हम सभी को अपना मूल्याकंन/आकलन करते रहना चाहिए (continuously assess myself))
कई बार ऐसा होता है जब हम किसी की भी कमी की ओर उस अमुक व्यक्ति को बताते हैं तो वह क्रोध में आ जाता है यहाँ तक की कभी-कभी गाली ,अनाप , शनाप बकने लगता है जो कि उसकी हताशा को दिखाता है या कमजोर स्वाभिमान को दिखाता है। समय- समय पर अपना मूल्यांकन/आकलन करते रहना चाहिए, इसमें कोई बुराई नहीं है, कई लोगों की आदत होती है है वह हर समय ऐसे लोगों को अपने पास रखते हैं जो उनकी तारीफ़ करते रहे और ऐसे कुछ लोगों का काम भी यही होता है समय-समय पर पर वे झूठी तारीफ करते रहते हैं। शायद ऐसे लोगों के बारे में आपका भी अनुभव होगा या आपका भी आकलन होगा । कहते हैं कि अच्छा मित्र वही होता है जो सामने पर आपकी आलोचना करे, जिससे कि अपने में सुधार करने की गुंजाइश बनी रहती है। अपने में कमियां स्वयं को नहीं दिखाई देती हैं, और जब व्यक्ति सुनने को तैयार होगा तभी लोग उसके बारे में प्रतिक्रियाएं देगें। एक अनुभव आधारित नवाचार का उल्लेख करना चाहूंगा। प्रधानाचार्य के रूप में अपना मूल्याकंन छात्रों के द्वारा कराया गया। 10 प्रश्नो का एक बहु-विकल्पीय प्रश्न तैयार किया गया और कक्षा 9 एवं कक्षा 11 केङ 200 छात्रों से ये सवाल किये और उन विकल्पों पर निशान लगाने के लिए कहा गया। कक्षा 9 एवं 11 इसलिए कि यह कार्य बोर्ड परीक्षा के तुरंत बाद किया गया था, और कक्षा 10 एव 12 के छात्र परीक्षा देकर जा चुके थे, फिर बड़ी कक्षा 9 व 11 ही बचती थी। छात्रों को जो मूल्याकंन/आकलन पत्र दिया गया उसमें सबसे ऊपर ये निर्देश था कि, यह आकलन/मूल्याकंन आपके विद्यालय में कार्यरत प्रधानाचार्य के बारे में है, आपको अपने मन से प्रश्न का जो उत्तर सबसे अधिक ठीक लगता उस पर सही का निशान लगाना है, इसमें आपको कहीं पर भी कोई नाम या रोल न0 नहीं लिखना है ।(यह इसलिए जिससे बच्चे निर्भय होकर अपना निर्णय लिख सकें) प्रश्न ये थे,1-आपके प्रधानाचार्य समय पर विधालय आते हैं (क) हमेशा समय पर आते हैं।( ख) कभी-कभी समय पर आते हैं। (ग) कभी समय पर नहीं आते हैं। 2-आपके प्रधानाचार्य कक्षाओ में पढ़ाने के लिए आते हैं।( क) प्रायः आते हैं । (ख) कभी-कभी आते हैं । (ग) कभी नहीं आते हैं। 3-आपके प्रधानाचार्य क्या प्रार्थना सभा स्थल पर कोई प्रेरक प्रसंग/ सम्बोधन सुनाते हैं और आप को कैसा लगता है ? (क) बहुत अच्छा लगता है।(ख) कुछ कम अच्छा लगता है। ( ग) अच्छा नहीं लगता है । 4- आपके प्रधानाचार्य का अनुशासन कैसा रहता है, । (क) बहुत अच्छा रहता है। (ख) लगभग ठीक रहता है।( ग) अनुशासन ठीक नहीं रहता है। 5- आपके प्रधानाचार्य क्या कभी-कभी छात्रों के शैक्षिक कार्यों को देखते हैं ? (क) हमेशा देखते हैं। (ख) कभी-कभी देखते हैं। (ग) कभी नहीं देखते हैं। कुछ प्रश्न और भी थे, ठीक से याद नहीं है पर थे प्रधानाचार्य के बारे में ही थे । छात्रों ने स्वतंत्र रूप से प्रश्नों पर सही का निशान लगाया, उसका विश्लेषण किया गया और 8% छात्रोंके द्वारा मेरे कार्य को ठीक नहीं माना या मध्यम माना। ये बात अगले दिन प्रार्थना स्थल मेरे द्वारा छात्रों से कही गयी कि, 8% छात्रों ने मेरे कार्य को ठीक नहीं माना, पर जब तक मुझे यह पता न चले कि मेरा कौन सा कार्य ठीक नहीं है, तब तक मैं अपने में कैसे सुधार कर पाऊँगा,इसलिए वह मुझ तक एक पर्ची के माध्यम से यह बात पहुँचा सकते हैं , अपना नाम नहीं लिखेंगे, खैर कुछ बच्चों ने अपनी बात मुझ तक पहुंचायी । मेरा एक मात्र आशय यह था कि यदि हमे भी समय समय पर अपना सभी प्रकार से आकलन/मूल्याकंन करते रहना चाहिए , इससे स्वंय में भी सुधार होता रहता है या करने के लिए अवसर मिलते रहेंगे । इस प्रकार के कार्यों को करते रहना सभी लोगों के लिए अच्छा रहेगा । उन लोगों के लिए तो बहत अच्छा/ उचित होगा जो सार्वजनिक जीवन में कार्य कर रहे हैं। चरैवति चरैवेति।
बिल्कुल सत्य सर आपके विचार सदैव अनुकरणीय हैं
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