Patience धैर्य
धैर्य से काम करना, दूसरों से काम करवाना, व काम लेना किसी भी मनुष्य का( प्रत्येक का ) महत्वपूर्ण गुण है । ठीक इसके विपरीत धैर्य खोना , यह भी किसी के लिए बहुत बुरा है , और किसी विपत्ति से कम नहीं है,। कल्पना करो यदि कोई अपने दिमाग का संतुलन खो बैठता है तो मैं समझता हूँ , कि इससे भारी विपत्ति कोई नहीं है , धैर्य खोने के बाद दिमाग का संतुलन न होने के कारण, ठीक से काम नहीं करता , इससे तनाव पैदा होता है और तनाव से आपका स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है कई बीमारियों का कारण तो तनाव ही होता है, , हो सकता है कि तब (तनाव में )जो निर्णय आप लेते/ ले रहे होते हैं, वह तर्क हीन हो, जिससे आपको अपने निर्णयों पर दुःख भी हो सकता है। कभी-कभी यह आप की विपत्तियों कारण बन जाती है। आपने अनुभव किया होगा , जब आप अधिक उत्तेजित हो जाते हैं तो असंतुलित हो जाते हैं और इस स्थिति में आप किसी सम सामयिक घटना/स्थितियों का सही से अन्दाजा नहीं लगा सकते हैं और न ही ठीक से सोच पाते हैं, कैसे आपको लाभ हो या कितनी हानि हो रही है, क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए यह सब होने के बाद तो कभी-कभी आप मूक दर्शक बने रहते हैं , यह स्थिति भयावह है । कभी-कभी यह स्थिति उनको भी परेशान करती है जो सीधे आप से सम्बंधित होते हैं , या आप के साथ-साथ रहते हैं यथा पारिवारिक सदस्य, व अन्य सहयोगी कार्यालय कर्मचारी आदि। इसलिये मुखिया को , चाहे वह परिवार का हो, संस्था का हो ,चाहे विभाग का हो या सरकार का हो मनोबल , व संतुलन हर हाल में बना रहना चाहिए। ऐसे में हर काम का समाधान आसानी से निकल जाता है, या समाधान निकालना आसान हो जायेगा। स्नेह, सहयोग और सद्भावना के वातावरण में हर किसी सदस्य को प्रसन्नता होती है, और उत्साह बना रहता है , यदि किसी काम में उत्साह रहता तो काम की सफलता की दर कई गुना अधिक हो जाती है । यह ठीक उस प्रकार से कार्य करता जैसे टीम भावना में टीम का मुखिया अच्छे से मनोबल और धैर्य रखता तो आखिर के क्षणों में भी टीम विजयी हो जाती है। चरेवेति चरेवेति।
बहुत ही सुंदर आलेख लिखा है आपने Dear Sirji आपका बहुत बहुत आभार एवं हार्दिक धन्यवाद की आप मुझे समय समय पर लिंक भेजकर अपने विचारों से अवगत कराते रहते है ।
जवाब देंहटाएंआशा है कि आगे भी आपके विचारों से अवगत होता रहूंगा ।🌹🌹🌹🌹🌹👏👏👏👏👏👏👏