तलाक (Divorce) एक बढती समस्या
अपने आप को सुधारने का अर्थ है, अपनी उलझी हुई समस्याओ को सुधार लेना और अपनी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करना है । दूसरों को सुधारना कठिन है पर अपने आप को आसानी से सुधारा जा सकता है। हम अपने को समझें, अपने को सुधारे और अपनी सेवा करने के लिए तत्पर रहें तो यह महत्वपूर्ण क़दम होगा। तलाक एक ऐसी समस्या है जो आजकल के समाज में बहुत आम होती जा रही है। यह समस्या न केवल व्यक्तिगत जीवन को ही प्रभावित नहीं करती है, बल्कि यह समाज ,परिवार, आने वाली पीढ़ी के साथ-साथ ,अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करती है। आखिर पति पत्नी में तलाक क्यों होता है ? इस प्रश्न का उत्तर तो सही रूप से वो दम्पति ही दे पायेंगे कि उनके बीच तलाक क्यों हुआ है ? लेकिन मोटे तौर पर एक दूसरे को न समझ पाना एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। दो परिवारों से लड़की व लडक़ा एक पवित्र सम्बन्ध शादी करके बंध जाते हैं , तो यह स्ववाभाविक है कि दोनो के विचारों में अपने अपने परिवार के विचार प्रभावी होंगे और उसी के अनुसार वे चलने का प्रयास करते हैं । जब वे एक दूसरे पर अपनी अपनी बातें या विचार थोपने का प्रयास करते होंगे तो विचारो में मत भिन्नता और जब बहुत अधिक भिन्नता होती होगी शायद यह तलाक तक पहुंच जाती है। ऐसा मेरा मानना है । मेरे 15 दिसम्बर 24 के ब्लॉग "सुन्दर घर " में भी इसका उल्लेख किया है, कि मत भिन्नता होने के बाद किसी एक को तो समायोजन/समन्वयन करना ही होगा , तभी जाकर आपकी गृहस्थी अच्छी हो सकती है। कई बार तो ऐसा हो जाता है कि, दोनों के विचार हर मुद्दे पर एक समान ही होते हैं वहां पर कोई समस्या ही नहीं आती है। कभी-कभी पति-पत्नी में संवाद की कमी होती है, तो उनके बीच मतभेद पैदा हो जाते हैं। विश्वास की कमी भी तलाक का एक कारण हो सकता है इससे उनके बीच संबंध कमजोर हो जाते हैं। कभी-कभी आर्थिक समस्याएं भी तलाक का एक मुख्य कारण हो सकती हैं । जब पति-पत्नी के बीच आर्थिक समस्याएं होती हैं, तो उनके बीच तनाव पैदा हो जाता है। पारिवारिक दबाव भी तलाक का एक मुख्य कारण हो रहा है। जब पति-पत्नी के परिवार के बीच दबाव होता है, तो उनके बीच संबंध कमजोर हो जाते हैं। ऐसे बहुत सारे कारण हैं , लेकिन कुल मिलाकर देखा जाय तो यह एक प्रमुख सामाजिक समस्या का रूप लेती जा रही है जिसके परिणाम डरावने है ं। इसलिए रिश्तों के संसार में हमें वही मिलता है जो हम देते हैं, लेकिन जो हम देते नहीं वह हमे नहीं मिलता है चाहे हम उसके लिए तरसते रहे । रिश्ते कोई भी हो (पति-पत्नी का महत्वपूर्ण रिश्ता है ) यह सत्य है कि रिश्ते दर्पण की तरह हमारी भावनाओं को परावर्तित करते रहते हैं ,जब हम खुश होते हैं तो खुशी का गुबार चारों दिशाओं में फैल जाता है और जब हम परेशान होते हैं तो परेशानी की लहरें सभी को परेशान कर देतीं हैं। पति-पत्नी के रिश्तों में भी इस बात को समझना होगा कि हर मे अच्छाइयां व कमियां है, यदि किसी को अपनाते हैं तो अच्छाई के साथ कमीयो को भी स्वीकारना पड़ेगा और अपना ताल मेल रखना पड़ेगा जिससे कि तलाक तक नौबत न आये यह दोनों को देखना होगा, यदि ऐसा करते हैं तो निश्चित ही दाम्पत्य जीवन सुख मय रहेगा। एक और बात है बुराई और निन्दा सभी को खराब लगती है चाहे वह सही क्यों न हो, यदि समबन्ध ठीक चाहते हैं तो बुराई और निन्दा के बजाय प्रशंसा करने की आदत डाल दें, अपनों को प्रोत्साहित करने का प्रयास करें, इसका मतबल यह नहीं है कि कमियों को नजरअंदाज करें बल्कि कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाय ।सुखी दाम्पत्य जीवन ही सुन्दर घर का आधार है। चरैवेति चरैवेति।
सादर प्रणाम आशा करता हूं आप स्वस्थ होंगे, बहुत ही सारगर्भित लेख।
जवाब देंहटाएंthanks
जवाब देंहटाएंthanks
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