दाम्पत्य जीवन l (journey of spouse)
सामान्य रूप से परिवार का अर्थ है कि ऐसे माता - पिता जो अपने बच्चों के साथ रहता हो, परिवार की सफलता के लिए , माता-पिता के ऊपर पारिवारिक, सामाजिक, व्यक्तिगत सभी तरह की उन्नति और विकास के साथ साथ परिवार की भी जिम्मेदारी निर्भर करती है । पति-पत्नी का एक दूसरे का सहयोग करना , दोनों की एकता , एक दूसरे की भावना का सम्मान करना आदि जीवन की सुखद अनुभूति महसूस की जा सकती है। आप सभी पाठकों का भी इसमें अपना - अपना व्यक्तिगत अनुभव होगा। पति -पत्नी, परिवार को चलाने वाले और जीवन रथ के दो पहिये है। किसी एक पहिये की कमजोरी चाहे वह किसी रूप में हो,प्रगति पध को प्रभावित करती है, और करती रहेगी। दोनों का चुनाव (जीवन साथी का) जितना अच्छा होगा उतना ही सुखद परिणाम मिलेगा। दोनों में से एक भी अयोग्य या कमजोर हो तो दाम्पत्य जीवन का रथ डगमगाने लगेगा, जिसका परिणाम बहुत भयानक ( तलाक तक) होगा। तलाक पर एक ब्लॉग पूर्व में भी लिखा जा चुका है, उसको देख सकते हैं । दाम्पत्य जीवन पर ही परिवार का भवन खड़ा होता है इसलिए पति -पत्नी के चुनाव में दोनों को समझदारी दिखानी ही होगी,यह एक महत्वपूर्ण पहलू है। बड़ी बड़ी आशा व आकांक्षाओ के साथ नवयुवक और नवयुवतियां दाम्पत्य जीवन के सूत्र में बंधते हैं, बड़ी बड़ी रस्मे अदा होती हैं अपने अपने सामर्थ्य के अनुसार, और कई बार अभिभावकों के सामर्थ्य न होने के बाद भी बहुत बड़े स्तर पर समारोह का आयोजन होता है, जो दावतो का ,लेन-देन का ,बरात, पार्टीयो के आयोजन आदि के साथ ही दोनो युवक-युवती दाम्पत्य जीवन के सूत्र में बंधते हैं। दोनों का प्रारम्भिक जीवन बहुत सुन्दर दिखाई देता है। कुछ मामलों में यह स्थिति अधिक दिन तक नहीं रहती है और दाम्पत्य जीवन कलह,अशाति, द्वेष,असन्तोष की आग में जलने लगता है। साथ फेरो के समय जो प्रतिज्ञाये पण्डित जी दोनों को दिलाते हैं उनका व्यवहारिक जीवन में नाम भी नहीं रहता है ( कुछ मामलों में)दाम्पत्य जीवन के सुख समृद्धि एवं शांति के लिए एक दूसरे के भावों-विचारों एवं स्वतंत्र अस्तित्व का ध्यान रखकर व्यवहार करना आवश्यक है। इसी के अभाव में आजकल दाम्पत्य जीवन एक अशाति का केन्द्र बन गया है। पति- पत्नी का एक समान संबंध है जिसमें न कोई छोटा और न कोई बड़ा है चाहे वह नौकरी में किसी पद पर हो या न हो । जीवन यात्रा के रास्ते पर पति -पत्नी परस्पर अभिन्न मित्र की तरह होते हैं, दोनों का अपने अपने स्थान पर समान महत्व है। गृहस्थी जीवन के सभी सुख दाम्पत्य जीवन की सफलता में निहित है, सुखी दाम्पत्य का आधार पति पत्नी का शुद्ध प्रेम है, प्रेम में अहंकार का भाव नहीं होता है तब ह्दय मिले जुले रहते हैं यही सबसे महत्वपूर्ण बात होती है। प्रकृति के भी ढेर सारे उदाहरण (पशु-पक्षियों, व जानवरों आदि के) ऐसे मिल जाते हैं जो दोनों अपने बच्चों की परवरिश कैसे करते हैं , ये देखा जा सकता है और आप सभी देखते भी होगे । इसलिए विवाह के बाद दोनों पति पत्नी के सुख दुःख एक ही हो जाते हैं, और एक होना ही चाहिए। चरेवेति चरेवेति ।
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