शिक्षा का राष्ट्रीयकरण कई समस्याओं का समाधान (Nationalization of Education , is solution of various problem)

     


 वर्तमान  में  शिक्षा  देने  की असमान व्यवस्था के  कारण  कई समस्याएं  पैदा हो रही है।  आज हम कई जगह  यह सुनते  हैं  कि , सामान्य  या  मजदूर  वर्ग  या कम आर्थिक  स्थिति  वाले  लोगों के बच्चे    किसी  दूसरे  स्कूल  में   व जिनकी  आर्थिक  स्थिति  बहुत अच्छी  है उनके  बच्चे  महंगे  स्कूलों  मे पढ  रहे हैं ,( पर्वतीय क्षेत्रों  को छोड़कर, क्योंकि  यहाँ  पर एक ही  प्रकार  के स्कूल अधिकतर पाये जाते हैं)   यह  एक आम बात है ।  आप/हम  इतिहास की  किताबों  को पढते हैं  तो  पाते हैं , कि  सबसे  पहले शिक्षा देने  के लिए  गुरु कुल ही  हुआ करते थे, महाभारत  के समय में  भी सभी  ने गुरु  कुल मे रहकर  शिक्षा  पायी  यह  सही  भी है,कि शिक्षा  देने  मे  ही जब भेद भाव नहीं  होगा  तो निश्चित  ही आगे चलकर  जब वे  किसी व्यवसायिक  जीवन में जायेंगे  तो एक रूपता  से कार्य  कर पायेंगे,   मेरा आशय  है कि एक ही आचरण तौर तरीके  उनमे   समाहित  होंगे,  शायद  हमारे  पूर्वजों की भी यही  मनसा  रही  होगी,  एक  ही जगह  राजा  या रंक  शिक्षा  पाये (सभी  के बच्चो   को  एक  जैसी  शिक्षा मिले), कितनी  महान विचारधारा  थी,   इसलिए   समाज  में  संघर्ष  बहुत ही न्यून  था या था ही नहीं  । जब शिक्षा  सभी  की  एक जैसी  होगी  तो सम्भवतया तब किसी को  आरक्षण  की भी आवश्यकता  नहीं  होगी  ऐसा मेरा  मानना है  ।  शिक्षा  किसी  भी देश के विकास की नींव होती है। एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सबकी पहुंच होनी  बहुत जरूरी है। इसी दिशा में शिक्षा का राष्ट्रीयकरण एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। मेरा  मानना है कि  कम से कम शिक्षा, सुरक्षा/रक्षा   एवं  स्वास्थ्य   इन तीनों  पर तो केवल  और केवल  सरकार  का ही नियंत्रण  होना चाहिए  और  केवल  उनकी  देखरेख  में  ही दी जानी उचित होगी,    अर्थात  इनका राष्ट्रीय करण  होना चाहिए, जबकि अभी  केवल  सुरक्षा/रक्षा   ही सरकार की ही  पूरे  नियंत्रण में  है, शिक्षा  और स्वास्थ्य  मे कई लोग,  गैर सरकारी  संगठन   अपना  कारोबार  व सुविधाएं  दे रहे हैं,  यद्यपि  यह कठिन  कार्य  भी  है  लेकिन  यदि  दृढ़  इच्छा शक्ति  हो तो  कई प्रतिष्ठित  अस्पताल  व स्कूल  भी  स्वयं  सरकार  चला  रही है ,और भी बढायी  जा सकती है यह देखा  जा सकता है।  शिक्षा का राष्ट्रीयकरण क्या है  ? शिक्षा का राष्ट्रीयकरण का अर्थ है शिक्षा प्रणाली को सरकारी नियंत्रण में लाना और इसे एक समान, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाना। इसका उद्देश्य शिक्षा को एक व्यवसाय से निकालकर एक सामाजिक सेवा बनाना है। यदि  सरकार  ऐसा कर सकती है,   तो देश के  प्रजातंत्र  मूल्यों  में  जबरदस्त  इजाफा  होगा। जो अलग  प्रकार के  स्कूलों  में  पढने  से  समभाव  का हनन हो रहा है, समाज  मे  दरार  बढ रही है   एक  रूपता  शिक्षा  से  सदभाव  सुदृढ़  होगा, ऐसा  मेरा  मानना है। शिक्षा के राष्ट्रीयकरण से कई  लाभ  होगे  जैसे सभी  को समानता  मिलेगी, सभी  को   सुलभता  मिलेगी, शिक्षा  सभी  को  एक जैसे  स्कूल में  मिलेगी, इसके  साथ सरकारी  नियंत्रण  से सबको  एक जैसी  गुणवत्ता  वाली  शिक्षा  मिलेगी, समान अवसर सभी  को  आगे  बढने के लिए  मिलेंगे, संसाधन भी सभी  स्कूलों में  समान  होंगे। किसी भी बच्चे  में कोई  हीन भावना  नहीं  होगी, और यह सबसे बड़ी बात है। शिक्षा का राष्ट्रीयकरण होने से शिक्षा का व्यावसायीकरण रुकेगा और शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान और कौशल विकास होगा, न कि मुनाफाखोरी,  और  एक समान शिक्षा प्रणाली राष्ट्रीय एकता और समरसता को बढ़ावा देगी।यद्यपि  राष्ट्रीय करण करने  में  काफी  मुश्किल भी  हैं ,  लेकिन  सरकार यदि  चाहे  तो धीरे-धीरे  इस ओर कदम  बढ़ा  सकती है  और   मेरे  विचार  से यह बहुत ही  सराहनीय  पहल भी   होगी, चूंकि शिक्षा  राज्य  व केंद्र  दोनों का विषय  है इस पर राज्यों व केंद्र  सरकार का सोचना,   उचित  कदम  हो सकता है। शिक्षा का राष्ट्रीयकरण एक महंगा प्रस्ताव  तो अवश्य  है,  किन्तु  है  अच्छा  । सरकार को इसके लिए पर्याप्त बजट आवंटित करना होगा। सरकारी तंत्र की कार्यक्षमता और भ्रष्टाचार मुक्त होना आवश्यक है।शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।  शिक्षा के राष्ट्रीयकरण में राजनीतिक हस्तक्षेप से  बचना  होगा। देश में पहले से ही सरकारी और निजी विद्यालयों का मिश्रण है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009    6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है। शिक्षा का राष्ट्रीयकरण एक जटिल और बहुस्तरीय मुद्दा है। इसके लिए व्यापक चर्चा, योजना और समन्वय की आवश्यकता है। सरकार, शिक्षाविद, समाज और नागरिकों को मिलकर एक ऐसी शिक्षा प्रणाली बनाने के लिए काम करना होगा जो समावेशी, गुणवत्तापूर्ण और भविष्योन्मुख हो। निश्चित ही  यदि  इस पर विचार  कर धीरे धीरे  इस दिशा  में  बढ़ा जाय तो मै समझता हूँ कि  कि प्रजातंत्र  के लिए  व  प्रजातंत्र  युक्त  सरकार के लिए  बहुत ही सार्थक   होगा, ऐसा  मेरा मानना है ,कि  शिक्षा का  राष्ट्रीयकरण  / राष्ट्रीय  हित  के लिये  भी  सर्वोच्च  होगा ।  चरैवेति चरैवेति। 

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