डीपफेक की असलियत सभी को समझनी होगी।



आजकल  एक  महत्वपूर्ण   विचार   AI (   यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस )  बहु तेजी  से सभी  के   मोबाइल व  कम्प्यूटर  में  तेजी  से स्थान   ले रहा है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें मशीनों को मानव की तरह सोचने, सीखने और काम करने की क्षमता दी जाती है। यह मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और नेचरल लेजर प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करके मशीनों को डेटा से सीखने और निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।इससे  धीरे-धीरे  मानव  अपनी  दक्षता का  उपयोग  न कर  इसी पर  आधारित   हो रहा है  जो कि ठीक  नहीं कहा जा सकता है। आज एआई इतना  असली  लगने  लगा है कि सच और झूठ  में  फर्क करना  बहुत ही  कठिन  सा हो गया है ,यह डीपफेक ( कृत्रिम  छवि/ विडियो आदि   ) है । कभी-कभी  इसके  झांसे में  आने पर किसी के  जीवन भर की कमाई  दौलत,इज्जत  सब कुछ  दांव  पर लग सकता है।,जो कि किसी  भी दशा  में  उचित  नहीं कहा जा सकता है। साइबर क्राइम  विशेषज्ञों का कहना है कि  मोबाइल  स्क्रीन  पर एक ऐसा  विडियो  आता  है, जिसमें  आपका पसंदीदा  व्यक्ति  किसी  भी ब्राँण्ड  की तारीफ  करता है, या फिर आपके  किसी  परिचित की  आवाज़ में  घबराई हुई काल आती है  कि मुझे  तुरंत  पैसे भेज दो,मै परेशानी  में हूँ। आजकल  कई ऐसे  वीडियो  इतने असली  लगते हैं  कि पहली नज़र  में  पकड़  में  नहीं आते हैं यही  है डीपफेक। इसमें  एआई  तकनीक की मदद् से किसी  इन्सान  का चेहरा, आवाज या हाव भाव की नकल करके  भरोसे मंद  दिखने वाली सामग्री  तैयार की जाती है ।डीपफेक  में  डेटा और मशीन  लर्निंग  की भूमिका  होती है। किसी  व्यक्ति  के सोशल मीडिया, इंटरव्यू, रील्स, और पाडकास्ट  आदि  में  मौजूद  वीडियो, फोटो, आडियो  को एआई  माडल सिखाता है और फिर उसी व्यक्ति  की शक्ल  और आवाज़  से नयी  सामाग्री  बना  देता है। एक अनुमान  के अनुसार  करीब  करीब  70% से अधिक लोग  पिछले  एक साल से किसी  न किसी  डीपफेक  सामग्री  से रूबरू  हुए होंगे,  हो सकता है या अनुमान  लगाया जा सकता कि कुछ  इससे  प्रभावित  भी  अवश्य  हुए  होगें, लोगों  को लगता है कि  ए आई से  आन-लाइन  स्कैम पहचाना कठिन  सा हो गया है, कई बार लोग  बैंक, सरकारी  कार्यालयों   आदि   से  आयी असली  फोन  को  भी इसलिए  नहीं  उठाते हैं कि यह डीपफेक  तो नहीं है,  हो भी क्यों नहीं  कई लोग  इस प्रकार से ठगी  का शिकार  हो गये हैं, जिसमें  महिलाओं  की संख्या  शायद  अधिक  है। डीपफेक  को पहचान करने के लिए  सामान्य  जानकारी यह हो सकती है। जब कभी  तुरंत बहुत  बड़ा दावा किया जाय , किसी की छवि  खराब  करने की कोशिश की  जाय, जल्दी जल्दी  निर्णय लेने के लिए  दवाब  डाला जा रहा  हो, आँखो  का झपकना असामान्य  लगे, ओठों की चाल व आवाज में  किसी  प्रकार का तालमेल  नहीं  दिखाई  दे, आदि  और भी कई  बातें  हो सकती  है  जिसे आप सभी  पाठकों  को अन्तर  महसूस  होगा, इन सभी  पर अवश्य  ध्यान  रख कर ही ठगी  से बचना  होगा। AI के  कुछ  नुकसान  के साथ-साथ कुछ  इसके फायदे  भी  हैं एआई 
 मशीनें मानव से अधिक तेजी से और सटीकता से काम कर सकती हैं।  एआई नए अवसर पैदा कर सकता है, जैसे कि नए उद्योग और नौकरियां।  एआई डेटा के आधार पर अधिक सटीक निर्णय ले सकता है। कुछ  प्रमुख  नुकसान  भी इसमें  समाहित है  जैसे  एआई के कारण कुछ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। एआई  के लिए डेटा की आवश्यकता होती है, जो प्राइवेसी के लिए खतरा हो सकता है। एआई में बायस हो सकता है, जो अनुचित निर्णय ले सकता है। बहुत  सारी  बातें  अच्छी  है  तो कुछ  परेशानी  भी है,  यह हम सभी  को   समझना  होगा कि कब और कैसे  इसका उपयोग  करना हित या अहितकर  है। चरैवेति चरैवेति। 

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