गृहस्थी में पति-पत्नी का सहयोग (cooperation between husband and wife in the household)

     


*"यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तत्र देवताः"*अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर समस्त नारी शक्ति को नमन। नारी शक्ति का सम्मान ही समाज की सच्ची उन्नति है। हर महिला एक शक्ति, एक प्रेरणा और एक संघर्ष की मिसाल है। आइए, हम सभी मिलकर समाज में समानता और सम्मान की ज्योति जलाते हुए हर महिला को उसके सपनों की उड़ान भरने का अवसर दें।WomensDay (8 march )  घर में  पति-पत्नी  दो इकाई  से मिलकर  एक  इकाई के रूप में सम्मिलित  व्यक्तित्व  का निर्माण करते हैं  और पूरे मनोयोग से  जीवन  भर एक उत्तरदायित्व  समझकर कार्य करते हैं  और करना  भी चाहिए , तभी दोनों का उद्देश्य  सफ़ल हो  पायेगा। दोनों का एक दूसरे के कामो में  सहयोग  अति आवश्यक  के साथ-साथ अनिवार्य  भी  है।  यहां  एक बात  का उल्लेख अवश्य करना  चाहूंगा कि पति -पत्नी  चाहे  किसी  सरकारी   पद की हैसियत  में रहे,   गृहस्थ जीवन  तभी  सफल होगा  जब वे एक दूसरे की भावना का  सम्मान करेंगे और  एक दूसरे के कामों  में  अपना  हाथ  बंटाए ,दोनों का  एक दूसरे के कामों में  सहयोग अति आवश्यक है, पति -पत्नी के कामों की सीमा  रेखा  नहीं  बाँधी  जा सकती है, दाम्पत्य जीवन  का सार  भी इसी  में है ,चाहे  वे कार्य  घर के अन्दर  के हो  या बाहर के  हो । बहुधा  भोजन  बनाने का  काम पत्नी का काम समझा  जाता है  और यह ठीक  भी है,   कि यदि  पति  घर के बाहर  किसी काम पर गया है, परन्तु  जब आवश्यकता  पड़े,  तब  पति को भी उसी  उत्साह से घर में  कार्य करना  चाहिए  जैसे  कि पत्नी  करती है, बहुत  से लोग  इसे अपना  अपमान  समझते हैं। पत्नी के सामने  भोजन  आदि  बनाने  में  शर्म  महसूस करते हैं  जो कि  ठीक  नहीं  है,  शायद  यह उनका भी दोष नहीं  है,   चूंकि  उन्होंनें  ऐसे ही देखा है और ऐसे  देखते  देखते  ही  बड़े  हुए हैं । कहते हैं कि  जिस  काम  को हम हमेशा  करते हैं  या हमेशा  देखते  हैं,   वही  हमारी आदत और चरित्र  बन जाता है।  इसलिए  इन सब बातों को  हर पति- पत्नि  को सोचना चाहिए ।  समझदारी  इसमें  ही है पत्नी को  अपने  बराबर का साथी  समझे और किसी  भी कार्य  को करने में  कभी भी  संकोच  न करें।  बड़े  बड़े  महापुरुषों के  जीवन को देखने  से भी उनके  द्वारा  अपने  आचरण में  यही  अपनाया गया   है । राजा नल पाक विद्या  में  निपुण  थे, गद्दाधारी भीम विराट के यहाँ  मुख्य  रसोइया  के रूप में  नियुक्त थे,घर के कामों  में  महत्मा गांधी  भी अपनी  पत्नी  को पूरा  पूरा  सहयोग करते थे, और सत्य  भी यही है जहाँ पति-पत्नी  के  बीच कामों के करने की  कोई  सीमा  रेखा  विभाजन के लिए  नहीं  होती है  वहाँ  सब कार्य  अच्छे  से होता है।मेरा ब्लॉग  सुन्दर घर में भी  इसका  उल्लेख है। बहुत  से परिवारो में  स्त्रियां दिन  रात  काम में  लगी रहती हैं उन्हें थोड़ी  सी भी विश्राम  नहीं  मिलता, दूसरी  ओर पुरूष बहुत सा समय व्यर्थ आलस्य  में  पड़े  रहकर मौज मस्ती, ताश खेलने, आदि  में  बिताते हैं ,  लेकिन  घर के काम में तनिक  भी सहयोग  नहीं करते, कई बार तो ये भी देखा  गया है,   देर -रात तक पार्टियो  में  रहने  के कारण  घर में   पत्नी  ,  पति  के आने  की बहुत  देर  तक  प्रतीक्षा  कर रही होती हैं  ,  इसको  कतई ठीक  नहीं कहा जा सकता है। इसलिए  उचित  यही  होना  चाहिए , कि  हमें सभी   प्रकार से घर/गृहस्थी  के कामों  में अपने  जीवन साथी  के  सुख  सुविधाओं   का  ध्यान  रखते हुए  सहयोग  करे   और भावी पीढ़ी  (अपने  बच्चों को ) को भी अपने  गृहस्थी  के कार्यो से प्रेरित  करें ताकि  वे भी अपना  सुखी  जीवन  जी सकें।चरेवेति चरेवेति। 



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