खुशी (Happiness)
जीवन में हर व्यक्ति के खुश रहने की तमन्ना रहती है पर मैं समझता हूँ कि बहुत कम ही लोग ऐसे हैं जो खुश रह पाते हैं। मनुष्य जब खुश होता है, वह अन्दर से बहुत ही हल्का महसूस करता व इसके साथ-साथ सहज भी महसूस करता है इसका आप सभी को अनुभव भी होगा और एहसास भी करते होंगे,लेकिन जब आप तनाव में होते हैं या परेशानी में होते हैं तो स्वाभाविक रूप से मन में बसने वाले खुशी न जाने कहाँ चली जाती है और परेशानी की लकीरें चेहरे पर साफ दिखाई देने लगती हैं, मन में तरह तरह नकारात्मक विचार आने लगते हैं और नकारात्मता हावी होने लगती है यह मैं नही कह रहा हूँ आप सभी को ऐसा महसूस होता होगा । जब विचार नकारात्मकता की ओर आगे बढ़ते हैं तो तरह तरह की आशंका आपके मन में जन्म लेती है और यह किसी मनुष्य के लिए खतरनाक पल हो सकते है। इसके विपरीत जब मन में खुशी होती है या मन प्रसन्न रहता है तो विचारों में सकारात्मकता रहती है और वह जीवन में नये परिदृश्यों व नये आयामों की खोज में लगा रहता है। किसी के जीवन में आगे बढ़ने के लिए खुशहाली एक प्रेरक/इंजन का काम करता है ।यदि हम अपने जीवन में खुश व संतुष्ट रहते हैं तो हमारी मानसिक परेशानीयां भी हमसे दूर हो जाती हैं और अधिक देर तक समीप नहीं टिकती है।हमारी खुशी कैसे बढ़े इस पर विचार किया जा सकता है । यदि हम हर समय अपने दोषों को निहारते रहेंगे,स्वयं को दोषी मानते रहेंगे अपनी कमियों को देखेंगे तो उदास ही रहेंगे तो उसके प्रभाव से दुखी रहेगे । खुशी हमको तब मिलती है जब हम अपने अच्छे गुणों को प्रश्रय देने लगते हैं ,अपने गुणों में इजाफा करते हैं और अपनी विशेषताओं का भरपूर उपयोग करते हैं। उद्देश्य पूर्ण जीवन जीना खुशी में इजाफा करता है, और हमेशा वह व्यक्ति जीवन में अधिक खुश रहता है जिनके जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है, जिसको यह ज्ञात होता है कि वह अपने उद्देश्य की ओर बढ़ रहा है, अपने लक्ष्य व अपने गंतव्य की ओर जा रहा है, ऐसे से उसकी खुशी व प्रसन्नता निरंतर बढ़ती रहती है फलस्वरूप घबराहट, चिंता, तनाव, बेचैनी व अवसाद जैसी परेशानियां बहुत कम पनपती है , और यदि होती हैं भी तो बहा जल्दी समाप्त हो जाती है। दूसरों से जुडाव, लगाव अपनत्व हमें बहुत अधिक खुशीयां देता है इसलिए संबध जोड़े जाने चाहिए, और उन्हें निभाया भी जाना चाहिए । जो व्यक्ति दूसरों के साथ आसानी से सहज रहते हैं, सामन्जस्य बिठा लेते हैं अपनत्व जोड़ लेते है वे खुशियाँ पाते हैं और खुशियाँ विखेरते है। मनुष्य का मन शरीर का संबंध एक दूसरे से जुडाव है और यदि एक दूसरे पर आश्रित है कहना उचित होगा ।यदि शरीर स्वस्थ है तो मन भी प्रसन्न रहेगा यह आप सभी अनुभव करते होंगे,और यदि शरीर अस्वस्थ है तो मन बहुत परेशान रहेगा और इसका प्रभाव आपके क्रियाकलाप पर पडेगा। इसलिए खुश रहने के लिए हमारे शरीर व मन का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है। चरैवेति चरैवेति।
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