मानसिक मजबूती (Mental strength)
किसी भी काम करने में सफलता का आधार शक्ति को माना जा सकता है, शक्ति और साहस एक वस्तु के दो पहलू हैं। किसी भी कार्य को करने में इन दो (शक्ति व साहस) की आवश्यकता होती है इनके बिना आप किसी भी कार्य को नहीं कर सकते हैं। निशक्त ( कमजोर मनोबल) मनुष्य कुछ भी नहीं कर सकता है । शारीरिक बल मानसिक बल भी किसी कार्य को पूर्ण करने में बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं आप अपने अनुभव या आसपास के अनुभव को महसूस करते होंगे कि शारीरिक बल का अपने आप में कोई महत्व नहीं होता है, मानसिक बल के बिना वह निकम्मा हो जाता है बहुत सारे उदाहरण है कि जब शारीरिक बल कम होने के कारण भी लोग अपने मनोबल के आधार पर बहुत बड़े बड़े काम कर लेते हैं। प्रकृति का ही उदाहरण देख लो, तो जंगल मे शेर की तुलना में हाथी, सूअर,गैंडा आदि का शारीरिक बल बहुत अधिक होता है परन्तु मनोबल की कमी के कारण सभी शेर से डरते हैं और उसका आतंक मानते है। शरीर की क्षमता होते हुये भी जब मनुष्य का मन असहयोगी हो जाता है तो वह अधिक देर तक काम नहीं कर सकता है इसके विपरीत यदि मन में उत्साह और मनोबल ऊंचा है तो शरीर थका होने पर भी बहुत देर तक काम कर सकता है, ऐसा आप सभी अनुभव करते होंगे। बौद्धिक बल कैसे पैदा होता है ? इसके लिए मानसिक अभ्यास की आवश्यकता होती है , अभ्यास का आशय (बुद्धि के विकास) अध्ययन, अनुभव और किसी विषय पर गहरी पैठ से होता है । जिसका मन निर्बल है, असहयोगी या उत्साहहीन है, वह न केवल अध्ययन कर सकता है। अपितु परिश्रम भी नहीं कर सकता है और न उत्साहपूर्वक किसी विषय में गहरी बैठ रख सकता है ।शरीर की सारी कार्य मन की सहायता से ही सम्पादित होते हैं । न जाने कितने उत्साह अथवा अभिरुचि से रहित मन वाले लोग वर्षो पढ़ते रहते हैं, नौकरी और विभिन्न प्रकार के व्यापार करते हैं, लेकिन बहुत अधिक सफल नहीं हो पाते हैं, मन का असहयोग, विद्रोही, निरुत्साही ,चंचल आदि होना उसकी निर्बलता के ही लक्षण होते हैं। मनुष्य की सारी वाह्य क्रियाओं की जड़ उसके मन में ही होती है। मनुष्य की शारीरिक क्रियाओं का संचालन मन ही होता है। मन सुन्दर ,बलवान, व्यवस्थित और संतुलित होगा क्रियाये भी संतुलित होंगी अन्यथा सारहीन,और अस्त व्यस्त होगा। निर्बल मन वाला व्यक्ति स्वभावतः निराशावादी होता है। उसे पग पग पर अनर्थ दिखायी देता है साधारणत सी बीमारी जैसे सर्दी,जुकाम आदि होने से भी बहुत परेशान हो जाते है और कभी कभी बुरी तरह घबरा जाते हैं जो कि होना नहीं चाहिए। इसलिए किसी भी तरह से साहस व मनोबल में कभी भी कमी नहीं होनी चाहिए। मानसिक शक्ति की मजबूती सभी प्रकार के कार्यों में कार्य करती है । चरैवेति चरैवेति।
अत्यंत सुंदर प्रेरणादायक विचार
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