संघर्षों से सीखा जा सकता है (You can learn strength from your struggles)
आप /हम सभी पाठकों ने कई प्रकार के व्यक्तियों को देखा होगा या देख रहे हैं जो कुछ बहुत सफल हैं और कुछ सामान्य तो कुछ असफल भी दिखाई देते हैं, और यदि सफल व्यक्ति के जीवन वृत्त पर दृष्टि डालें तो एक बात सामान्य रूप से देखने को मिलती है या दिखाई देती है कि उनमें से प्रायः प्रत्येक का जीवन संघर्षों ने पाला, कठिनाइयों, आपदाओ और मुसीबतों ने संवारा है , उन्ही परेशानीयो ने उनकी आत्म शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए उनको प्रेरित किया है, जबकि साधारण मनुष्यों के लिए वह अचरज जैसे लगता है । किसी का भी उदाहरण ले लीजिये जैसे, राम,कृष्ण, बुद्ध, महावीर, कबीर, नानक ईसा,गांधी, शिवाजी, महाराणा प्रताप और कई महापुरुषों से इतिहास भरा पड़ा है। हो सकता है कि आपके आसपास भी कुछ लोग ऐसे होंगे जो आरम्भिक अवस्था में कठिनाई से जीवन जिया है । ऐसा कोई हो जिसने सुन्दर वैभव,विलास का जीवन जीने के बाद अपना कोई विशेष कार्य किया हो, या अपना कुछ विशेष स्थान बनाया हो।साधारणत व्यक्ति कठिनाइयों व प्रतिकूलता से बचना चाहते हैं इसलिए सफलताऐ भी उनसे दूर होती रहती हैं, ये आप सभी भी महसूस करते होंगे या देखते होंगे, जबकि कुछ विशेष व्यक्ति कुछ विशेष करने की ललक से ही, उनमें हिम्मत, साहस, पुरुषार्थ पैदा हो जाता है जो कि उनको निरन्तर आगे बढने के लिए प्रेरित करता रहता है। दिक्कतें दरअसल किसी पर बोझ नहीं है, अपितु संकेत हैं कि जो आत्म विश्वास को दिशा-निर्देश करती है। इन संकेतों को समझना और उससे लाभ उठाना ही मनुष्य की बुद्धि मानी है,और यदि यह कला मनुष्य में आ जाय तो विपत्ति ही उसको सब कुछ सिखा कर सबसे बड़ हितैषी बन जाती है। बीमारी और , शरीर कष्ट , को सभी बुरा समझते हैं, लेकिन यह भी समझ लें कि प्रकृति आपको असंयम से सावधान कर रही है और आपके शरीर में घुस गये बुरे तत्वों को निकाल रही है तो आपकी घबराहट तत्काल दूर हो जाये। आप रह रहकर बीमार होते हैं, तो देखिये कहीं आपकी आदतें तो खराब नहीं हो रही है, आपने आहार विहार के असंयमित को तो नहीं अपना रखा है, तम्बाकू, सिगरेट, शराब आदि किसी दुर्व्सन के आदि तो नहीं हो गये हैं, किसी मादक पदार्थ ने तो कहीं आप में विकृति ला दिया है, इसको हम सभी को देखना होगा और उसे मिटाने का प्रण करना होगा, तभी यह सार्थक हो पायेगा। जिन लोगों ने आर्थिक तंगी देखी होगी उन्हें इसका अनुभव भी होगा कि,धन की तंगी से, कर्ज से,आजीविका आदि से भी आप घबराहट पैदा होती है, पर आपको पता नहीं होता है यही आपके सौभाग्य का द्वार खोलने आई है, केवल समझने की देर है, आर्थिक तंगी के अवसरों पर देखा जा सकता है कि उस समय व्यक्ति की मानसिक क्रियाशीलता सजग हो जातीं हैं भले वह बेचैनियों या घबराहट के रूप व्यक्ति के दिमाग में हलचल पैदा करती है यही बेचैनी कुछ बढ़ा ,व्यापार, अन्य कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। कई बार परिस्थितियां अपनी नहीं औरों की बनाई हुई भी होती हैं, संसार में फूहड़ और राह चलते रोड़ा अटकाने वालो की भी कमी नहीं होती हैं, अपने 35 सालों के शैक्षिक सेवा के अनुभव से महसूस हुआ कि कई मौकों पर मैने पाया कि आपकी प्रगति को रोकने वाले भी कई मिल जायेंगे, लेकिन सच्चाई और परिश्रम एक ऐसा हथियार है जो हर समय पर आप ,हम सबको मजबूत बनाकर सफलताओं की ओर ले जाता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि संघर्षों से जीवन में निखार आ सकता है। चरैवेति चरैवति।
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