व्यवसाय-में जाने के अवसर
एक जमाना था जब लोग सरकारी सेवा में जाने के लिए अपनी इच्छा नहीं रखते थे, (ये सब हम अपने पूर्वजों से सुनते थे, ) लेकिन आजकल परिस्थितियों बदल गयी हैं, आजकल हर आदमी सरकारी सेवा को प्राथमिकता में रख रहा है। अब प्रश्न ये है कि क्या हम सभी को सरकारी सेवा मिल जायेगी/मिल रही है, नहीं मिल सकती है, सरकारी सेवा के विकल्प बहुत ही सीमित है , वह भी उनको जो अपने कार्य को बहुत ही शानदार/अच्छे/मेहनत से कर रहे हैं,क्योंकि अधिकतर सरकारी सेवा जो कोई भी हो चाहे वह केन्द्र सरकार की हो या राज्य स्तर की हो , सेवा में जाने से पूर्व एक प्रतियोगिता परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ती है , वह भी कई चरणों में आयोजित की जाती है , इसमें सफल अभ्यर्थी को ही सरकारी सेवा मिलती है। आजकल बच्चों की प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के नाम पर कई प्रकार के कोचिंग संस्थान खुले है और भारी भरकम फीस ले रहे हैं और कई छात्रों का समय व पैसा दोनों बरबाद हो रहा हैं, हो सकता कुछ सफ़ल हो भी रहे हों। मेरा मानना है कि यदि आपको कार्य के रूप में केवल पढ़ने का कार्य करना हैं तो हर समय आपके मन में कार्य याद रहना चाहिए, फिर दूसरी बात पढ़ने के लिए बहुत सारी बातें है, देश , दुनिया की हैं क्या ये पढ़नी चाहिए ? यदि हां फिर क्या , कौन और क्यों, इसका उत्तर भी आपको देखना होगा ? कोई भी परीक्षा संस्था अपनी -अपनी परीक्षा के लि एक विज्ञापन जारी करती है, उसमें परीक्षा की पूरी योजना होती है, समय निर्धारित होता है सबसे महत्वपूर्ण उसका एक syllabus होता है कि इसी syllabus में से आपको प्रश्न पूछे जायेगें, कितने परीक्षार्थियों को अपना अपना syllabus याद रहता है ? ये आप स्वयं तय कर सकते हैं लेकिन यदि आपको syllabus ही याद नहीं है , तो तैयारी का आकलन आप स्वयं कर ले। इसलिए मैं सभी प्रकार के पाठकों ( प्रतियोगी परीक्षा परीक्षा में बैठने वाले लोगों ) से आग्रह करूंगा कि जब भी आप कोई परीक्षा दे रहे हैं, चाहे विषयगत हो या व्यवसायिक हो अपने सामने syllabus अवश्य रखें, फिर एक -एक कर दिये गये chapters को तैयार करें, हो सकता है इसके लिए आप को कई अन्य प्रकार की किताब देखनी पढ सकती हैं, ये सब आप जानते भी हैं मैं कोई नयी बात नहीं कह रहा हूँ, लेकिन यह हकीकत है कि 10 से 20% परीक्षार्थी की ही तैयारी के साथ परीक्षा दे रहे होते हैं, जिनको अपना पाठ्यक्रम याद रहता है, और सफल होने के लिए लगातार मेहनत भी करते रहते हैं, दूसरी बात मैं यह कह रहा हूँ कि, कई परीक्षार्थी जब पेपर दे कर घर आते हैं, उस पेपर को पलट कर नहीं देखते हैं कि कितने सवाल मैंने हल किये और कितने सही हैं और कितने गलत हैं, गलत का सही उत्तर क्या है ? किस किताब में मिलेगा ?, आदि कई बातें हैं जो कि अगली आने वाली उसी परीक्षा में उनकी सहायक हो सकती है , लेकिन नहीं करते , इसका अर्थ यह हुआ कि उनका केवल परीक्षा देने से मतलब था । परिणाम से कोई वास्ता नहीं है, इन सब बातों का खास मतलब है इसलिए लिख रहा हूँ अनुभव के आधार पर लिख रहा हूं , और हर नये ब्लॉग में कुछ नया है, जिसको कि हमें कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, और आगे बढ़ने को प्रेरित करता है । समाज में कई क्षेत्र है, सरकारी विभाग के अतिरिक्त निजी क्षेत्र में भी आगे बढ़ने के लिए कई अवसर है, लेकिन एक बात प्रमुख है हर क्षेत्र में इमानदारी से मेहनत करने की आवश्यकता होती है।
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