उस दृष्टि  से उत्पादन कम होता है , इसलिए  भी  लोग  खेती  करने  से दूर  हो रहें हैं या बच रहे हैं।   यदि  बागवानी  पर ध्यान  दिया  जाय तो शायद  इसके  परिणाम  बेहतर हो सकते हैं।  चरैवेति चरैवेति ।


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