पारदर्शिता (Transparency)
एक शब्द है पारदर्शिता , अक्सर कई लोगों को इस शब्द का यदा कदा कई मौकों पर प्रयोग करते हुए सुना जा सकता है और इसकी किसी भी परिवार, संगठन, संस्था या सरकार के अंगो में कितनी उपयोगिता है हम सभी अपने अनुभवों से व कार्य करने से समझ सकते हैं। ये अलग बात कि हम कई मौकों पर यह सब जानते हुए भी अमुक संस्था के द्वारा पारदर्शिता से कार्य नहीं किया जा रहा है उसके के बाद भी सिर्फ इसलिए चुप रहते हैं कि हम भी उसी संस्था के अंग है या हम भी उसमें संलिप्त हैं इसलिए कुछ नहीं कहते हैं , जो कि किसी भी दशा में उचित नहीं कहा जा सकता है। पारदर्शिता एक ऐसी अवधारणा है जिसमें किसी संगठन, संस्था या व्यक्ति के कार्यों और निर्णयों में खुलेपन और स्पष्टता होती है। इसका अर्थ है कि सभी जानकारी और गतिविधियों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना और उन्हें समझने योग्य बनाना होता है चाहे वह परिवार मे हो या किसी संस्था या सरकार में हो , जब कभी ऐसा महसूस होता है कि अमुक कार्य पारदर्शिता से नहीं हो रहा है तो उस संस्था के प्रबन्धन के विरूद्ध असंतोष उत्पन्न होता है और यह किसी के लिए भी अच्छी स्थिति नहीं कही जा सकती है , यह तब भयावह हो जाती है जब स्थिति यह पढे लिखे बर्ग के साथ हो, क्योंकि पढ़ लिखा तबका तर्कपूर्ण ढंग से समझता भी है और समझा भी सकता है। पारदर्शिता के मुख्य तत्वो को हम अपने अनुभवों के आधार पर यह समझ सकते हैं कि सभी को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करायी जाती रहनी चाहिए, उसमें कोई भ्रम न हो ,छिपाव न हो और सभी उसको आसानी से समझ भी सकें । किसी को उसमें जबाबदेही भी लेनी आवश्यक होती है। रेलगाड़ी में अधिक महत्व इंजन का होगा या डिब्बों का, निस्संदेह इंजन का स्थान महत्वपूर्ण है , उसे अति सावधानी के साथ कुशल निर्माताओं ,समुन्नत प्रतिभाओं द्वारा बनाया जाता है, कारण कि पूरी रेलगाड़ी का वजन खीचने और अभीष्ट गति से चलाने के लिए पूरी जिम्मेदारी उसी( इंजन) की होती है। यदि किसी कारणवश इंजन गडबडाने लगे तो समझना चाहिए कि रेलगाड़ी का नियत लक्ष्य तथा नियत समय पर पहुँच पाना कठिन होगा । इसके विपरीत कमजोर डिब्बों को भी बलिष्ठ इंजन अपने बलबूते पर खींच ही लेता है ठीक यही प्रक्रिया/उदाहरण प्राय सभी सामूहिक कार्यो पर लागू होती है । इसलिए पारदर्शिता व सभी की भावना को ध्यान में रखकर सभी कार्य होने चाहिए, इससे सभी का भरोसा भी बढ़ता है , साथ में जवाब देही तो बढती ही है ,भष्ट्राचार भी कम होता है या होता ही नहीं है। निर्णय लेने में सुधार होता है और बेहतर निर्णय लिए जाते हैं। इसलिए हम सभी को अपने अपने कामों को अपने स्तर से पारदर्शी तरीकों से अपनाना भी चाहिए और सिखाना भी चाहिए। चरैवेति चरैवेति।
बहुत सुंदर लेख है
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