कर संरचना ( Tax Structure)
विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं के सन्दर्भ में इस ब्लाग को लिख रहा हूँ । कर राज्य की आय का मुख्य साधन है, जो राज्य को अनिवार्य रूप से भुगतान किया जाता है " कर मुद्रा के रूप में अनिवार्य अंशदान है जो नागरिकों के सामान्य हित एवं कल्याण हेतु व्यय करने के लिए सरकार अपने नागरिकों से वसूल करती है। कर का मुख्य उद्देश्य व्यय के लिए आय प्राप्त करना न होकर आय की असमानता को दूर करना होता है। प्रमुख रूप से करारोपण के उद्देश्य 1-उपयुक्त स्तर बनाए रखना 2-अर्थव्यवस्था का नियमन, 3-आय प्राप्त करना 4-धन का समान वितरण । कर से प्राप्त आय ही सार्वजानिक आय का प्रमुख स्त्रोत होता है, इसको सामान्यतः दो भागों में बांटा जा सकता 1-प्रत्यक्ष कर , इस कर को किसी व्यक्ति या संस्था पर लगाया जाता है और उसी को यह अदा करना पडता है इस कर को स्थान्तरित नहीं किया जा सकता है, इसमें करारोपण की प्रणाली सरल होती है उदाहरण के लिए आयकर, सम्पत्ति कर, निगम कर, ब्याज कर उपहार कर, सम्पदा शुल्क आदि 2-अप्रत्यक्ष कर- वस्तुओं व सेवाओं पर लगाया जाता है, इसमें कर के बोझ को स्थान्तरित करना सम्भव होता है। इसमें करारोपण की प्रणाली कठिन होती है और अनुमान लगाना भी कठिन होता है। अप्रत्यक्ष कर के कारणों से ही वस्तुओं व सेवाओं में मूल्य बृधि होती है उदाहरण के लिए , केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क और विक्री कर आदि। समय समय पर करों में सुधार के लिए समिति गठित की गई है कुछ ये है। वांचू समिति - प्रत्यक्ष कर, एल के झा समिति- अप्रत्यक्ष कर, सरकारिया समिति-- केन्द्र राज्य सम्बन्ध , चेलैया समिति-- कर सुधार, रेखा समिति- अप्रत्यक्ष कर, केलकर समिति-- प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में सुधार के लिए अनुशासन, राकेश मोहन समिति--आधारित संरचना वित्तीयन, नजुनदप्पा समिति-रेलवे किराये भाड़े से सम्बंधित। राजस्व घाटा --कुल राजस्व प्राप्ति की तुलना में कुल राजस्व व्यय जितना अधिक होता है उसे राजस्व घाटा कहते हैं बजटीय घाटा-- सरकार के बजट में कुल प्राप्तियो की तुलना में यदि कुल व्यय अधिक हो तो उसे बजटीय घाटा कहते हैं। केन्द्र सरकार के प्रत्यक्ष कर-- धन कर,निगम कर, आयकर,व्यय कर, ब्याज कर, ऐस्टेट ड्यूटी ( किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी सम्पत्ति के हस्तांतरण के समय जो कर लगाया जाता है) । केन्द्र सरकार के अप्रत्यक्ष कर -- सीमा शुल्क, सेवा कर, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क , बिक्री कर आदि । राज्य सरकारों के प्रत्यक्ष कर-- भू राजस्व, व्यवसाय कर, रोजगारों पर कर, होटल प्राप्तियों पर कर आदि। राज्य सरकार का अप्रत्यक्ष कर--व्यापार कर,राज्य उत्पादन कर, मनोरंजन कर ,विद्युत कर, वाहनकर आदि ।चरैवेति चरैवेति।
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