नागरिक सुरक्षा ( civil defence)
आपरेशन सिन्दूर से पूरा देश अपनी सेनाओ के शौर्य व वीरता पर गर्व कर रहा है। इसके साथ साथ यह भी तय हुआ है , कि भारत को विकसित की श्रेणी में आना है तो अपना सुरक्षा तंत्र को और भी अधिक मजबूत करना होगा। भारत के आम जन मानस की यह धारणा भी पक्की हो गयी है , देश को विकास की आवश्यकता के साथ सुरक्षा पर भी बहुत ही ध्यान देना चाहिए, और यह हर स्तर पर आवश्यक है । शक्ति के बिना संसार में रहने का कोई महत्व नहीं और न ही जीवन का कोई मूल्य है । शक्ति लीला का यह रहस्य मानव जीवन में सबसे गहरा है। जब बात बल की आती है तो इसका विशुद्ध रूप ताकत से होता है कि यह ताकत आप के पास कैसी है और किस रूप में है। समय समय पर सरकारो के द्वारा भी सुरक्षा पहलूओ पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन आन्तरिक स्तर पर भी सिविल डिफेन्स की आवश्यकता महसूस की गयी है, जिसको की मजबूत किया जाना उचित होगा। सिविल डिफेन्स एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो समुदाय की सुरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करता है। यह एक ऐसी प्रणाली है जो आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए काम करती है , सिविल डिफेन्स का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों की सहायता करना है, जैसे कि प्राकृतिक आपदाएं, आग, और अन्य आपातकालीन स्थितियां विशेषकर युद्ध के समय इसकी अत्यंत आवश्यकता होती है। सिविल डिफेन्स नागरिकों को आपातकालीन स्थितियों के बारे में जागरूक करना और उन्हें आवश्यक कौशल, तकनीकी और ज्ञान प्रदान करना है जो आपातकालीन स्थितियों में उपयोगी हो सकते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, आज का जो बच्चा है वही कल का नागरिक होगा यदि स्कूल स्तर पर वह सारी सुरक्षा से सम्बंधित खास- खास बातें व तकनीकी सीख जाय या, उनको स्कूली स्तर पर ही सिखा दी जाय , तो आने वाले समय में निश्चित ही वह समाज देश की सुरक्षा में काम आयेगी। इसके लिए एक सिविल डिफेन्स/सैन्य जानकारी से सम्बंधित एक विषय को अनिवार्य रूप से कक्षा 12 तक सम्मिलित किया जाय तो अच्छा परिणाम मिल सकता है । ऐसा करना देश की सुरक्षा , राष्ट्रीयता व आंतरिक सुरक्षा के हित में भी महत्वपूर्ण कदम होगा । वैसे तो कतिपय स्कूल में NCC का गठन है , पर यह काफी नहीं है। सभी स्कूलों चाहे वे सरकारी स्कूल हो या निजी सभी के लिए अनिवार्य विषय होना चाहिए । इसके लिए सेना के सहयोग से एक पाठ्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए और उसको सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए। यह इस रूप में भी महत्वपूर्ण है कि आरम्भिक अवस्था में छात्रों में परिवर्तन होता रहता है वहीं बातें सीख लेते हैं जो उनको सिखाया जाता है । इसलिए हमें हर संकटों के लिए तैयार रहना है और, अपनी भावी पीढ़ी को भी तैयार करना है। जो इस भय से प्रगति के पथ पर पैर नहीं बढ़ाता उसका साहस धीरे-धीरे कमजोर होता रहता है। सिविल डिफेन्स यदि गाँव , ब्लाक व जिले स्तर पर मजबूत होगा तो इसके कई तरह से समाज को फायदे होगें, स्थानीय प्रशासन को भी लाभ होगा व अवांछित गलत गतिविधियों को रोकने में भी मदद मिलेगी। गाँव या न्यापंचायत स्तर पर इस बारे में भी सोचा जा सकता है। चरैवेति चरैवेति।
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