प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नों को Drop करना(Q. Dropped in Ex.)

   


   भारत  जैसे  विकासशील  और  बहुत  बड़ी  आबादी   वाले  देश  में   जहाँ  किसी  भी प्रतियोगिता  परीक्षा  में  हजारो- लाखों  परीक्षार्थी    हिस्सा  लेते हैं। यह   महत्वपूर्ण  है जब चयन परीक्षा  मे विकल्प  वाले उत्तर   पेपर में  दिये गए  हो तो   एक एक अंक  महत्वपूर्ण  हो जाता है  ।  आजकल अधिसंख्यक  चयन परीक्षा  में  पहले  प्रारम्भिक  परीक्षा  हो रही है  फिर  मुख्य  परीक्षा,  किसी  - किसी  में  तो एक ही  परीक्षा  हो रही है  और चयन कर दिया  जा रहा है । चयन के लिए  कोई   भी आयोग  या प्रतियोगी  परीक्षा आयोजित  करने  वाली  संस्था  प्रारम्भिक  परीक्षा  करवा  रही है , और फिर  परीक्षा के बाद  परिणाम  के समय  कुछ  प्रश्नों को drop  कर दिया  जा रहा है  , जो कि कतई  उचित  नहीं  कहा जा सकता है (मेरे विचार से) ,क्योंकि  ये  सभी प्रश्न  हर  परीक्षार्थियों  के लिए  बहुत  ही महत्वपूर्ण  इसलिये होते  है ,  क्योंकि  इसके आधार पर  किसी  भी परीक्षार्थी  के  चयन  की मैरिट  तैयार  होती है और व्यवसायिक  सेवा में  जाने  वाली  किसी  भी प्रतियोगिता  की परीक्षा  में  point  0.1,0.02 --'---0.009 आदि  का भी  बहुत महत्व  होता है,  और   कदाचित जो   परीक्षार्थी  0.001,   0.1,0.2,- -----  4, 5  6  etc  अंक से  सफल होने  से रह जाता हो,  जबकि  ये प्रश्न( Drop Question) उनके  सही  रहे  हो  या इतने  सही थे कि वे  qualify कर देते,  तो परीक्षार्थी  का कितना  नुकसान  हुआ ?   और कभी-कभी  तो   तो   5  से    7   प्रश्नों   तक को ही drop  कर दिया  जा रहा    है । कल्पना करो  या वास्तव  में  जो छात्र  1 से 7  अंक से रह गया  और यदि  ये प्रश्न drop न होते और उन छात्रों  के सही  रहे  होंगे  , तो उनके  साथ  तो अन्याय  ही  हुआ  न  । ऐसा  नहीं  है कि यह एक ही परीक्षा में  हो रहा लगभग  सभी  चयन  परीक्षाओं मे देखा  जा रहा है,  जिनमे  पहले  बहु-विकल्प परीक्षा  होती हैं , फिर   आप जिसके उत्तर  विकल्पों  से  आप संतुष्ट  न हो ,उत्तर  साक्ष्य  सहित  उपलब्ध  कराओ फिर  उन प्रश्नों  को drop  कर दो यह प्रक्रिया  लगभग   सभी   प्रतियोगी   परीक्षा  में  देखी जा रही है, इसे कोई  भी  और परीक्षार्थियों  के लिए  बहुत  अच्छी प्रकिया  नहीं  कही जा सकती है। किसी  भी परीक्षा  लेने  वाली  संस्था/विशेषज्ञों  को ऐसे  संदेहास्पद  प्रश्नों  व उत्तरो को परीक्षा  में  देना  ही नहीं  चाहिए, जिससे  कि उनको  बाद में  हटाना  पढ़े। पेपर set करते  समय  इस बात की सावधानियां  रखनी  चाहिए। अब दूसरी  बात  कदाचित  ऐसा  हो ही  गया  या  टंकण   की  त्रुटि  से    ग़लत  हो गया  है   कि  उत्तर  का वह विकल्प  गलत है  , तो उस प्रश्न  का कोई  न कोई  विकल्प अवश्य   रहा  होगा   विकल्प  को ठीक  कर ,  उसको  ठीक  कर दिया  जाय और  परीक्षा फल घोषित  किया जाना चाहिए   ,drop का तो को  कोई मतलब   नहीं  होता है,   और यदि   मतलब  होता भी है तो  यही , कि प्रश्न  ही गलत  set  किया गया है, जिसका  उत्तर  दिये  गये  विकल्पों  में  ही नहीं  था  या विवादित  था,  जिसे कि किसी  भी दशा  में  उचित  नहीं  कहा जा सकता है।यहाँ  तक कि कभी-कभी  परीक्षार्थियों  के  द्वारा  माननीय  न्यायालयों  मे  भी वाद दायर  किये   जा रहे है। भविष्य  के लिए  किसी  भी परीक्षा  आयोजित  संस्था को  इस पर सोचने की आवश्यकता है,  कोई  भी छात्र  सालों  साल तक तैयारी  करता है  उसको satisfy  होना भी  अति  आवश्यक  है कि मेरे  साथ न्याय  हुआ है,  यही  न्याय का सिद्धांत  भी कहता है। मै किसी  की भी  परीक्षा  प्रकिया या चयन  पर  कोई  सवाल  नहीं  खड़ा  कर रहा हूँ,  केवल  भविष्य के लिए  यह  सुझाव  दे रहा हूँ कि  इस व्यवस्था  में  सुधार  होना ही चाहिए। विषय विशेषज्ञों  का चयन सावधानी के साथ कुशल निर्माताओं का ही चयन किया  जाना उचित होगा,  जिससे Question  Drop।  वाली  स्थिति  न बने,  ऐसा  करने से परीक्षा  की विश्वसनीयता भी  बनी  रहेगी, परीक्षा  में  बैठने वाले छात्रों  को भी न्याय  के साथ  साथ   छात्र  स्वयं  से भी और संस्था  से भी संतुष्ट रहेंगे ।  चरैवेति चरैवेति ।


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