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अप्रैल, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दृष्टिकोण (Perspective)

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      किसी एक  व्यक्ति का किसी  दूसरे  व्यक्ति  के प्रति  दृष्टिकोण  कैसे  बनता  , क्या  इसका  आपको  अनुभव  है  , अवश्य  अनुभव करते होंगे।  सामान्यतया जो आपके  विचारों  से सहमत होता  है वह आपका  सहयोगी  व प्रशंसक  हो सकता है,  और जो आपके विचारों से सहमत  न  होता  हो व आपका  सहयोगी  नहीं  हो सकता है  , और न ही  प्रशंसक  होगा। आपका  आलोचक  अवश्य  हो सकता है।   अब  इसी से  प्रसन्न  एव अप्रसन्नता  की स्थिति  पैदा  होती है।   प्रसन्नता  एक मनोभाव  है,एक सकारात्मक  मनोदशा है। हमारी  जैसी  मनः स्थिति  होती है  वैसे ही  हमारे  शरीर  मे भौतिक  व रासायनिक  परिवर्तन  होते  रहते हैं। हमारी  मनोदशा  जीवन की  परिस्थितियों  के प्रति  जन्म  लेने  वाली  प्रतिक्रिया...

परिवार/समुदाय

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          आज मैं  एक  महत्वपूर्ण  विषय पर  अपने  विचार/अनुभव   लिख रहा हूँ। समाज  का एक ताना- बाना  है   जिसके  आधार  पर वह कार्य  करता  रहता  है   इस ताने बाने  में    सबसे  छोटी  इकाई  परिवार  है  यही से  समाज  आरम्भ  होता है, यह आप सभी  महसूस  करते  होंगे।  परिवार, गाँव ,न्याय पंचायत, ब्लाक,जिला,प्रदेश व  देश ये  सभी  महत्वपूर्ण  अंग हैं। यदि  हम परिवार  को  ही  ले   तो  , कोई  परिवार  का मुखिया  होता है  कोई  सदस्य  आदि  और ये किसी  पारिवारिक  रिश्तों  से जुड़े  रहते हैं।  यदि   कोई  सदस्य  या मुखिया  नैतिक  या अनैतिक  कार्य  कर रहे हैं  और ये सोचें  कि इस कार्य के बारे  में  किसी को पता नहीं है  तो हम बहुत  ब...

दर्पण (Mirror )

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    जब हम दर्पण  के सामने  खड़े  होते हैं  तो वही चित्र  शीशे  मे  दिखता है  जो हम होते हैं  ठीक  यही  स्थिति   सभी  व्यक्तियों की  या दर्पण  के सामने  रखी वस्तु  की होती है।  उसका  वास्तविक  प्रतिबम्ब   दिखाई देता है।  सम्राट  मार्कस आरेलियस महान चिंतक  और विचारक की  प्रेरणा  देने  वाले  वाक्य आज भी दुनिया के लिए  प्रासंगिक हैं। मार्कस ने आत्म चिंतन  किया  और  अपने  लिए  जो टिप्पणीया की है,  वह आज सार्वजनिक  बन गयी हैं। मार्कस आरेलियस ने हदय की सच्चाई  पर बल देते हुए  लिखा है " कोई  भी  काम करो,  तो उसे  मन लगाकर, विवेकपूर्वक,  परहित  को ध्यान  में  रखकर  करो। व्यर्थ  बातें  न करो।  दूसरों  के काम में  दखल न दो। अपने  वाक्चातुर्य  से अपनी कमजोरियों  को छिपाने  का प्रयत्न  न करो। अपने...

मुसीबत (Difficulty)

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    दिन  और रात  के समान  ही समय का पहिया  ठीक  उसी  प्रकार  से घूमता है  जैसे  सुख और दुःख  का  प्रत्येक  के जीवन  में  भी आना  निश्चित ही  है। मेरे  विचार  से संसार  में  कोई  भी मनुष्य  ऐसा  नहीं  होगा  जिसके जीवन  में  कभी  मुसीबत न आयीं  हो,अर्थात  सभी के जीवन  में  इसको  आना  ही है। मुसीबतों  से मनुष्य  की विभिन्न  गुणों  की परीक्षा  भी होती है  जैसे, साहस,धैर्य, सहिष्णुता  व आध्यात्मिकता  आदि की । विपत्तियां वास्तव में  कुछ  नहीं है,  केवल हमारी  प्रतिकूलताएं  है। हम जिन वस्तुओं  की,  या जिन परिस्थितियों  की इच्छा करते हैं,  उनका  प्राप्त  न होना  ही विपत्तियां  कहलाती हैं।  हमारी  इच्छा के   प्रतिकूल जो भी बात सामने  आती है  उसे   हम सभी विपत्ति  मान लेते...

वृद्धावस्था( old age)

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      बुजुर्ग  व्यक्ति  घर परिवार  की मुख्य धुरी  होता है यदि  इसे  घर की रीढ़  कहा जाय  तो कुछ  भी गलत नहीं है। लेकिन  आमतौर पर  एक अवस्था  के बाद उनके महत्व की अनदेखी की जाती है, जो कि परिवार  व समाज  के लिए  अच्छा  संकेत  नहीं है। दरअसल  बुजुर्गों  में  बढ़ता   अकेलापन,    उनके  जीवन की  नीरसता,  इस बात का प्रमाण है  कि हम दिनों  दिन  उन्हे  अपनी जिंदगी से अलग  कर रहे हैं, लेकिन  यदि  थोड़ा  सा प्यार  व अपनापन उन्हें  दिया  जाय  तो बदले  में  न  केवल  हमें वे अपना  आशीर्वाद  व दुलार देते हैं,  बल्कि अपने  जीवन  के अनमोल  अनुभव  भी जी खोलकर  बताते हैं,  जो कि आने वाले  समय में  हम सब के लिए  लाभकारी  होते हैं।  आप अपने  आसपास  या अपने  स्वयं  के घरों  में  रह र...

भारी भरकम बस्ते का बोझ ( heavy school bag)

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        आज  का विद्यार्थी  ही कल को समाज  में  विभिन्न  सेवाओ में  जाता है यथा  उसमें  ही नेतृत्व  देने  वाले से लेकर  विभिन्न  सेवाओं  को  देने  के लिए   भी तैयार  होंगे।  उसका नेतृत्व कैसा होगा  चाहे  वह किसी  भी सेवा  में   जाने  वाला   हो, यह उसकी  शिक्षा  व नैतिक  मूल्यों  पर आधारित  होगा। यदि  उसकी  शिक्षा  और नैतिक मूल्य  उच्च स्तर  के होगे तो निश्चित  ही समाज  में  अच्छी  सेवाओं  को प्रदान  करेगा , ऐसा  आप सब सोचते  होंगे, या अनुभव भी  करते  होंगे,  इसलिए  विद्यालयो  में  दी जानी  वाली  शिक्षा  ज्ञानवर्धक  एवं  प्रयोगधर्मी और  नैतिकता  पर विशेष  बल देनी वाली  होनी चाहिए। शिक्षा  ऐसी  हो जिसे  बच्चे  प्रसन्नता  के साथ-साथ  खेलते सी...

युवा ऊर्जा (youth's energy)

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  आज भारत को  विश्व में  सबसे  युवा  आबादी  वाले देश के रूप में  जाना जाता है । भारत  की किशोरों  की आबादी  लगभग  25 करोड़  30 लाख है,लेकिन  आकड़े  कहते हैं कि 15 से  19 आयु वर्ग  के किशोरों  में  56% किशोरिया  एवं  30% किशोर  लड़के   एनीमिया  से पीड़ित हैं। एनीमिया का मतबल  अल्परक्तता  यानी हीमोग्लोबिन  की कमी  जिससे  आज का युवा वर्ग  प्रभावित  है।यौवन शारीरिक  स्वास्थ्य, मानसिक दृढता  एवं  भावनात्मक  ऊर्जा  के लिए  जाना जाता है, और यह उर्जा  स्वास्थ्य  की दृढ़ता  का परिचायक  भी होती है। यदि  युवा  इस ऊर्जा  को उचित  दिशा  में  प्रयुक्त करे तो उसका  जीवन  सार्थक  होता चला जायेगा अन्यथा  भटकाव  की ओर कदम कब बढ़  जाएँ  तो पता  भी नहीं  चलता है। युवा  जीवन  के 15 वर्ष  की आयु  से 35 वर्ष  ...