मुसीबत (Difficulty)
दिन और रात के समान ही समय का पहिया ठीक उसी प्रकार से घूमता है जैसे सुख और दुःख का प्रत्येक के जीवन में भी आना निश्चित ही है। मेरे विचार से संसार में कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं होगा जिसके जीवन में कभी मुसीबत न आयीं हो,अर्थात सभी के जीवन में इसको आना ही है। मुसीबतों से मनुष्य की विभिन्न गुणों की परीक्षा भी होती है जैसे, साहस,धैर्य, सहिष्णुता व आध्यात्मिकता आदि की । विपत्तियां वास्तव में कुछ नहीं है, केवल हमारी प्रतिकूलताएं है। हम जिन वस्तुओं की, या जिन परिस्थितियों की इच्छा करते हैं, उनका प्राप्त न होना ही विपत्तियां कहलाती हैं। हमारी इच्छा के प्रतिकूल जो भी बात सामने आती है उसे हम सभी विपत्ति मान लेते हैं, ढेरों ऐसे उदाहरण आप, हम सब के जीवन में मिल जायेंगे , यदि हम अपना स्वार्थ, मोह , ममता और इच्छाओं को संयमित, और मर्यादित रखें , तो मुसीबतो का बहुत कम सामना करना पड़ेगा, और यदि पड़ा भी तो सहज भाव से इसे स्वीकार कर उसका समाधान निकाल सकते है।आप का भी अनुभव होगा, कि कभी - कभी मुसीबत साहस के साथ कर्म क्षेत्र में बढ़ने के लिए चुनौती पैदा कर देती है और सफलता के रास्ते खोल देती है। कुछ मुसीबत काल्पनिक होती हैं जो कि कहीं होती ही नहीं है , हम सभी व्यर्थ में अपने चारों ओर भय का वातावरण खड़ा कर देते हैं, किसी भी दशा में भय का वातावरण बना देना उचित नहीं कहा जा सकता है। हमारी बहुत सी मुसीबते आधे अधूरे मन की ऊपज होती हैं, इसके अतिरिक्त परिस्थितियों, भाग्य, अज्ञान, या अनिभज्ञ कारणों से भी मनुष्य को विपत्तियो का सामना करना पड सकता है। बहुत से लोग अकारण ही अपने मार्ग में काल्पनिक विघ्नों, बाधाओं का ख्याल करते रहते हैं । इससे उनका मन कमजोर हो जाता है, उनमें किसी प्रकार का साहस नहीं रहता और उनकी बौद्धिक शक्ति भी नष्ट हो जाती है। उनका मन निषेधात्मक हो जाता है। ऐसे लोगों का आत्म विश्वास नष्ट हो जाता है , व उनके आस पास मुसीबत दिखायी देती है। जीवन संग्राम में विजय प्राप्त करने के लिए अपने कार्य क्षेत्र में निडर होकर लड़ते रहने की आवश्यकता है। इसी तरीके हम सभी सामान्य संकटों और विपत्तियों से लोहा लेकर उन्हें परास्त कर सकते हैं। विपत्तियों एवं कठिनाइयों से जूझने में ही हमारा पुरुषार्थ है।अतः कठिनाइयों को खेल समझकर उनका हंसते हंसते मुकाबला करना सीखिए। धैर्य की परीक्षा आपत्ति काल में ही होती है " धीरज,धर्म, मित्र अरू नारी । आपद काल परिखअहिं चारी ।। श्री रामचरित मानस की इस चौपाई से हम सभी को सीखना चाहिए और विपत्तियों का सामना करना चाहिए । चरैवेति चरैवेति।
काल्पनिक भय सबको परेशान करते रहते हैं।🙏🙏
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
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