गौ वंश ( Govansh)
दिनांक 25 जून 2025 गो धाम थानों देहरादून को देखने का अवसर मिला, कई अन्य परिवार भी वहाँ आये हुए थे । यहां पर लगभग 100 गायें और उन में कुछ गायो के बछड़े भी थे । इस क्षेत्र में इसको गो धाम के नाम से जानते हैं। इसका संचालन/प्रबंधन परम आदरणीय श्री गोपाल मणि जी के द्वारा किया जा रहा है, जिसे कि बहुत ही प्रशंसनीय कार्य कहा जा सकता है , आज के भौतिक वादी युग में जब मानव केवल अपने तक ही सीमित है और केवल स्व की बात सोचता है आदरणीय श्री गोपाल मणि जी बहुत ही पुनीत कार्य कर रहे हैं, ऐसे में निश्चित ही सरकार को उनकी सहायता करनी चाहिए और सक्षम लोगों को भी ऐसे कार्य में यथा सम्भव मदद् करनी उचित ही रहेगी। अपने लिए तो सभी करते हैं , निस्वार्थ भाव से भी यदि कुछ सहयोग किया जाय तो इसे उचित ही कहा जा सकता है। विशेषकर सरकार को गौ संरक्षण पर अच्छी नीतियों को बढ़ावा देना चाहिए व ऐसे लोगों को पुरस्कृत किया जाना चाहिए विशेषकर कर जो गाय की सेवा में लगे हैं । उन लोगों को भी विशेषकर इस बात पर ध्यान देना चाहिए, कि दूध देने तक तो गाय माता का ध्यान रखते और दूध निकालते हैं और बाद में जब वह असमर्थ होती है तो उनको जंगल या बाजार में छोड़ देते हैं जिसे किसी भी दशा में उचित नहीं कहा जा सकता है। निश्चित ही इस दिशा में सरकार को कानून बनाना चाहिए। मेरे द्वारा दया पर एक ब्लॉग पूर्व में लिखा गया है, जिसमें दया कैसे पैदा होती है, अब आप खुद अनुमान या अनुभव करते होंगे कि जब कोई परिवार दूध न देने की स्थिति में गाय को अवारा, जंगल या बाजार में छोड़ते हैं, तो उस परिवार के छोटे बच्चों जो कि यह सब देखते होंगे, जिनमें कि तत्समय नये नये गुणों का विकास हो रहा है क्या विकास होगा ये आप खुद आकलन कर सकते हैं । मेरा तो सिर्फ ये कहना है कि दया तभी विकसित होगी जब हम स्वयं ये अपने में विकसित करें और आने वाली पीढ़ी को भी अपने आचरणों से सिखाये। मेरा जन्म तो बहुत ही दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है और गाँव में लोग दूध के लिए सभी गाये भी रखते थे । लेकिन मेरी जानकारी में अपने गाँव या निकटस्थ गाँव में तत्समय कोई इस प्रकार की घटना नहीं होती थी जब लोग अपने गाय को बाहर जंगल में अवारा छोड़ते थे। लेकिन अब इस प्रकार की कई घटनाएं देखने को मिल जाती है जिसे किसी भी दशा में उचित व न्याय पूर्ण नहीं कहा जा सकता है। इस पर सभी लोगों को व सरकार को सोचना होगा तभी इसके सार्थक परिणाम मिल सकते हैं। इस पर कई गैर-सरकारी संगठन कार्य भी कर रहे हैं आगे भी कार्य करते रहना चाहिए । चरैवेति चरैवेति।
बहुत सुंदर विचार, वृद्ध गाय और आवारा सांडों के कारण सड़कों पर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है, सरकार और सामाजिक संगठनों को इस समस्या के समाधान के लिए महत्वपूर्ण पहल करने की जरूरत है।
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