छोटी - छोटी परन्तु महत्वपूर्ण (small but important)

     


जीवन  में  सफलता  -असफलता  का  कारण हमारे व्यवहार  की छोटी छोटी  बातों  का बहुत प्रभाव  पड़ता है।  छोटी  छोटी  खराब आदतें, स्वभाव,   रहन सहन का गलत ढंग आदि    सामान्य सी  बातें  होने  पर भी मनुष्य  की उन्नति, विकास, सफलता के रास्ते  में  रोड़ा  बनकर  खड़ी  हो जाती है। इनका सुधार न कर  लोग  दूसरों  पर असफलता  का कारण  गढकर अपने  आप  को संतुष्ट  करने  का असफल प्रयास  करते हैं  । मनुष्य  का व्यवहार, उसके  बातचीत  करने   का तरीका, जीवन  जीने  के  लिए  रहन सहन का ढग,एवं अन्य  व्यावहारिक  पहलूओ के आधार  पर समाज  मनुष्य  के  बारे  में  एक मंतव्य  या राय  रखता है ,जिसका कि मनुष्य के जीवन  में  महत्वपूर्ण  स्थान  होता है ।  कई लोगों के व्यवहार  को  आपने  महसूस  किया  होगा कि वे बात - बात  पर उत्तेजित  हो जाते हैं और दूसरे लोगों  से उलझ जाते हैं  जिसे  ठीक नहीं कहा जा सकता है, ऐसे  व्यक्तियों  में  आत्मविश्वास की कमी,  हीनता  की भावना, घबराहट  आदि  प्रमुख  गुणों का अधिक  समावेश  होता है,  वैसे तो  समयानुसार /परिस्थितियों  के अनुसार  सभी  में  ये गुण  विद्यमान   होते  हैं  परन्तु  कुछ  में   ये अधिक  प्रभावी  होते हैं। यदि  देखा  जाय  तो प्रत्येक  व्यक्ति  अपने आप  में   एक  विज्ञापन  की    तरह  भी  काम  करता है, जहाँ -  जहाँ  पर जायेगा  या बातचीत  करेगा , व्यवसाय/ नौकरी  करेगा   या   जो  कोई  भी  कार्य  करेगा  अपने  बारे  में  अन्य  लोगों  को अच्छा  या खराब  सोचने  के लिए   मजबूर  करता  जायेगा। इसलिए  हम सभी  को अपने  जीवन  में  सभी  कुछ  अच्छा  ही करना  चाहिए।  अच्छा  ही सोचना है और  इसके लिए  प्रयास  तो करना ही  चाहिए और यह केवल  कहने से काम नहीं  चलेगा, करके  दिखाना  भी होगा ।आने  वाले  समय  में  यही  अच्छे  गुण  आपकी भावी पीढ़ी  में  भी देखने  को मिलेंगे। बातचीत  का स्तर  भी मनुष्य  के प्रभाव, व्यक्तितव को प्रकट  करता है, आप देखते  होंगे  कुछ  को बहुत  बोलने की आदत होती है  इसका उदाहरण  जब कोई  सार्वजानिक  कार्यक्रम  होता है    तो  उसमें  देखा जा सकता है  कि   वे माइक  छोड़ते ही नहीं  जब कई अन्य  लोग  वक्ता  के रूप  में  अपनी  प्रतीक्षा  कर रहे  होते हैं परन्तु  उनका  नम्बर  ही नहीं  आता । कुछ  लोग  बोलते  ही नहीं   दोनों दशाओं  में   यह  ठीक   नहीं है।  समय, परिस्थितियों  व आवश्यकतानुसार  नपे  तुले शब्दों  मे  अपनी  बात कहनी चाहिए ।  हो सकता है  कुछ  को ये बातें  अच्छी  न लगे  परन्तु  यह सत्य है  कि कई लोग  धर्म, समाज, मानवता की  बड़ी बड़ी  बातें   केवल  विचारों  में,  उपदेश  देने  में  करते  हुए  दिखाई  देते हैं  किन्तु व्यवहार  में  उस पर ध्यान  नहीं  देते, ऐसे  लोग  न तो जमीन के  रहते हैं और  न आसमान  के , और न इनका  कोई  महत्व ही  होता है। किसी भी तरह के चारित्रिक, व्यावहारिक  दोष  मनुष्य  को असफलता  और पतन की  ओर प्रेरित  कर सकते हैं  , समाज  मे ऐसे  लोगों का  मूल्य, प्रभाव  नष्ट   होता  रहता हैं, कई लोगों की  प्रवृत्ति  होती है कि बिना  बात  अथवा  सामान्य  सी घटनाओं  पर मुँह  फुलाकर  उदास  रहना, प्रत्येक  बात पर दूसरों  की आलोचना करना  चाहे कैसा  भी वातावरण  हो,आलोचना  किये बिना  उनको  तृप्ति ही  नहीं  मिलती, इससे  लोग  उनसे  दूर हटने का  प्रयास  करते हैं और दूसरों के कई अच्छे  अनुभव  व विचारों, ज्ञान   के लाभ  से वे  बंचित  रह जाते हैं।   और  भी कई छोटी छोटी  बातें  हैं , जिनको हमे अपने  जीवन  में  कर सकते हैं   व अपना सकते  हैं ,  जिससे  की   सुधार  व सफलता  सुनिश्चित  हो सके। चरैवेति चरैवति। 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी (Permanent Capital of uttrakhand)

सिद्धसौड बड़मा (रुद्रप्रयाग )शिक्षा का केंद्र (center of education, siddhsour badma)

वृद्धावस्था( old age)