उत्तराखंड की स्थायी राजधानी (Permanent Capital of uttrakhand)
कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है, जब कभी मावव जाति को किसी चीज की आवश्यकता हुई ,तो उसका आविष्कार होता चला गया है, और अभी भी आविष्कार हो ही रहे हैं और मैं समझता हूँ कि आगे भी तब तक होते रहेंगे ,जब तक इस भूमि पर मानव जाति रहेगी। आविष्कार विकास का संकेत है कहे, तो इसमें कोई गलत नहीं है। एक समय था, जब पर्वतीय क्षेत्र के लोग छोटे - बड़े कार्यो के लिए लखनऊ की दौड़ लगाते , निसन्देह जाना ही पड़ता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ थी और यह पर्वतीय क्षेत्र , उत्तराखंड भी ,उत्तर प्रदेश में सम्मिलित था। इस पर भी उत्तराखंड की विषम विशेष भौगोलिक बनावट जो कि दैनिक कार्यों के सम्पादन में सबसे बड़ी रुकावट...

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