युवा ऊर्जा (youth's energy)
आज भारत को विश्व में सबसे युवा आबादी वाले देश के रूप में जाना जाता है । भारत की किशोरों की आबादी लगभग 25 करोड़ 30 लाख है,लेकिन आकड़े कहते हैं कि 15 से 19 आयु वर्ग के किशोरों में 56% किशोरिया एवं 30% किशोर लड़के एनीमिया से पीड़ित हैं। एनीमिया का मतबल अल्परक्तता यानी हीमोग्लोबिन की कमी जिससे आज का युवा वर्ग प्रभावित है।यौवन शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक दृढता एवं भावनात्मक ऊर्जा के लिए जाना जाता है, और यह उर्जा स्वास्थ्य की दृढ़ता का परिचायक भी होती है। यदि युवा इस ऊर्जा को उचित दिशा में प्रयुक्त करे तो उसका जीवन सार्थक होता चला जायेगा अन्यथा भटकाव की ओर कदम कब बढ़ जाएँ तो पता भी नहीं चलता है। युवा जीवन के 15 वर्ष की आयु से 35 वर्ष तक की आयु को माना जा सकता है। पैतीस वर्ष की आयु के बाद यौवन ढलने लगता है ऐसा आप सभी को अनुभव भी होगा, और अनुभव कर भी सकते हैं। यौवन आरम्भ होते ही युवाओ में शारीरिक परिवर्तन के लक्षण शुरू होने लगते हैं। शारीरिक परिवर्तन के साथ मानसिक परिवर्तन भी कई तरह से होने लगते हैं, उनका यह समय भावनात्मक एवं वैचारिक संक्रान्ति का है। यह वह समय है जब मन में कई प्रकार के भाव, विचार व आवेग पैदा होते हैं, कई तरह के विचारों का सिलसिला बनता चला जाता है। यह सब इतनी तीव्र गति से होता है कि स्थिरता खोती नजर आती है। इसलिए यदि युवाओं को समय रहते सही दिशा मिल जाए तो वे स्वयं का एवं अन्य का कल्याण कर पाने में समर्थ हो सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि युवाओं की शिराओं एवं धमनियों में खून उबाल उछाल मारता है परन्तु आज युवाओं का खून ही सूखता प्रतीत हो रहा है, यह आकड़े हमें आईना दिखाते हैं और चिंताजनक पहलूओ की ओर हमारा ध्यान खीचते है, क्योंकि यह स्थिति अपने युवा देश के लिए किसी भी स्थिति में सही नहीं कही जा सकती है। इस सबके साथ यह तथ्य भी है कि भारत में विवाह होने की उम्र विश्व के अन्य देशों की तुलना में कम है हालांकि अब वह धीरे धीरे बढ रही है। नवविवाहिता युवतियों में एनीमिया होने के कारण उनके एवं बच्चे के स्वास्थ्य पर गम्भीर प्रभाव पड़ता है। यदि हम युवा जनसंख्या के स्वास्थ्य का उचित ध्यान रखा जाए तो ये सभी देश के विकास में अमूल्य योगदान दे सकते हैं, इससे जीवन की गुणवत्ता पर असर पड सकता है, क्योंकि एक स्वस्थ व्यक्ति अधिक शारीरिक एवं मानसिक श्रम कर सकता है ।आधुनिक विज्ञान के इस दौर में शरीर को स्वस्थ रखने व जीवनशक्ति को बढ़ाने संबंधी प्रयोगों में तेजी आयी है चिकित्सक भी बढ़े है परन्तु युवक-युवती की ऊर्जा को एनीमिया ने छीन लिया है जिसके परिणाम डरावने लग रहे हैं। अतः योजना बद्ध तरीके से रीति नीति से दूर करने की आवश्यकता है, अपने परिवार में, बच्चों पर हम सभी इसे दूर कर ही सकते हैं और समवेत प्रयास की भी आवश्यकता है। इस ओर हम सभी को ध्यान देने की आवश्यकता है। चरेवेति चरेवेति।
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