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जनवरी, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रजातंत्र की शक्ति (Power of Democracy)

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  26  जनवरी  2025  पूरे  राष्ट्र  ने  76वां गणतंत्र  दिवस  धूमधाम से मनाया क्योंकि  इस दिन  से हमारा  अपना  संविधान  लागू  हो  गया  था। इसके  अनुसार  हमारी प्रजातांत्रिक   शासन   व्यवस्था  के नियम  कानून  लागू  हो गये  थे , जिसमें  नागरिकों  को सर्वोच्च  अधिकार दिये गये हैं , वह है  सरकार  को चुनने  में  मताधिकार का प्रयोग  और  मन की अंतरात्मा  की आवाज  पर अपने  वोट  का प्रयोग करना,  अब हम  सभी  अपने आप से पूछें  कि क्या  हम  अपने मन की आवाज़  के आधार  पर अपना  मताधिकार का प्रयोग  करते हैं  यदि  हाँ  तो यह सबसे  उत्तम है,  परन्तु  यदि  नहीं का उत्तर  आ रहा है  तो यह प्रजातंत्र के लिए  सबसे  खराब  स्थिति  है ।  जरा  सोचो  जब  हम किसी  भी प्रकार...

एक दिवसीय परीक्षा (One Day Exam, सामान्य-2)

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 वर्तमान  में   विभिन्न  स्तर  के लोक सेवकों के  चयन के लिये  सेवाओं  की उपयोगिता  के  आधार पर  अलग  - अलग  तरह की प्रक्रिया  अपनायी जाती है।  सामान्यतः  इसको  दो  मुख्य भागों  में  बांटा  जा सकता है,   एक वह जहाँ  विषय    की      विशेषज्ञता  आवश्यक  होती है और  सेवाओ के उपयोग के दौरान  विषय  का ज्ञान  अति  आवश्यक है ।   यह   आप सभी    जानते  भी  हैं ,    उदाहरण के लिए    शिक्षक,  वैज्ञानिक, डाक्टर, इन्जीनियर  आदि   दूसरी परीक्षा है  वह जहाँ  सामान्य  जानकारी  आवश्यक है  चाहे  उसका  विषय कोई भी हो  लेकिन  सभी  विषयों  के प्रतिभागी इसमें  प्रतिभाग करते हैं।  और जिसकी   सामान्य  जानकारी  (  सामान्य गणित, सामान्य  विज्ञान, समान्य  ...

आत्महीनता बहुत बड़ी कमजोरी

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  कभी  - कभी व्यक्ति अपने अन्तःकरण  में अपने आप में कई प्रकार की कमियों, कमजोरियों   आदि की कल्पना किया करता है  , कोई कल्पना करना व उसका उपयोग   करना उसके   हित तथा   अहित दोनों क्षेत्रों में सम्भव  होता  है। जब व्यक्ति आत्महीनता से ग्रस्त होता है, तो वह हमेशा नकारात्मक  (अहित में)सोचता है यह स्थिति स्वयं उसके लिए  खतरनाक है, विगत प्रतिकूल संयोग या परिस्थितियां ही उसकी धारणा को मजबूत बनाने  का काम  करती है।   कमी   की   कटु  अनुभूति बार बार अन्तःकरण को   चुभती  रहती हैं और   हम   उसे जानकार भी अनजान बने रहते हैं , या  बने रहने का प्रयत्न करते हैं। हम नहीं चाहते कि कमी का अनुभव हमें बार बार  कष्ट दे, हम भूलने का विफल प्रयास करते हैं पर मन की स्थिति विचित्र होती है, जिसको हम भूलने का प्रयास कर रहे हैं वह बार बार याद आती रहती  है, और यह हमारे   कार्यों  के साथ - साथ  स्वास्थ्य  पर भी  ...

व्यवसाय-में जाने के अवसर

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  एक जमाना था  जब लोग  सरकारी  सेवा  में  जाने के लिए  अपनी  इच्छा  नहीं  रखते थे, (ये  सब हम अपने पूर्वजों  से सुनते थे, )  लेकिन  आजकल  परिस्थितियों  बदल गयी हैं,  आजकल  हर  आदमी  सरकारी  सेवा  को प्राथमिकता में  रख रहा है। अब प्रश्न ये है कि क्या  हम  सभी  को सरकारी  सेवा  मिल  जायेगी/मिल  रही है,  नहीं मिल सकती है, सरकारी सेवा के विकल्प  बहुत ही सीमित है ,  वह भी उनको जो अपने कार्य  को  बहुत ही शानदार/अच्छे/मेहनत   से  कर रहे हैं,क्योंकि अधिकतर सरकारी सेवा  जो  कोई  भी  हो चाहे वह केन्द्र सरकार की  हो या राज्य स्तर  की हो , सेवा  में  जाने  से पूर्व  एक प्रतियोगिता  परीक्षा  उत्तीर्ण करनी पड़ती है  , वह भी कई चरणों  में  आयोजित की  जाती है , इसमें  सफल अभ्यर्थी  को ही सरकारी सेवा   मिलती है। आजकल...

विषयगत- परीक्षा (सामान्य-1)

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  क्या  कभी  आपने   अपने  पढ़ने वाले  बच्चों  से यह पूछा?  कि  बेटा  जो आप पढ रहे हैं, उन किताबों  के नाम  क्या -  क्या  हैं ?और यदि  उसने  नाम  बता दिया  तो अमुक किताब में  कितने  पाठ ( chapter) संख्या  में  है  ? और यदि  उसने  पाठों  की संख्या भी  बता दी, उन सभी  पाठों के नाम क्या क्या  है ? यदि  उसने  यह भी बता  दिये हैं,   निसन्देह आपका   बच्चा अपने  कार्य  के बारे  मे पूरी  जानकारी  रखता है।  यह एक  छोटा  वार्तालाप है , आपने  अभी  तक नहीं  पूछा  है,  तो आज पूछ कर देखना   और आकलन  कर लेना,  यह   कार्य  मैं   आपके  लिए  छोड़  रहा हूँ ,जिससे  आप अपने  बच्चों  के बारे में  आकलन कर सकते हैं  ।  वर्तमान में  समय में कोई  भी परिवार सबसे  अध...

विचारों का महत्व

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  व्यक्ति  के  जीवन में  विचारों  का बड़ा ही महत्वपूर्ण  स्थान  है, और मै समझता हूँ कि जैसे  जैसे   आपके विचार  होते हैं  उसी दिशा  में  आपकी दशा  भी निश्चित होती  जाती है  , और उसके अनुरूप  आप कार्य  करते हैं । मनुष्य का जीवन  उसके  विचारों  का प्रतिबिंब  है, सफलता-असफलता, उन्नति-अवनति आदि सभी  पहलू मनुष्य के  विचारों  पर निर्भर  करते हैं।   स्वामी  रामतीर्थ ने कहा है " मनुष्य के जैसे  विचार  होते हैं  वैसा ही जीवन  बनता" है।  स्वामी  विवेकानन्द ने  कहा  था " स्वर्ग  और नरक कहीं  अन्यत्र  नहीं है  इनका निवास हमारे  विचारों  में  ही है"  आरम्भ  में  सभी का जन्म  एक जैसा  होता है  किन्तु  अलग अलग  परिवारों  मे जन्म  के बाद उसमें ( बच्चे ) मे विचार रूपी बीज का जन्म  होता है  और धीरे-धीरे  उसका पालन ...