मानव एवं वन्यजीव संघर्ष एक चुनौती /समाधान
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से आजकल हरेक के दिलों को परेशान करने वाली घटना आये दिन अखबारों एव शोशल मीडिया पर सुनने,पढने और देखने को मिल यही है कि अमुक जगह बाघ /रीछ ने बच्चे/ महिला को घायल कर दिया है, यह है मानव एवं वन्य जीव संघर्ष जो कि बहुत ही खतरनाक हो रहा है , मानव एवं वन्य जीव संघर्ष एक ऐसी स्थिति है जहां मानव और वन्य जीवों के बीच संघर्ष होता है, जिससे दोनों पक्षों को नुकसान होता है। यह संघर्ष तब होता है जब मानव और वन्य जीव एक ही क्षेत्र में रहते हैं और उनके हितों में टकराव होता है। अनुभव यह कहता है कि अभी तक गावों में बहुत आवादी थी जिसके कारण गाव के आस-पास साफ सुथरा था,कोई जंगल नहीं था, जिसमें की जंगली जानवर छिप सकते है लेकिन अब गाँव के आस-पास ही जंगल इसलिये हो गया है कि आवादी न कै बराबर होने से गाय भैस के लिए चारा पती नहीं काटी जा रही है, और अब उस नजदीकी जंगल जिसमें आसानी से जंगली जानवर रह रहे हैं, गाँव में आवादी बहुत कम है, जिससे जंगली जानवरों को आसानी हो गयी, पेड़ को इसलिए काट नहीं पा रहे हैं कि वन विभाग उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न कर दे । अब प्रश्न यह उठता है कि क्या केवल पलायन और गाँव के नजदीक जंगल तैयार होने से ही मानव और वन्य जीवों के बीच संघर्ष हो रहा है ? ये भी एक कारण है पर अन्य कारणों से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। अन्य कारणों में बुनियादी सुविधाओं के विकास से जंगलों के बीच से रोड बनने से, जंगली जानवरों का आवासों पर प्रभाव पड़ता है, जंगलों में भोजन की कमी से भी जानवर गाँव की तरफ आ जाते हैं, जगल के बीच आसमान में हेलीकाप्टर की आवत जावत अधिक हो रही है जिससे उसकी आवाज़ को सुनकर वे अपने उन आवासों को छोड़कर दूसरे स्थान पर जा सकते हैं । विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों के जंगलों पर इसका बहुत ही बुरा असर पड रहा होगा , ऐसा मेरा मानना है। जलवायु परिवर्तन भी कारण हो सकता है , ऐसा भी अनुमान लगाया जा सकता है कि अन्य जगह से जंगली जानवरों को यहाँ छोडा जा रहा है , और भी अन्य कारण हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह स्थिति ठीक नहीं कही जा सकती है। मानव और वन्य जीवों के संघर्ष का प्रभाव क्या है ? सबसे बड़ा नुकसान यह है कि कहीं - कहीं पर मानव की मृत्यु हो जा रही, और परिणाम उस जानवर का भी नुकसान हो रहा है, दोनों के लिए यह स्थिति खतरनाक ही कही जा सकती है। दोनों के संघर्ष से डर का वातावरण पैदा हो रहा है ,आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। कई दिनों उस क्षेत्र में स्कूलों /कार्यालय को बन्द करना पड़ता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। अब मानव एवं वन्य जीव संघर्ष के समाधान क्या हो सकते हैं । मानव एवं वन्य जीव संघर्ष एक बढ़ती हुई चुनौती है, जिसका समाधान करने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। वन्य जीव संरक्षण, आवास संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी, शिक्षा और जागरूकता, और कानून और नीतियों के माध्यम से हम इस संघर्ष को कम कर सकते हैं। सरकार से भी अनुरोध रहेगा कि वन विभाग को इस दिशा में सक्रिय होकर कोई ठोस नीति बनायी जानी उचित होगी। एक विशेष अनुरोध यह भी रहेगा कि गाँव वालों को अपने घरो के आस-पास के पेड़ो जो कि जानवरों के छिपने का स्थान हो सकते हैं, काटने की अनुमति दी सकती है और दी जानी उचित होगी । यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषय है। सभी को इस पर चिन्तन करना होगा, विशेषकर सरकार के अवयवों को इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । चरैवेति चरैवति।

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