परिवार/समुदाय

 

      

 आज मैं  एक  महत्वपूर्ण  विषय पर  अपने  विचार/अनुभव   लिख रहा हूँ। समाज  का एक ताना- बाना  है   जिसके  आधार  पर वह कार्य  करता  रहता  है   इस ताने बाने  में    सबसे  छोटी  इकाई  परिवार  है  यही से  समाज  आरम्भ  होता है, यह आप सभी  महसूस  करते  होंगे।  परिवार, गाँव ,न्याय पंचायत, ब्लाक,जिला,प्रदेश व  देश ये  सभी  महत्वपूर्ण  अंग हैं। यदि  हम परिवार  को  ही  ले   तो  , कोई  परिवार  का मुखिया  होता है  कोई  सदस्य  आदि  और ये किसी  पारिवारिक  रिश्तों  से जुड़े  रहते हैं।  यदि   कोई  सदस्य  या मुखिया  नैतिक  या अनैतिक  कार्य  कर रहे हैं  और ये सोचें  कि इस कार्य के बारे  में  किसी को पता नहीं है  तो हम बहुत  बड़ी  गलती कर रहे हैं,   जो कि आने वाले  समय  में  किसी  और को नहीं  आपके   लिए  बहुत  पीड़ादायक  हो सकती है। जिस कार्य  को आप कर रहे  हैं ,  हो सकता  है  आपके अलावा  उस कार्य  के बारे  में  कोई  दूसरा  न जानता हो  किन्तु  आप तो जानते  ही  हैं,   यही  सबसे  खराब/ अच्छा   है, यदि  आप जान रहे हैं  कि मेरे  द्वारा अमुक  अनैतिक  कार्य  किया  गया है तो आपका  मन हर समय  आपको  परेशान  करता  रहेगा  और जब आप अपने  ही नजरों  में  गिर जायेंगे  तो इससे  बड़ा  दुःखद  कुछ  नहीं है,  क्योंकि  यह विन्दु  या घटना  आपको  बार  बार  अपनी   नजरों  से गिरायेगी , ऐसा  होते   करते    कभी  कभी  आप  बहुत  डर भी  जायेंगे ,  तब आपके शरीर  के   अन्दर  का  system  अनियंत्रित  होगा, आपके   हार्मोन्स  की  मात्रा   अधिक या कम निकलेगी  जो कि आवश्यक  है   अर्थात   अनियमित   निकलेगी   और स्वास्थ्य  सम्बन्धी  दिक्कतें  आपको  होगी।  यह ठीक  उस प्रकार  से काम करता  है, जैसे  आप अचानक उम्मीद  के विपरीत  कोई  भयावह  घटना  घटित  होती    देख रहे   हैं,  उदाहरण  के लिए  अचानक  आप सांप  देख लेते हैं, या   कहीं  गिर जाते हैं, तो आपका  heart  beat  अनियमित  हो जाती है  , और भी कई अन्य  घटनाये    आदि हो सकती हैं  ।  इसलिए मेरा  मत है,   कभी भी  कोई  ऐसा कार्य  करना  उचित नहीं  कहा  जा सकता है  जो आपको  हर समय  परेशान  करता  रहे।   कई लोगों  को आपने   कहते   सुना  होगा  कि ,  कि मुझे  नींद  नहीं  आ रही है,  इसका  कारण भी वही  है,  कि आप किसी  न  किसी कारण  परेशान  है, जो आपको  बार बार परेशान  कर रही है, इसका  कारण चाहे  जो  कोई  भी हो सकता है  । शरीर  और मस्तिष्क  अनेकानेक  अदृश्य  घटकों  से मिलकर  बना है। उनके  समूह  समुच्चय  अपना  अपना  क्षेत्र  संभालते हैं, प्रत्यक्ष  अंग  अवयवों  के रूप  में काम करते हैं  ,इसलिये  उसके  विपरीत  कोई  ऐसा  कार्य   करना  परिवार  के मुखिया  या सदस्यों   को   पीड़ा  पहुँचा  सकते हैं।   किसी  भी संस्था  के मुखिया  को ऐसा  कोई  काम  नहीं  करना चाहिए  जिसका प्रभाव  सभी  घटकों  पर पड़े।   परिवार  से लेकर  राष्ट्रीय  स्तर तक  सभी  संस्थाओं  व   घटकों   के   लिए   भी  यह महत्वपूर्ण है। इस तरह यह स्पष्ट है कि यदि  हमें  किसी  उच्च  स्तर पर बड़े  काम को पूरा करना है  तो यह किसी एक  योग्य व्यक्ति के माध्यम से  समय पर पूरा  होने  वाला  नहीं है, इसके  लिए कई योग्य  व्यक्तियों  को  सांथ  आना  चाहिए  होता है,   और जब ये सभी  व्यक्ति  मिलकर  उस कार्य  को पूरा  करने  का प्रयास  करते हैं  तो वह कार्य  अवश्य  पूरा होता है  ।  इसको  चींटी  परिवार  से सीखा  जा सकता है किस प्रकार  से वह अपने  भार से  कई अधिक  भार को  आपसी  मित्रता  से मिलकर  एक स्थान  से दूसरे  स्थान  तक ले जाती हैं  ।  चरैवेति चरैवेति । 

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