उत्तराखंड का नदी जल प्रवाह (River flow of uttrakhand सामान्य-6)
आज के ब्लॉग में, मै उत्तराखंड के नदी जल प्रवाह के बारे लिख रहा हूँ। प्रकृति ने उत्तराखंड राज्य को जल संसाधनो का उपहार दिया है। हिमालय भारत का सबसे बड़ा जल संग्रहण क्षेत्र है। यही से ढके बर्फ से विभिन्न नदियां निकलती हैं। उत्तराखंड में टौस,यमुना, भागीरथी, भिलंगना, मन्दाकिनी, अलकनंदा, पिण्डर,सरयू,गौरी,धौली,कुटी, काली, आदि नदियां निकलती हैं, जो हिमनदों से जन्म लेकर एक दूसरे से मिलते हुए बंगाल की खाड़ी में पहुँच जाती हैं। लघु हिमालय से पश्चिमी रामगंगा, आरा,,गाड , बिनो आदि का उदगम दूधातोली की पहाडी से होता है। कौसानी की पहाडी से कोसी, और भाटकोट से गगास का उदगम होता है। गंगा नदी को देवप्रयाग से जाना जाता है जब भागीरथी में अलकनंदा मिलती है। गंगा जब आगे बढती है तो पौड़ी में नयार नदी इसमें मिलती है फिर आगे ॠशिकेश में चन्द्रभागा और थोड़ा आगे चलकर सोंग नदी गंगा में मिलती है। हरिद्वार में रतमऊ व सोलानी नदियां मिलती हैं। देवप्रयाग से पहले गंगा , भागीरथी के नाम से जानी जाती है जो गंगोत्री हिमनद के गोमुख से निकलती है, गंगोत्री के समीप ही भागीरथी में मिलनुगंगा,केदारगंगा, व जाड़गंगा आदि नदियां मिलती हैं। टिहरी शहर( पुराना ) जिसको गणेश प्रयाग भी कहतें हैं, मे भिलंगना भागीरथी में मिलती है। मेदेगगा, धर्म गंगा, दूधगंगा , बालगंगा भिलंगना की सहायक नदी है। अलकनंदा सतोपन्थ से निकलती है ।सरस्वती, विष्णुगंगा,धौली गंगा, लक्ष्मणगंगा, नन्दाकिनी, विरथी ,नबालिका, पिण्डा व मन्दाकिनी इसकी सहायक नदियाँ हैं। अलकनंदा में सर्वप्रथम लक्ष्मणगंगा नदी, और केशवप्रयाग में सरस्वती नदी मिलती है। विष्णु प्रयाग में धौली गंगा और विष्णु गंगा इसमें मिलती हैं। इसके बाद विरथी मिलतीं है। कर्णप्रयाग में पिण्डर नदी और रूद्रप्रयाग में मन्दाकिनी अलकनंदा में मिलती हैं। पौड़ी के व्यास घाट में नयार (दूधातोली से निकलकर) गंगा में मिलती हैं । काली नदी पिथौरागढ़ के पास कालापानी नामक स्थान से निकलती है, चम्पावत के टनकपुर के निकट स्थित पूर्णागिरी तीर्थ के पास बरमदेव मण्डी के बाद से शारदा नदी के नाम से नेपाल में प्रवेश कर जाती है कुठीयाग्टी काली नदी की सहायक नदी है। काली नदी को सर्वाधिक जलराशी देनी वाली सरयू नदी , बागेश्वर के सरमूल नामक स्थान से निकलकर काली नदी में मिल जाती है। बागेश्वर में गोमती नदी, सरयू में मिल जाती है। यमुना प्रवाह क्षेत्र में यमुना तथा टोंस दो प्रमुख नदियां मिलती हैं यमुना का उदगम यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है।इसकी सबसे प्रमुख सहायक नदी टोंस जो तमसा नदी के नाम से भी जानी जाती है। इसका उदगम बन्दरपूछ स्थान है और आगे कालसी में आकर यमुना में मिल जाती है। सभी प्रतियोगी में बैठने वाले छात्रों को विषय की गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता है जिससे कि प्रश्न कैसे भी पूछा जाय उत्तर लिखा जा सके। चरैवेति चरैवेति।
बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी सर .....,🙏🙏🙏
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