प्रजातंत्र की शक्ति (Power of Democracy)

 


26  जनवरी  2025  पूरे  राष्ट्र  ने  76वां गणतंत्र  दिवस  धूमधाम से मनाया क्योंकि  इस दिन  से हमारा  अपना  संविधान  लागू  हो  गया  था। इसके  अनुसार  हमारी प्रजातांत्रिक   शासन   व्यवस्था  के नियम  कानून  लागू  हो गये  थे , जिसमें  नागरिकों  को सर्वोच्च  अधिकार दिये गये हैं , वह है  सरकार  को चुनने  में  मताधिकार का प्रयोग  और  मन की अंतरात्मा  की आवाज  पर अपने  वोट  का प्रयोग करना,  अब हम  सभी  अपने आप से पूछें  कि क्या  हम  अपने मन की आवाज़  के आधार  पर अपना  मताधिकार का प्रयोग  करते हैं  यदि  हाँ  तो यह सबसे  उत्तम है,  परन्तु  यदि  नहीं का उत्तर  आ रहा है  तो यह प्रजातंत्र के लिए  सबसे  खराब  स्थिति  है ।  जरा  सोचो  जब  हम किसी  भी प्रकार  के प्रलोभन,   जाति,  धर्म ,  लिंग , क्षेत्र, भाषा   के भेद के आधार  पर अपना  वोट  देंगे ,   तो क्या  हो सकता  है ? अपने  आप से पूछने  पर आपको  उतर  भी मिल  रहा होगा ,  कि यह धीरे-धीरे  देश के लिए  यह  खतरनाक  हो  सकता  है।(इससे  हम सभी को  बचना चाहिए)   जब  हमारा  देश  आजाद  हुआ  तो  संविधान  निर्माताओं ने  सोचा होगा,  कि   लम्बे  समय तक गुलाम  होने  के बाद हमारा देश  आजाद  हुआ है  और   जैसे -  जैसे  हमारा  देश शिक्षित  / विकसित  होगा  तो  हम सब देश हित  के बारे  में  सोचेगे , और  देश  का मतदाता   ऐसे  लोगों  को चुनेगा जो  देश  में  स्वस्थ  परम्परा  स्थापित  करें,  कुछ लोग  कर भी रहे रहे हैं। लेकिन कुछ  तो  जीतने    के लिये  हर प्रकार  के    हथकण्डे  अपनाते हैं।   यह  एक  विचारणीय  प्रश्न  है  ,  जो  दल या प्रत्याशी  जीतने  के लिए  पानी  की तरह पैसा  बहाये , तो क्या  वह आम आदमी  के बारे में  सोचेगा,? (हो सकता  कुछ  लोग  ईमानदारी  से चुनाव  लड़  रहे  हों)   पहले तो  यह देखो  कि इतना  पैसा  क्यों  व्यय कर रहे हैं ?  और यदि  कर रहे   हैं,  तो निश्चित ही उसको  आम लोगों  के टैक्स  से ही वसूल  करेगे , जितना  उन्होने  व्यय किया  है।  उसको  वसूल करने के  बाद ही  कुछ  अन्य  विकास के बारे  में   तय करेंगे ।  यह बहुत ही  गम्भीर है,  दूसरी महत्वपूर्ण  बात   यह है  कि आम मतदाता,  जो  कि यह धारणा  बना  लेते हैं,  कि   अमुक  व्यक्ति या दल ठीक है ,  पर वह नहीं  जीत रहा है या जीत नहीं  सकता है,  इसलिए  अपना  वोट  खराब  क्यों  करना  है  ( ये स्थिति  प्रजातंत्र  के लिए  बहुत ही  खराब  है),  यहाँ  पर यह उल्लेखनीय है कि  वोट डालना और वह भी योग्य उम्मीदवार  को,   महत्वपूर्ण  है , यह देखना  कि जीत  रहा  या हार रहा है  यह उल्लेखनीय  नहीं  है  आपका वोट  आपकी दृष्टि  में  जो योग्य  उम्मीदवार   आप सोचते  है,को ही जाना  चाहिए , यही  अधिकार  भारतीय  संविधान  ने आपको  दिया है  । अभ्यर्थी  की योग्यता   का माप दण्ड  करने के लिए  हम सबको,   विवेक, बुद्धि  ईश्वर ने दी  है । यह सर्वविदित  है कि कोई  तंत्र  अच्छे,  विचारशील/विवेकपूर्ण लोगों  से चलता  और मजबूत  होता है  जितने  अच्छे ,  नीति  पूर्ण, ईमानदार   लोग   किसी   व्यवस्था  में,  आयेंगे  उतना  अच्छा  ही    तंत्र  / प्रजातंत्र   मजबूत  होता  चला  जायेगा ,  और जितना  अच्छा  प्रजातंत्र  होगा  उतनी  हमारी  शासन  व्यवस्था  अच्छी  होगी  व राष्ट्र के लिए  व राष्ट्रीयता  के लिए  अच्छा  होगा,  इस पर प्रत्येक  नागरिक को  सोचना  होगा। नागरिक  के रूप  में  हम सब का यह कर्तव्य  भी है।  मेरा  मानना  है  कि  मै  जिस को योग्य  समझता हूँ  उसी  को वोट  दूं चाहे  उसको केवल  मेरा  ही वोट  मिले। यदि  सभी ऐसा  सोचे  तो कुछ  समय  बाद  ये स्थिति  भी आ सकती है ,  कोई  चुनाव  में  व्यय  ही नहीं  करे  और जीतने के लिए  गलत  तरीके / प्रचार    न  अपनाये,    कल्पना   करो तब कितना  अच्छा होगा ।  नागरिक के रूप में हम सब का यह कर्तव्य भी है कि  हम सब सही  सरकार  और सही  लोगों  का चयन  करें । प्रजातंत्र  में  जनता  के द्वारा  ही सरकार  का चुनाव  किया  जाता है  ,  इसलिए  जनता  की महत्वपूर्ण  जिम्मेदारी  भी  है । हम सभी  को केवल  और केवल  उसी  को अपने  मताधिकार  का प्रयोग  अवश्य  करना  चाहिए,  जो जनता के  लिए  समर्पित  हो और साफ सुथरी  छवि  का हो । चरेवेति चरेवेति। 


टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी (Permanent Capital of uttrakhand)

सिद्धसौड बड़मा (रुद्रप्रयाग )शिक्षा का केंद्र (center of education, siddhsour badma)

वृद्धावस्था( old age)