आत्म गौरव (Self Pride)
यदि कोई भी मनुष्य ज्ञान के साथ अपने जीवन की व्यावसायिकता का तालमेल बैठा ले,तो हम असली मनुष्य में परिणित हो सकते हैं। आपके जीवन का लक्ष्य कितना भी ऊचा क्यों न हो,आपको अपने परिवार के किसी भी सदस्य के विचारों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, और यदि आप सार्वजानिक जीवन में हैं तो अपने सहयोगीयो की भी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। परिवार हो या संस्था या जहाँ आप काम कर रहे हैं , बहुत ही दोस्ताना और सकारात्मक ढ़ंग से किसी भी कार्य को बेहतरीन बनाने की कोशिश करनी चाहिए । ये याद रहना चाहिए कि हम न कोई गुरु है और न तुम गुरु हो, हम सभी एक विद्यार्थी हैं और हर को इस रूप में कुछ न कुछ सीखते रहना उचित ही होगा, और सीखने का मौका भी मिलता ही है । स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा था "ज्ञान मनुष्य में अन्तर्निहित ही है,कोई भी ज्ञान बाहर से नहीं आता, सब अन्दर ही है। "" हम कहते हैं, न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण का आविष्कार किया, तो क्या वह आविष्कार कहीं एक कोने में बैठकर न्यूटन की प्रतीक्षा कर रहा था ?नहीं, वह उसके मन में ही था, जब समय आया तो उसने ढूड निकाला। संसार ने जो कुछ ज्ञान लाभ किया है वह मन से ही निकाला है।विश्व का असीम पुस्तकालय तुम्हारे मन मे ही विद्यमान है।वाह्य जगत तो तुम्हें अपने मन को अध्ययन में लगाने के लिए उद्दीपक तथा सहायक मात्र है,परन्तु प्रत्येक समय तुम्हारे अध्ययन का विषय तुम्हारा मन ही है।"हम कई प्रकार की पुस्तको का अध्ययन और पठन पाठन करते हैं और उसमें से वर्णित नव अभिनव विचारों को आत्मसात करने की कोशिश करते हैं, इसलिए हमें हमेशा लोगों से उसी भाषा में बात करनी चाहिए जिसे वे आसानी से समझ सकते हो, कठिन से कठिन शब्दों का बहुत अधिक उपयोग करके नवयुवकों के मन में कोई बोझिल संदेश देने की आवश्यकता नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने पर भरोसा करे,जिससे आपका आत्म गौरव बढे, आत्म गौरव एक ऐसी भावना है जो व्यक्ति को अपने आप में गर्व और सम्मान की अनुभूति कराती है। यह आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक है, जो व्यक्ति को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। इसके बहुत सारे अवयव होते हैं जैसे ,आत्मसम्मान ,अपने आप को सम्मान देना और अपने मूल्य को समझना। आत्मविश्वास, अपने आप पर विश्वास करना और अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना। स्वाभिमान, अपने आप को गर्व से देखना और अपने आत्म-मूल्य को बनाए रखना।स्वतंत्रता, अपने निर्णय लेने और अपने जीवन को अपने तरीके से जीना , कोई भी व्यक्ति अपना आत्म गौरव कैसे विकसित कर सकता है ? स्वयं को स्वीकार करें अपने आप को स्वीकार करें और अपनी ताकत और कमजोरियों को समझें। सकारात्मक आत्म-वार्ता,सकारात्मक आत्म-वार्ता का अभ्यास करें और अपने आप को प्रोत्साहित करें। लक्ष्य निर्धारित , अपने लक्ष्यों को निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त करने के लिए काम करें। आत्म-देखभाल, आत्म-देखभाल का अभ्यास करें और अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।, सीखने की इच्छा रखें और नए कौशल और ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रयास करें।आत्म गौरव एक महत्वपूर्ण गुण है जो व्यक्ति को अपने जीवन में सफलता और संतुष्टि प्राप्त करने में मदद करता है। आत्म गौरव विकसित करने से व्यक्ति आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और स्वस्थ संबंधों का आनंद ले सकता है। मनुष्य जीवन में हर व्यक्ति से और प्रकृति से कुछ न कुछ सीखता ही है। चरैवेति चरैवेति।
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