दया (kindness) का गुण होना ही चाहिए
दया एक महत्वपूर्ण गुण है जो हम सभी में दूसरों के प्रति सहानुभूति और करुणा की भावना को दिखाता हैं । यह परिवार में बच्चे के जन्म से आरम्भ हो जाता है। इस गुण को विकसित करने में उसकी माता /पिता का महत्वपूर्ण योगदान होता है, उसके आस - पास का वातावरण भी महत्वपूर्ण होता है । आने वाले समय में दया या करूणा का भाव कितना होगा उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पर ही बहुत निर्भर करता है। आप सभी को अनुभव होगा या आप अब अनुभव करना, कि दो अलग-अलग परिवारों के बच्चों मे दया का भाव अलग अलग होता है , एक जैसा भी हो सकता है , यदि दोनों घर की कार्य शैली/ वातावरण एक जैसी हो। जब बचपन से ही उनमें दया का भाव नहीं होगा तो धीरे-धीरे उनमें अन्य गुणों का विकास होगा और हो सकता है उसमें दया का भाव ही न हो, और फिर संवेदनहीन भी हो सकते हैं । दया आजकल संबंधों में सुधार लाने, सामाजिक एकता को बढ़ावा देने और व्यक्तिगत विकास में मदद करती है। हमें अपने जीवन में दया को अपनाने का प्रयास करना चाहिए और दूसरों के प्रति अधिक सहानुभूति और करुणा के साथ जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। बच्चे में संवेदनशीलता विकसित आरम्भिक अवस्था होती है और उसी संवेदनशीलता के साथ में बड़ा होता है तो बाद में निश्चित ही उसमें दया/ संवेदनशीलता होगी और वह कभी भी ऐसा कार्य नहीं करता है, जो संवेदनहीन हो । आजकल अखबारों में व मीडिया में आपको यह पढ़ने को मिल जायेगा कि अमुक व्यक्ति या व्यक्तियों ने अपने परिवार के सदस्यों को मार दिया कभी-कभी तो ये भी सुनने व पढने को मिल जाता है कि अपने ही माता पिता की हत्या कर दी , कितना भयावह दृश्य है ये , जो कि अपने ही माता पिता की हत्या कर दे रहा है, हो सकता है कि उसके परिवार/ माता पिता ने इसमें दया का भाव ही पैदा नहीं किया हो ,संवेदनशीलता शून्य हो, जिसका परिणाम ये है। आप का भी दया के मामले में अपना अनुभव होगा और आप कैसे और क्या महसूस करते होंगे। किसी में भी संवेदनशीलता होना अपने आप में बहुत बड़ा गुण है और इससे ही आप में दया का भाव होता है। आपने अनुभव किया होगा कई लोग सिनेमा हाल में हिंसक दृश्य को नहीं देख सकते हैं और अपनी आखों को बन्द कर देते हैं और यदि कहीं पर चर्चा हो रही है तो सुनना नहीं चाहते हैं। यही है दया का भाव या संवेदनशील स्वभाव। आपने आस पास महसूस कर सकते हैं कि यदि बच्चे के सामने किसी को पीटा या मारा जाता है तो उसकी संवेदनशीलता धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है और वह भी उसी दिशा मे आगे बढता जो उसको दिखायी देता है । दया से ही करूणा, सहानुभूति एवं किसी दूसरे की मदद् करने की इच्छा बलवती होती है जो कि समाज के लिए भी आवश्यक है । चरैवेति चरैवेति।
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