अनुशासन (Discipline)
आज के समय में जो सबसे कमी पायी जा रही है वह अनुशासन की है, जबकि हर क्षेत्र के साथ साथ सभी के जीवन में अनुशासन की आवश्यकता है,।अनुशासन जीवन को संयमित और नियंत्रित करता है । जीवन के हर क्षेत्र में अनुशासन अलग -अलग है उदाहरण के लिए विभिन्न कार्यक्रमों, कार्यालयो का अनुशासन, भोजन करने का अनुशासन, रहन-सहन का अनुशासन, जीवन जीने के तौर तरीकों का अनुशासन सभी अलग अलग है , किन्तु आवश्यक है। अनुशासन केवल हमारे जीवन के लिए ही आवश्यक नहीं है , अपितु प्रकृति ने भी स्वयं को अनुशासनबद्ध करके रखा है और प्रकृति का अनुशासन सभी पर समान रूप से लागू होता है, लेकिन मानव जीवन का अनुशासन देश काल परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।अनुशासन एक ऐसा गुण है जो हमें सफलता की ओर ले जाता है। यह हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है और हमें जीवन में संगठित और केंद्रित रखता है। अनुशासन के बिना, हम अपने लक्ष्यों से भटक सकते हैं, और असफलता का सामना कर सकते हैं।अनुशासन - निर्धारित नीति नियमों का पालन करना, अनुशासनों का निर्धारण मनुष्य स्वयं करता है और इसमें आवश्यकतानुसार फेरबदल भी करता रहता है लेकिन अनुशासन का निर्धारण सोच समझकर कर किया जाना उचित होगा । महर्षि पतंजलि ने भी योग दर्शन के आरम्भिक सूत्र में सबसे पहले योग अनुशासन की बात कही है- "अथ योगानुशासनम्"। अनुशासन हमे सचेत करता रहता है , वह समय समय पर यह ध्यान दिलाता रहता है कि हम सही पथ पर चल रहे हैं। अनुशासन हमारे जीवन में वह सीमा रेखा खींच देता है जो हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है। अनुशासन के अभाव में हमारी सारी व्यवस्था दिशा से भटक जाती है जो कि मनुष्य के जीवन के लिए कष्टदायक हो सकती हैं। अनुशासन हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। अनुशासन हमें संगठित जीवन जीने में मदद करता है। यह हमें अपने समय और संसाधनों का प्रबंधन करने में मदद करता है।अनुशासन हमें आत्मविश्वास देता है। यह हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक आत्मविश्वास देता है । अनुशासन विकसित करने के लिए नियमितता आवश्यक है। आपको अपने दैनिक कार्यों को नियमित रूप से करना होगा, इसको विकसित करने के लिए लक्ष्य निर्धारण आवश्यक है। अनुशासन को विकसित करने के लिए आत्म-नियंत्रण आवश्यक है। आपको अपने विचारों और कार्यों पर नियंत्रण रखना होगा। अनुशासन को विकसित करने के लिए धैर्य आवश्यक है। आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय और प्रयास करना होगा। आज प्रकृति और मानव दोनों का अनुशासन गड़बड़ाया हुआ है। मनुष्य के अवांछनीय कार्यों के कारण प्रकृति में कई प्रकार के प्रदूषण बड़े हैं जिसका प्रभाव जलवायु पर पड रहा है फलत प्रकृति के अनुशासन में विकृति उत्पन्न हो रही हैं। मनुष्य जीवन का भी अनुशासन गड़बड़ाया हुआ है फलतः कई प्रकार की जीवन शैली से संबधित बीमारियाँ उतपन्न होने लगी हैं यह जरूरी नहीं है कि सदैव दूसरों के बनाये अनुशासन पर चला जाय और उसी का पालन किया जाय, यदि आपको जीवन में कुछ करना है तो अपने जीवन का अनुशासन स्वंय बनाना होगा और साथ में उसका पालन भी करना होगा तभी आप अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। नीति नियम इसलिए ही बनाये जाते हैं जिससे जीवन की ऊर्जा व्यर्थ न जाय और इसका सदुपयोग हो। छात्रों के लिए तो अनुशासन परम आवश्यक है। चरेवेति चरेवेति।
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