विचारों का महत्व
व्यक्ति के जीवन में विचारों का बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान है, और मै समझता हूँ कि जैसे जैसे आपके विचार होते हैं उसी दिशा में आपकी दशा भी निश्चित होती जाती है , और उसके अनुरूप आप कार्य करते हैं । मनुष्य का जीवन उसके विचारों का प्रतिबिंब है, सफलता-असफलता, उन्नति-अवनति आदि सभी पहलू मनुष्य के विचारों पर निर्भर करते हैं। स्वामी रामतीर्थ ने कहा है " मनुष्य के जैसे विचार होते हैं वैसा ही जीवन बनता" है। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था " स्वर्ग और नरक कहीं अन्यत्र नहीं है इनका निवास हमारे विचारों में ही है" आरम्भ में सभी का जन्म एक जैसा होता है किन्तु अलग अलग परिवारों मे जन्म के बाद उसमें ( बच्चे ) मे विचार रूपी बीज का जन्म होता है और धीरे-धीरे उसका पालन पोषण होता है और वह मजबूत होता जाता है ,उसी के अनुरूप उसका आचरण होता है । विचारों को मजबूती देने के कार्य में उसके साथ किया जाने वाला व्यवहार महत्वपूर्ण होता है। व्यवसाय कोई भी अच्छा या बुरा नहीं होता है उसको करने वाले किस विचार से हैं या किन से प्रभावित होकर कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण है। समाज में सभी प्रकार के व्यवसाय की स्वीकृति है। सबका कार्य करने का तरीका अलग-अलग हो सकता है परन्तु मूलभूत सिद्धांत तो एक ही रहेगा। कठिनाइया ही संसार में गतिशीलता बनाये हुए है। यदि किसी के जीवन में कठिनाई ही नहीं आयेगी तो कैसे परिवर्तन होगा? इन्हीं के कारण मनुष्य को समय-समय पर अपनी कार्य कुशलता का परिचय देने का अवसर प्राप्त होता है। जीवन में बार-बार ठोकरे खाकर ही मनुष्य अनुभवी होता है , और बार बार संघर्ष करने से त्रुटियो में सुधार होकर योग्यता में बृधि हो जाती है और वह अंत में सफ़ल हो ही जाता है। दूसरी बात अच्छे विचारों के निर्माण में अच्छे साहित्य का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है, विशेषकर प्रेरक/ प्रेरणादायी प्रसंग आरम्भिक जीवन में बहुत ही सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं । प्रधानाचार्य के रूप में मैंने यह करके देखा है , छोटे छोटे प्रेरक प्रसंग प्रार्थना स्थल पर बच्चों में प्रभावी रहे। इसलिए हम सभी अपनी आने वाली पीढ़ी मे अच्छे विचारों का प्रवाह कर सकते हैं जिससे परिवार, जो कि सबसे छोटी इकाई है मे परिवर्तन आये, फिर गाँव, फिर ब्लाक, धीरे-धीरे आगे बढ़े , और राष्ट्र तक,,यह केवल सभी के सहयोग से सम्भव हो पायेगा, अपनी परिवार की जिम्मेदारी तो हम ले ही सकते हैं। उसके मुखिया तो हम ही हैं। चरेवेति चरेवेति।
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