संदेश

सितंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पारदर्शिता (Transparency)

चित्र
           एक  शब्द  है  पारदर्शिता  , अक्सर  कई लोगों  को इस शब्द  का यदा  कदा  कई मौकों  पर प्रयोग  करते हुए   सुना  जा सकता है  और  इसकी  किसी  भी  परिवार,  संगठन, संस्था या  सरकार  के अंगो   में  कितनी  उपयोगिता  है हम सभी  अपने  अनुभवों से व कार्य  करने  से  समझ  सकते हैं।    ये अलग बात  कि हम  कई मौकों  पर यह सब जानते  हुए भी अमुक  संस्था  के  द्वारा   पारदर्शिता  से कार्य  नहीं  किया जा रहा है  उसके   के बाद भी सिर्फ  इसलिए  चुप रहते हैं  कि हम भी उसी  संस्था  के अंग  है  या  हम भी उसमें  संलिप्त  हैं  इसलिए   कुछ नहीं  कहते हैं ,  जो कि किसी  भी  दशा में  उचित  नहीं  कहा  जा सकता है। पारदर्शिता  ...

उत्तराखंड में आपदा (Disaster in Uttrakhand)

चित्र
                  वैसे तो  आपदा कही पर  व किसी  भी समय  और  कैसी भी आ सकती है  परन्तु  आपदा  के बारे  में  यह कहा जा सकता है, कि आपदा एक ऐसी स्थिति है जो अचानक या अप्रत्याशित रूप से उत्पन्न होती है और जिसमें बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि होने की संभावना होती है। आपदाएं प्राकृतिक या मानव-निर्मित हो सकती हैं। मोटे  तौर पर  भूकम्प, बाढ,चक्रवात, सूखा, बादल फटना, औद्योगिक  दुर्घटना, परिवहन  दुर्घटना, आतंकवादी  घटनाये  आदि  होती रहती  हैं। उत्तराखंड में  विगत कुछ  समय  से बादल फटने  की अप्रत्याशित  घटनाओं  मे  बृधि   हो रही है,  चाहे वह उत्तरकाशी  मे धराली  की घटना हो,चमोली  में  थराली  व नन्दा नगर  की घटना हो और चाहे  वह देहरादून  के सहस्त्रधारा  की घटना के साथ  साथ  राज्य  के अन्य  हिस्सों में  भी हो , और हिमाचल  व अन्य  राज्यों...

धार्मिक साहित्य (Religious Literature सामान्य-11)

चित्र
          जीवन के सर्वागीण  विकास  में  सहायक  समस्त  साधनों  का सामूहिक  नाम धर्म  था,यह एक  जीवन प्रणाली  थी,जिसके  द्वारा  मानव जीवन नियंत्रित  एवं  संचालित  होता था। धर्म के  इस सर्व व्यापी  महत्व  के कारण  प्रचुर मात्रा में  विभिन्न धार्मिक ग्रन्थ  लिखे  गये। इन धार्मिक ग्रन्थों  में  धार्मिक  इतिहास  के साथ-साथ  राजनितिक, सामाजिक, आर्थिक  एवं  सास्कृतिक  पहलुओं  की भी झलक मिलती है।प्राचीन काल में  भारत में  ब्राहमण, बौद्ध, एवं जैन इन तीन  धर्मो की प्रधानता थी,अतः  इनके  धर्म  ग्रन्थ  भी अपनी अपनी  विशेषताओं  के साथ  तीन  वर्गो  में  विभक्त है । 1-ब्राह्मण  धर्म ग्रन्थ, 2-बौद्ध  धर्म ग्रन्थ 3-जैन धर्म ग्रन्थ। ब्राह्मण धर्म ग्रन्थों में  वेद का स्थान  सर्वोपरि  था। वेद का शाब्दिक अर्थ है ज्ञान। आर्य  जाति का...

ज्योतिष (Astrology)-2

चित्र
      यदि  आप  किसी  की  या स्वयं  की जन्म पत्रिका   देख  रहे हैं  तो आपको  ये सामान्य   जानकारी  होनी  आवश्यक है।   इसमें  12 खाने  बने होते हैं  जिसे कि हम 12 भाव कहते  हैं  और यह प्रथम  भाव से 12 भाव ( first  house  to 12 house) के नाम से जानते हैं।  इसमें  एक महत्वपूर्ण  बात  यह है कि   प्रत्येक कुंडली  के लिए   भाव सब एक से ही रहते हैं,  उसमें  बैठे ग्रह  अलग-अलग  हो सकते हैं  परन्तु   भाव का क्रम  सबके  लिए  एक जैसा निशित  है। उदाहरण के लिए  प्रथम  भाव  को सभी  के लिए  लग्न  ही कहा जाता है।  प्रथम  भाव  में  कौन  सा अंक है 1 से 12  अंक  में  से, उदाहरण के लिए प्रथम भाव में   1 है तो हुआ  मेष लग्न  5 का अंक  है तो सिंह  लग्न  और ,12 का अक  है ...

शिक्षक दिवस (Teachers day)

चित्र
    पूरे देश में  हर साल 5 सितम्बर  को  शिक्षक  दिवस  के रूप में  मनाया जाता है  इस दिन पर  हम सबको  उन महान  शिक्षकों  को याद करने का  दिन है,जिनके  बदौलत हम सब अपने जीवन में  सफल हुए और समाज  के लिए  उपयोगी  बन सके । इस दिवस  पर  डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान भारतीय दार्शनिक, शिक्षाविद और राजनेता थे को भी याद करने का दिन है ,  डा सर्वपल्ली  राधाकृष्णन  का  जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तनी ग्राम में हुआ था। वह भारत के दूसरे राष्ट्रपति और पहले उपराष्ट्रपति रहे। उनके जन्मदिन को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है, उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और बाद में मद्रास प्रेसिडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए, वह मैसूर महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक भी रहे और बाद में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में कार्य किया।उन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किए ...

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical सामान्य-10)

चित्र
       आज का ब्लॉग  विशेषकर  उन लोगों  या  छात्रों   के लिए  लाभदायक होगा  जो किसी  प्रतियोगी  परीक्षा में  बैठ  रहे हैं,  या उनका   परीक्षा  की तैयारी    करने  का मन  है,  आशा  करता हूँ  कि आपको  अच्छा  लगेगा  ।  भारत में  ब्रिटिश  1600 ई0 में  ईस्ट इंडिया कंपनी  के रूप में, व्यापार  करने  के लिए  आये थे। महारानी  एलिज़ाबेथ  प्रथम  के चार्टर  द्वारा  उन्हें  भारत में  व्यापार  करने  के लिए  विस्तृत  अधिकार  दिये गये थे। कंपनी  जिसके  कार्य  अभी तक सिर्फ  व्यापार  के कार्यों तक ही सीमित  था, ने 1765  ई में  बंगाल, बिहार  और  उड़ीसा  के दीवानी अधिकार  भी प्राप्त कर लिए। इसके  तहत  भारत में  उसके  क्षेत्रीय  शक्ति  बनने की  प्रक्रिया  आरम्भ...