मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)

 


आजकल  पूरे  देश  में  मतदाता  सूची  के विशेष गहन परीक्षण  के निर्देश  चुनाव  आयोग द्वारा   दिये  गये  हैं ,जिसमें  नौ राज्यों  व तीन केन्द्र शासित  प्रदेशों  में  प्ररारम्भिक  रूप से  कार्य आरम्भ  कर दिया  गया है।   इस पर वाद / विवाद उचित नहीं कहा जा सकता है ,  जिससे  कि इस पर   दिन  प्रतिदिन  चर्चा   तेज हो रही है ।  ये बात सही है  कि किसी  भी दशा  में  जो भारत  का नागरिक   है , उसका  नाम मतदाता  सूची  से किसी भी  दशा  में  नहीं  हटना चाहिए  , परन्तु  यह  भी  सही है  कि अवैध  रूप  से रह  रहे  लोगों  का    जो   भारतीय  नागरिक  नहीं है,  का नाम  भी किसी  दशा  में  भी मतदाता  सूची  में  नहीं  रहना चाहिए, इसलिए  चुनाव  आयोग   द्वारा  मतदाता     सूची  को सही  करने के लिए  यह पुनरीक्षण  किया  जा रहा है  ,  प्रत्येक नागरिक  को चुनाव  आयोग द्वारा  कृत इस  कार्य  की  सराहना  की जानी चाहिए,  व समर्थन किया  जाना  चाहिए , चूंकि  चुनाव आयोग  इस देश के नागरिकों  के मताधिकार सुरक्षित  करने  के लिए  एक सर्वोच्च  संस्था  है  जिसे  भारतीय  संविधान  में  अधिकार  प्राप्त है,  और नागरिकों  का भी  कर्तव्य  है कि  चुनाव   आयोग  का भी मनोबल  बना रहे   ऐसा  कार्य  किया  जाना चाहिए ।  प्रजातंत्र  में  यह महत्वपूर्ण  है , सही  मतदाता  सूची  बने  और साफ  सुथरा  व निष्पक्ष  चुनाव  हो तभी  इसकी  महत्ता  है,इसलिए  सभी  भारतीय नागरिक को  सहयोगी  बनना  चाहिये  ।  मेरा मानना है कि  यदि     कोई  संस्था  या व्यक्ति  अपने  पूरे  मनोयोग  से पूरी   पारदर्शिता  के साथ व नियमों  के तहत कार्य  कर रहा है  और उस काम में  किसी स्वार्थ के लिए  वाद विवाद  पैदा  करो,   तो काम करने  वाले  की जो spirit  है वह प्रभावित  होती  है और उसका  नुकसान  अन्ततः संस्था या व्यक्ति   (भारतीय  नागरिकों/ देश )  को ही उठाना  पडेगा   , इसलिए SIR  में  सहयोगी  बनना  अति आवश्यक है  ।  ये आवश्यक है कि  जो भी लोग  मतदाता  गहन पुनरीक्षण  में  लगे  हो उनको पूरी  सुरक्षा  ( आवश्यक  प्रशिक्षण, सामग्री, पर्याप्त समय, व सम्मान जनक मानदेय  दिया  जाना  उचित  ही रहेगा) दी जाय। चुनाव आयोग  को भी इतनी  सहजता से निष्पक्षता  से  आगे  बढ़ना  चाहिए  कि सभी  का उन पर विश्वास  बना रहे । अभी जिस  तरह  से पूरे  देश  में  SIR  को  लेकर  विवाद दिखाई दे रहा है  बहुत  ही सावधानी  से एक  एक कदम   बढ़ना  चाहिए। एक महत्वपूर्ण  बात यह है ।  जिम्मेवार नागरिक  होने के नाते  हमारा  यह नैतिक  दायित्व  बन जाता है कि हम  केवल एक  ही जगह  अपना  नाम मतदाता  सूची में  सम्मिलित करायें   व यदि  कोई  पारिवारिक  सदस्य  अब  जीवित  नहीं  है,   और उसका नाम  मतदाता सूची में  है  तो उसका  नाम  मतदाता  सूची  से कटवाने  हेतु प्रार्थना  पत्र दे,   जिससे कि सही-  सही  मतदाता  सूची  बने सके  ।  यह सभी  नागरिकों  को करना  चाहिए । SIR  को सफल  बनाने  का दायित्व सामूहिकता  से  सभी  पर  है यह तभी  पूरा  होगा  जब  योग्य  मतदाता  इसमें  सम्मिलित  होंगे  और फर्जी  वोटर को बाहर  किया  जा सकेगा। त्रुटिपूर्ण  मतदाता  सूची से  मतदान  के समय भी परेशानी  या अव्यवस्था  होती  है।  इसलिए  आप/हम सभी को  SIR   का सहयोग  करना चाहिए। एक महत्वपूर्ण  बात यह है कि  उत्तराखंड  के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन  सबसे अधिक  हो रहा  है, स्वाभाविक  है कि उनका नाम वोटर लिस्ट  में  नाम  आवास वाले ंस्थानों  मे होगा  जिसका प्रभाव  आने  वाले चुनावों  के   परिसीमन   में  होगा, इसमें  दो महत्वपूर्ण    विषयों    को  ध्यान  में  रखना  होगा  कि एक तो क्षेत्रफल के आधार  पर परिसीमन  हो  जिसे कि  सरकार  के  स्तर  पर   निर्णय  लेने की  अपेक्षा  रहेगी    और दूसरा  यह कि पर्वतीय  क्षेत्रों  के वे लोग़  जो  रोजगार  या अन्य  किसी  कारणों  से  दूसरे  क्षेत्रों  मे रह रहे  हैं  वे अपना  नाम  मतदाता  सूची  में  अपने  मूलनिवास वाले  स्थान  पर ही सम्मिलित  करे  तो शायद  परिसीमन  में भी  लाभ होगा  ऐसा  मेरा  मानना है  और सरकार  से  भी  इस सम्बंध में  निर्णय  की अपेक्षा  रहेगी   ,  इस प्रकार  SIR  का लाभ  होगा।  चरैवेति चरैवेति। 


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